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संपादकीय: मानव जीवन के लिए नया खतरा सामने आया 

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 9, 2019 05:59 IST

मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए नया खतरा एक फंगस के रूप में सामने आया है. यह फंगस मनुष्य के शरीर में खून में प्रवेश कर जाता है और फिर उसके बाद डॉक्टर उसका इलाज नहीं कर पाते तथा मरीज की मौत हो जाती है.

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जैसे-तैसे एड्स को नियंत्रित करने में सफलता मिली तो मनुष्य के जीवन के लिए एक नया खतरा पैदा हो गया है. डर इस बात का है कि जिस तरह एड्स पर अंकुश लगाने में चिकित्सा वैज्ञानिकों को तीन दशक से ज्यादा का समय लग गया, उसी तरह इस नए जानलेवा खतरे का इलाज ढूंढने में भी दशकों न लग जाएं. वैसे वैज्ञानिक अभी तक कैंसर जैसी बीमारी का अचूक इलाज खोज नहीं सके हैं.

मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए नया खतरा एक फंगस के रूप में सामने आया है. यह फंगस मनुष्य के शरीर में खून में प्रवेश कर जाता है और फिर उसके बाद डॉक्टर उसका इलाज नहीं कर पाते तथा मरीज की मौत हो जाती है. सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि मरीज की मौत के बाद भी उसके शरीर में यह फंगस जीवित रहता है और दूसरे स्वस्थ मनुष्यों के शरीर में आसानी से प्रविष्ट हो जाता है.

पिछले साल मई में न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल फॉर एब्डॉमिनल सजर्री में एक बुजुर्ग मरीज के शरीर में सबसे पहले यह फंगस पाया गया था. अब यह फंगस अमेरिका के अलावा दक्षिण अफ्रीका तथा भारत तक पैर पसारने लगा है. हालांकि अब तक इस फंगस से पीड़ित कोई मरीज भारत या दक्षिण अफ्रीका में नहीं मिला है. मगर वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता का कोई मरीज अगर डॉक्टरों के पास आए तो उस पर खास नजर रखी जाए क्योंकि हो सकता है वह मरीज इस फंगस की चपेट में आ गया हो.

मनुष्य को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए चिकित्सा वैज्ञानिक सदियों से प्रयास कर रहे हैं. पिछले दो सौ वर्षो में चिकित्सा विज्ञान ने तेजी से प्रगति की. इसके फलस्वरूप कई जानलेवा बीमारियों को या तो समूल नष्ट कर दिया गया या उन पर काबू पाने में सफलता मिली. एक जमाने में कॉलरा या गैस्ट्रो जैसी बीमारियों से गांव के गांव उजड़ जाते थे और लोग हजारों की तादाद में प्राण गंवाते थे. पोलियो, टी.बी. जैसी जानलेवा बीमारियां तांडव मचा रही थीं.

आज पोलियो और चेचक जैसी बीमारियां अतीत का किस्सा बन चुकी हैं. टी.बी. भी अब लाइलाज बीमारी नहीं रही. अब आंख की तमाम बीमारियों का भी सफलतापूर्वक इलाज होने लगा है. इन सब सफलताओं के बीच नब्बे के दशक में एकाएक एच.आई.वी. के वायरस ने एड्स जैसी खतरनाक बीमारी की चुनौती पेश कर दी. 25-30 साल की कड़ी मेहनत के बाद एड्स पर अंकुश लगाने में वैज्ञानिक कामयाब हो गए. कैंसर के इलाज में भी नई मंजिलें मिली हैं. यह कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि चिकित्सा विज्ञान हर बड़े रोग पर काबू पाने में कामयाब हो गया है.

मगर नए फंगस ने वैज्ञानिकों के सामने नई चुनौती पेश कर दी है. यह फंगस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को शिकार बनाता है. ऐसे व्यक्तियों की तादाद दुनिया में करोड़ों में है. इसीलिए वैज्ञानिक ज्यादा चिंतित हैं. मगर वैज्ञानिकों ने हिम्मत नहीं हारी है. उम्मीद है कि मनुष्य जीवन को बचाने की इस नई जंग में भी वैज्ञानिक कामयाब हो जाएंगे. 

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