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अवधेश कुमार का ब्लॉग: लोगों की जान के साथ अर्थव्यवस्था को भी बचाने की कोशिश

By अवधेश कुमार | Updated: April 19, 2020 07:08 IST

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प्रधानमंत्नी द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन एवं लॉकडाउन को आगामी तीन मई तक विस्तारित किए जाने के बाद सरकार की ओर से मार्गनिर्देश आना निश्चित था. हालांकि लॉकडाउन के प्रथम चरण का मार्गनिर्देश देश के सामने था लेकिन उस दौरान आए अनुभवों के आलोक में इसमें कुछ संशोधन आवश्यक हो गए थे. प्रथम चरण में आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सब कुछ पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए थे.

इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था. उस समय प्रधानमंत्नी ने 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा करते हुए कहा था कि ‘जान है तो जहान है’. प्रथम चरण की समाप्ति के पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में उन्होंने इस नारे को यह कहते हुए बदला कि ‘जान भी जहान भी’. आप गहराई से देखेंगे तो जैसा प्रधानमंत्नी ने अपने संबोधन में कहा था कि इस दौरान सख्ती ज्यादा होगी, उसका अनुपालन तो है लेकिन इसके साथ जहान का ध्यान रखते हुए कुछ ऐसी गतिविधियों की अनुमति दी गई है जिसकी समाज के सभी वर्गो को आवश्यकता होती है, या फिर जिसे टालना किसी के हित में नहीं होगा या उनमें सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की संभावना है.

इस तरह यह संशोधित दिशानिर्देश लॉकडाउन के पहले चरण के दौरान मिले लाभ और दूसरे चरण में कोरोना के संक्रमण को रोकने का पूरा ध्यान तो रखता है, पर उसके साथ व्यावहारिकता और आम आदमी को राहत के बीच संतुलन भी स्थापित करता है. लॉकडाउन का मूल तत्व है सोशल डिस्टेंसिंग के द्वारा कोरोना संक्र मण के चक्र को तोड़ना जिससे इसका फैलाव किसी तरह न हो पाए एवं यह महामारी में न बदल सके. इस लक्ष्य को कभी ओझल किया ही नहीं जा सकता. इसलिए नए मार्गनिर्देश में भी पहले की तरह आम परिवहनों पर पूरी तरह रोक को जारी रखना तथा राज्यों की सीमाएं सील रहना बिल्कुल स्वाभाविक है.

यानी बस, मेट्रो, हवाई और ट्रेन सफर पूरी तरह बंद ही रहेगा. थोड़े शब्दों में कहें तो हवाई, रेल और सड़क मार्ग से यात्ना करना, शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थानों का संचालन, औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियां, सिनेमा हॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर रोक को जारी रखा जाएगा. राजनीतिक, धार्मिक-सांस्कृतिक एवं सामाजिक समारोहों पर रोक को भी जारी रहना ही था. कुल मिलाकर सामान्य अवस्था में हमारा-आपका बाहर निकलना प्रतिबंधित ही रहेगा. कार्यालयों को सैनिटाइटर उपलब्ध कराने, मार्गनिर्देश के अनुसार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शिफ्ट चलाने तथा थर्मल स्क्रीनिंग के आदेश कायम हैं. इसी तरह मुंह कवर करना यानी किसी तरह का मास्क पहने बिना किसी के बाहर नहीं निकलने का आदेश प्रधानमंत्नी की सख्ती के अनुरूप है.

लेकिन लॉकडाउन को सफल बनाने की दृष्टि से जारी मार्गनिर्देश की इन सख्तियों के समानांतर कई दूसरे पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी था. मसलन, खेती लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकती. खेतों में रबी की फसलें लगी हैं तो उन्हें काटना ही होगा. उससे संबंधित अन्य संसाधन एवं सुविधाएं तथा आने-जाने की अनुमति देनी ही होगी. कुछ प्रदेश सरकारों ने इसका ध्यान रखते हुए निश्चित समयसीमा में एवं सीमित संख्या में कृषि कार्य की अनुमति पहले से ही दे दी थी. नए दिशानिर्देश की विशेषता है कि इसमें इसका विस्तार से विवरण दे दिया गया है. उदाहरण के लिए किसानों और कृषि मजदूरों को हार्वेस्टिंग से जुड़े काम करने की छूट रहेगी, कृषि उपकरणों की दुकानें, उनके मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स की दुकानें भी खुली रहेंगी. खाद, बीज, कीटनाशकों के निर्माण और वितरण की गतिविधियां चालू रहेंगी, इनकी दुकानें खुली रहेंगी. इसके अलावा खेती से जुड़ी मशीनों को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने पर भी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है.

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