लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब विधानसभा चुनावों के बाद ही पंचायत चुनाव होंगे. सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट (मंत्रिमंडल) की बैठक में पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों (ओबीसी) का आनुपातिक आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी देने के फैसले से यह साफ हो गया. इस आयोग को छह माह में अपनी रिपोर्ट देनी होगी. जबकि अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव होने है. इस आधार पर यह कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहुत ही सोच समझ कर यह फैसला लिया है. अब पंचायत चुनाव भी सरकार की योजना के मुताबिक अगले साल होंगे और सरकार पर भी पंचायत चुनाव तय समय में न कराने को लेकर विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोप थम जाएंगे.
आयोग के कार्य और उसका स्वरूप :
सूबे के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए यह कहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का फैसला न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है. इस आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्य की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) में पिछड़ेपन की प्रकृति, उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों तथा वर्तमान स्थिति का अध्ययन करना है. इसके आधार पर ओबीसी वर्ग को निकायवार आनुपातिक आरक्षण प्रदान करने की सिफारिश की जाएगी.
सुरेश खन्ना के मुताबिक इस आयोग में पांच सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों में से करेगी. इनमें से एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा. आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल सामान्य रूप से नियुक्ति से 6 महीने का होगा. सुरेश खन्ना का अनुमान है कि आयोग पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट आगामी नवंबर-दिसंबर तक सरकार को सौंप देगा.
इसके बाद ही सरकार पंचायत चुनाव करने का फैसला लेगी. जाहिर है उस वक्त तक राज्य में विधानसभा चुनाव कराने की तैयारियां शुरू हो चुकी होंगी, ऐसे में विधानसभा चुनावों के बाद ही पंचायत चुनाव कराने पर सहमति बनेगी. फिलहाल इस सवाल का वित्त मंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया. उन्होने यह ही नहीं बताया कि इसी माह पंचायत चुनाव के खत्म हो रहे कार्यकाल के बाद क्या सरकार ग्राम पंचायत प्रधान को प्रशासक बना सकती है या फिर सरकारी अधिकारी को पंचायतों का प्रशासक बनाया जाएगा.
कैबिनेट ने यह फैसले भी लिए
यह राजनीतिक दांव चलने के साथ ही कैबिनेट कुल 12 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. जिसके चलते लखनऊ मेट्रो के चारबाग से वसंतकुंज कॉरिडोर के एमओयू को मंजूरी दी गई. इसके साथ ही आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के तहत मेट्रो कॉरिडोर-2 में आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक मेट्रो स्टेशन और वायाडक्ट निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरण के प्रस्ताव पर सहमति जताई गई. पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाकर 12,000 हजार रुपए प्रतिमाह करने के प्रस्ताव पर मोहर लगाई गई.
बीवीएससी एंड एएच (बैचलर ऑफ वेटनरी साइंस ऐंड एनिमल हसबेंड्री) के छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता 8 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। प्रदेश के विभिन्न वेटनरी कॉलेजों में हर साल करीब 2 हजार से 2,500 छात्र प्रवेश लेते हैं. वर्तमान में यूपी में 10 हजार से अधिक वेटनरी छात्र अध्ययन कर रहे हैं. सरकार के इस फैसले से छात्रों को आर्थिक सहायता मिलेगी.
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