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केसर की फसल पर साही की मार

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: May 12, 2026 13:29 IST

कई किसानों का आरोप है कि कृषि और वन्यजीव विभागों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर कोई खास कार्रवाई नहीं की गई है।

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ठळक मुद्देकेसर के फूल खिलने से पहले ही जमीन के नीचे मौजूद केसर के कंदों को खा जाता है।फसल की पैदावार और किसानों की आजीविका, दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

जम्‍मूः कश्मीर का मशहूर केसर उद्योग एक नए संकट का सामना कर रहा है। घाटी के केसर वाले इलाकों के किसानों का कहना है कि जमीन में बिल बनाकर रहने वाले 'इंडियन क्रेस्टेड पोर्क्युपाइन' (साही) से उनकी फसल को काफी नुकसान पहुंच रहा है। यह एक रात में घूमने वाला चूहे जैसा जानवर है, जो केसर के फूल खिलने से पहले ही जमीन के नीचे मौजूद केसर के कंदों को खा जाता है।

किसानों का कहना है कि ये साही केसर के खेतों में बिल खोदकर जमीन के नीचे मौजूद कंदों को नष्ट कर रहे हैं, जिससे फसल की पैदावार और किसानों की आजीविका, दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। कई किसानों का आरोप है कि कृषि और वन्यजीव विभागों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर कोई खास कार्रवाई नहीं की गई है।

केसर उत्‍पादक मोहम्मद सुल्तान गनई कहते थे कि साही का खतरा हर दिन बढ़ता जा रहा है, और इसका हमारी केसर की पैदावार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। आप खेतों में खोदे गए बड़े-बड़े गड्ढे देख सकते हैं, जहां रात में साही आते हैं और केसर के कंद खा जाते हैं। वे कहते थे कि हमने सरकार से बार-बार गुहार लगाई है कि वह हमारी मदद करे और हमारी फसलों को इस बढ़ते खतरे से बचाए।

एक बार एक टीम ने इस इलाके का दौरा किया था, लेकिन उसके बाद से इस समस्या को सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपील करता हूं कि वे दखल दें और कश्मीर के केसर उद्योग को बचाने में मदद करें, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

सरकारी अनुमानों के मुताबिक, पुलवामा जिले के पंपोर इलाके में केसर की लगभग 400 से 500 कनाल जमीन इस जानवर की वजह से खराब हो गई है। इससे केसर उगाने वाले किसानों में चिंता बढ़ गई है, जिन्हें डर है कि इसका असर पूरे दक्षिण कश्मीर में केसर के उत्पादन पर पड़ सकता है।

केसर उत्‍पादक किसान पत्रकारों की टीम का आभार प्रकट करते हुए कहते थे कि हम आपके आभारी हैं कि आप हमारी समस्या को अधिकारियों के सामने उठाने के लिए यहाँ आए। संबंधित विभागों को जानकारी दिए हुए एक महीने से ज्‍यादा समय हो गया है, लेकिन अब तक हमें कोई राहत नहीं मिली है। 

कृषि विभाग का कहना है कि यह मामला वन्यजीव विभाग का है, लेकिन असल में यह दोनों विभागों से जुड़ा है, और उन्हें मिलकर इसका कोई हल निकालना चाहिए। अधिकारियों ने एक बार इस इलाके का दौरा किया था, लेकिन उसके बाद जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं किया गया। वे अधिकारियों से गुजारिश करते थे कि वे खुद आकर यहां की स्थिति देखें; केसर की लगभग हर जमीन इस समस्या से प्रभावित हुई है।

ये साही केसर के कंदों को खा रहे हैं और पौधों में फंगल इन्फेक्शन भी फैला रहे हैं। विभागों को केसर के कंदों को साही से बचाने के लिए तुरंत कोई पहल शुरू करनी चाहिए। पंपोर के केसर किसान एम. अशरफ बेग कहते थे कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आज हमारे पास केसर की जितनी भी खेती बची है, वह भी आने वाले सालों में खत्म हो सकती है।

एक और किसान ने इस स्थिति को इस साल किसानों के सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को बढ़ते खतरे के बारे में जानकारी देने के बावजूद किसानों को "उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।"

टॅग्स :जम्मू कश्मीरFarmers
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