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फिरोजाबादः मिड डे मील योजना में 11.46 करोड़ रुपए का घोटाला, प्रधानाध्यापक चंद्रकांत शर्मा निलंबित, जानें मामला

By संदीप दाहिमा | Updated: August 3, 2022 19:59 IST

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फिरोजाबाद जिले में मध्याह्न भोजन योजना के धन में 11.46 करोड़ रुपए का घोटाला करने के आरोपी एक प्रधानाध्यापक को बुधवार को निलंबित कर दिया गया। बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजलि अग्रवाल ने बताया कि सतर्कता अधिष्ठान द्वारा टूंडला स्थित प्राथमिक विद्यालय जाजपुर में कार्यरत प्रधानाध्यापक चंद्रकांत शर्मा के खिलाफ मध्याह्न भोजन योजना में घोटाला करने का मामला मंगलवार को आगरा में दर्ज करवाए जाने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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आगरा के पुलिस अधीक्षक (सतर्कता) आलोक शर्मा ने बुधवार को बताया कि प्रधानाध्यापक चंद्रकांत शर्मा ने फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर एक गैर सरकारी संगठन गठित करके अपने विभाग तथा बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की मदद से मध्याह्न भोजन योजना में 11.46 करोड़ रुपए का गबन किया। उसके खिलाफ पिछली 27 जुलाई को मुकदमा दर्ज किया गया था। चंद्रकांत शर्मा ने यह गबन फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में पंजीकृत एनजीओ सारस्वत आवासीय शिक्षा सेवा समिति के जरिए किया।
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दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, सतर्कता अधिष्ठान को शिकायत मिली थी कि फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में तैनात प्राइमरी शिक्षक चंद्रकांत शर्मा ने मध्याह्न भोजन योजना में बड़ा घोटाला किया है। जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक वर्ष 2006 में प्राइमरी शिक्षक चंद्रकांत शर्मा ने सारस्वत आवासीय शिक्षा सेवा समिति के नाम से एक संस्था का पंजीकरण चिटफंड कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कराया।
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इसके बाद वर्ष 2008 में उसने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत करके फिरोजाबाद जिले में एक के बाद एक सभी सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का काम ले लिया और करोड़ों के वारे-न्यारे किए।
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जांच में यह भी सामने आया कि चंद्रकांत शर्मा ने अपने पिता को संस्था का अध्यक्ष और मां को कोषाध्यक्ष बनाया। इसके साथ ही परिवार के कई अन्य लोगों को भी इस संस्था में सदस्य बनाया। इसके बाद उसे काम मिला तो अपने माता-पिता को मृत दिखा कर खुद सुनील शर्मा के नाम से कोषाध्यक्ष बन गया जबकि शिक्षक चंद्रकांत शर्मा के माता-पिता अभी जीवित हैं।
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जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2008 से मई 2014 तक फिरोजाबाद जिले में इस संस्था को मध्याह्न भोजन का काम दिया गया और इसके एवज में उसे रकम 11करोड़ 46लाख 40 हजार 384 रुपये का भुगतान किया गया जिसे बैंक के अधिकारियों से मिलीभगत करके कई बैंकों के संस्था के खाते में जमा कर लिया गया। सूत्रों ने बताया कि चंद्रकांत ने घोटाले की रकम को प्रॉपर्टी में निवेश किया है और इसको लेकर उसने फिरोजाबाद में कई प्रॉपर्टी खरीदी, मकान बनवाये और बिजली के कनेक्शन भी फर्जी दस्तावेजों से लिए हैं और न ही अपने भवन का नक्शा पास कराया है।
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