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वाटर विजन 2047: देश के हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनेंगे, 25,000 बनाए जा चुके, पीएम मोदी ने कहा- मनरेगा में पानी पर ज्यादा काम होना चाहिए

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 5, 2023 11:32 IST

जल शक्ति मंत्रालय ने पांच-छह जनवरी को भोपाल में जल से जुड़े विषय पर राज्यों के मंत्रियों के पहले अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया है।

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ठळक मुद्देप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मनरेगा के तहत, ज्यादा से ज्यादा काम पानी पर होना चाहिए।सम्मेलन में पीएम ने कहा कि जल संरक्षण में सर्कुलर इकोनॉमी की बड़ी भूमिका होती है। राज्यों के मंत्रियों के इस पहले अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन का विषय ‘वॉटर विजन@2047’ है। 

नयी दिल्लीः प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि देश ने जल सुरक्षा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, और 2047 के लिए जल दृष्टि अमृत काल में एक बड़ा योगदान होगा। उन्होंने कहा कि  जल संरक्षण के अभियानों में लोगों की भागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अकेले सरकार के प्रयासों से कुछ नहीं हो सकता। 

राज्यों के जल मंत्रियों के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने जल सुरक्षा में बड़ी प्रगति की है। 2047 की ओर हमारी जल दृष्टि अमृत काल में एक बड़ा योगदान होगा। देश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाने के लिए मिलकर काम कर रहा है। अब तक 25,000 अमृत सरोवर बन चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जल राज्यों के बीच सहयोग व समन्वय का विषय होना चाहिए और शहरीकरण की तेज गति को देखते हुए उन्हें पहले से ही इसके लिए योजना तैयार करनी चाहिए। उनकी इस टिप्पणी के कई मायने हैं, क्योंकि दशकों से कई राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मनरेगा के तहत, ज्यादा से ज्यादा काम पानी पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के अभियानों में जनता को, सामाजिक संगठनों को और सिविल सोसायटी को ज्यादा से ज्यादा शामिल करना होगा। मोदी ने कहा, ‘‘जब किसी अभियान से जनता जुड़ती है तो उसे उसकी गंभीरता का भी पता चलता है।’’ 

सम्मेलन में पीएम ने कहा कि जल संरक्षण में सर्कुलर इकोनॉमी की बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने कहा, सरकार ने इस बजट में सर्कुलर इकोनॉमी पर काफी जोर दिया है। जब ट्रीटेड जल को पुन: उपयोग किया जाता है, ताजा जल को संरक्षण किया जाता है तो उससे पूरे इकोसिस्टम को बहुत लाभ होता है। 

इसके साथ ही उन्होंने जियो मैपिंग और जियो सेंसिंग जैसी तकनीक का जिक्र किया और कहा कि ये जल संरक्षण के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कई राज्यों ने इसमें अच्छा काम किया है और कई राज्य इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जल संरक्षण के लिए केंद्र ने अटल भू-जल संरक्षण योजना की शुरुआत की है।

गौरतलब है कि जल शक्ति मंत्रालय ने पांच-छह जनवरी को भोपाल में जल से जुड़े विषय पर राज्यों के मंत्रियों के पहले अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया है। जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, राज्यों के मंत्रियों के इस पहले अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन का विषय ‘वॉटर विजन@2047’ है। 

भाषा इनपुट के साथ

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