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'टेंडर मैनेजमेंट रैकेट चलाते थे पूर्व CM देवेंद्र फड़नवीस', कांंग्रेस ने बीजेपी नेता पर लगाए गंभीर आरोप

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 17, 2020 08:03 IST

कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने बताया कि पिछले वर्ष अगस्त में उन्होंने समुचित कागजात के साथ दावा किया था कि फडणवीस सरकार टेंडर मैनेजमेंट रैकेट चला रही है.

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ठळक मुद्देइसमें नवी मुंबई में सिडको की प्रधानमंत्री आवास योजना (14000 करोड़ रु.), शिवस्मारक परियोजना का टेंडर और आरे कॉलोनी के मेट्रो भवन का टेंडर घोटाले शामिल हैं. कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई थी. इसी आपत्ति पर कैग ने मुहर लगाई है.

कांग्रेस ने पूर्ववर्ती देवेंद्र फड़नवीस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह टेंडर मैनेजमेंट रैकेट चलाती थी. इसके जरिये सरकार ने अपनी मर्जी के लोगों को टेंडर दिलाए. इनमें नवी मुंबई में सिडको की प्रधानमंत्री आवास योजना और मुंबई मेट्रो भवन का टेंडर घोटाला शामिल है. पार्टी ने दावा किया है कि मेट्रो भवन के टेंडर प्रक्रिया के घोटाले पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने आपत्ति जताई है.

कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने बताया कि पिछले वर्ष अगस्त में उन्होंने समुचित कागजात के साथ दावा किया था कि फडणवीस सरकार टेंडर मैनेजमेंट रैकेट चला रही है. इसमें नवी मुंबई में सिडको की प्रधानमंत्री आवास योजना (14000 करोड़ रु.), शिवस्मारक परियोजना का टेंडर और आरे कॉलोनी के मेट्रो भवन का टेंडर घोटाले शामिल हैं.

सावंत ने आरोप लगाया कि फडणवीस सरकार के कार्यकाल में निर्धारित नियमों को ताक पर रखकर मनमर्जी से नए नियम तैयार कर राज्य की बड़ी परियोजनाओं के टेंडर बनाए जाते थे. इसके जरिये सरकार की मर्जी वाले ठेकेदारों को ही टेंडर देने का रास्ता बनाया जाता था.

कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि नवी मुंबई में सिडको की प्रधानमंत्री आवास योजना में करीब 90000 मकान बनाए जाने थे. यह परियोजना 14000 करोड़ रु. की थी. इसके लिए 4 टेंडर जारी किए गए. जिन 4 ठेकेदारों को टेंडर दिए जाने थे, उसी हिसाब से टेंडर के नियम और शर्तें तैयार की गई थीं. इसके लिए दो बार शुद्धिपत्रक जारी किए गए.

कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई थी. इसी आपत्ति पर कैग ने मुहर लगाई है. एमएमआरडीए ने इस बारे में जो सफाई दी है, उसे कैग ने स्वीकार नहीं किया है. सावंत ने आरोप लगाया कि शिवस्मारक घोटाले की भांति एमएमआरडीए ने नागार्जुन कंपनी से समझौता किया और टेंडर की राशि में पहले 73 करोड़ रु. कम किए और बाद में परियोजना का प्रारूप बदलकर 117 करोड़ रु. कम किए.

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