बीमारी का इलाज नहीं करता डॉक्टर, मरीज के मन में उम्मीद भी जगाता?, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा-संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा

By फहीम ख़ान | Updated: April 15, 2026 17:34 IST2026-04-15T17:33:40+5:302026-04-15T17:34:45+5:30

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव, नागपुर एम्स के अध्यक्ष डॉ. अनंत पांढरे और कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रशांत जोशी उपस्थित थे.

nagpur President Draupadi Murmu said serving humanity with sensitivity Does doctor not just treat disease but also instill hope patient | बीमारी का इलाज नहीं करता डॉक्टर, मरीज के मन में उम्मीद भी जगाता?, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा-संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा

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Highlightsअनुसंधान, जिज्ञासा और निरंतर सीखने की सोच अपनाएं.नागपुर एम्स के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अपील.दीक्षांत समारोह बुधवार को संस्थान के सभागार में आयोजित किया गया.

नागपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में सेवा भाव के साथ जीवनभर सीखते रहने की आदत बनाए रखना जरूरी है. इस क्षेत्र में नैतिक मूल्यों का स्थान सबसे ऊपर है. जिज्ञासा, अनुसंधान और लगातार सीखने की प्रवृत्ति अपनाएं. तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, वह करुणा, ईमानदारी और मरीज केंद्रित सोच की जगह नहीं ले सकती. चिकित्सा क्षेत्र में सफलता के साथ करुणा का भाव बनाए रखने से आप एक बेहतर इंसान भी बन सकते हैं. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (नागपुरएम्स) का द्वितीय दीक्षांत समारोह बुधवार को संस्थान के सभागार में आयोजित किया गया. इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने विचार व्यक्त किए. समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव, नागपुर एम्स के अध्यक्ष डॉ. अनंत पांढरे और कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रशांत जोशी उपस्थित थे.

छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा का माध्यम है. एक डॉक्टर सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं करता, बल्कि मरीज के मन में उम्मीद भी जगाता है. डॉक्टर की सहानुभूति मरीज के साथ-साथ उसके परिवार को भी सहारा देती है.

कई बार डॉक्टरों के सामने कठिन परिस्थितियां आती हैं, लेकिन ऐसे समय में भी मरीज और उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील रहना जरूरी है. मरीजों और उनके परिवारों को भी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ सम्मान से व्यवहार करना चाहिए, ताकि डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास बना रहे.

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है. नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और उन्नत शोध के कारण चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ रहा है. इन बदलावों को अपनाते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की दूरी कम करनी चाहिए, ताकि सभी को बेहतर इलाज मिल सके.

एम्स और स्वास्थ्य विवि के बीच सहयोग जरूरी : राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसे जीवनशैली से जुड़े रोग तेजी से बढ़ रहे हैं. मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे अवसाद, चिंता और नशे की लत भी गंभीर चुनौती बन रही है. आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से लोग अब बेहतर इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर बढ़ रहे हैं.

स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक, निजी और धर्मार्थ संस्थानों को मजबूत करना होगा. नागपुर एम्स और महाराष्ट्र स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के बीच व्यापक सहयोग होना चाहिए, जिससे शोध, अनुभव और कौशल का आदान-प्रदान हो सके और स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत बने.

पांच किलोमीटर के दायरे में चिकित्सा सुविधा : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों में 15 से अधिक मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं. उद्देश्य है कि स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. संक्रामक रोगों से निपटने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है. सरकार का प्रयास है कि हर पांच किलोमीटर के दायरे में सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक बनाया जाए. आज दुनिया को बेहतर चिकित्सा सेवा की जरूरत है. इस संस्थान से निकलने वाले छात्रों को इलाज के साथ करुणा का भाव भी बनाए रखना चाहिए. ज्ञान और करुणा का मेल ही सफलता की कुंजी है.

210 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों प्रतीकात्मक रूप से विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले आठ विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई. इसके बाद दीक्षांत समारोह में कुल 210 विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के सम्मान में डिग्री और स्वर्ण पदक प्रदान किए गए. इनमें 129 एमबीबीएस, 29 एमडी/एमएस, 35 बी.एससी. (ऑनर्स) नर्सिंग, 5 एम.एससी. तथा 12 संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा शाखाओं के स्नातकों का समावेश है.

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