लाइव न्यूज़ :

क्या आप जानते हैं कि बंधुआ मजदूर कौन होते हैं?, पैसे लेते हैं और खा जाते हैं, मजदूर मजदूरी चीज का फायदा उठाते हैं, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

By भाषा | Updated: September 7, 2022 22:19 IST

पीठ ने कहा, ‘‘क्या आप जानते हैं कि बंधुआ मजदूर कौन होते हैं? वे बंधुआ नहीं हैं। वे पैसे लेते हैं और वहां आते हैं और ईंट भट्टों की ओर से काम पर रखे जाते हैं। वे पिछड़े इलाकों से आते हैं। वे पैसे लेते हैं और पैसे खा जाते हैं और फिर काम छोड़ देते हैं। यह देश में एक रैकेट है। ये मजदूर केवल इस बंधुआ मजदूरी चीज का फायदा उठाते हैं।’’

Open in App
ठळक मुद्दे ईंट भट्ठा ठेकेदार के एक सहयोगी द्वारा कथित तौर पर बार-बार बलात्कार किया गया।पीठ को बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच शुरू कर दी गई। जम्मू कश्मीर प्रशासन आवश्यक होने पर कानून के तहत उपचारात्मक कदम उठाएगा।

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि देश में कोई बंधुआ मजदूर नहीं हैं और बंधुआ मजदूर के ‘‘बहाने’’ एक रैकेट चल रहा है। न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने यह टिप्पणी उस महिला श्रमिक की ओर से दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए की जिससे जम्मू के आरएस पुरा सब डिविजन में ईंट भट्ठा ठेकेदार के एक सहयोगी द्वारा कथित तौर पर बार-बार बलात्कार किया गया।

पीठ ने कहा, ‘‘क्या आप जानते हैं कि बंधुआ मजदूर कौन होते हैं? वे बंधुआ नहीं हैं। वे पैसे लेते हैं और वहां आते हैं और ईंट भट्टों की ओर से काम पर रखे जाते हैं। वे पिछड़े इलाकों से आते हैं। वे पैसे लेते हैं और पैसे खा जाते हैं और फिर काम छोड़ देते हैं। यह देश में एक रैकेट है। ये मजदूर केवल इस बंधुआ मजदूरी चीज का फायदा उठाते हैं।’’

जम्मू-कश्मीर की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच शुरू कर दी गई। हालांकि, पीड़िता का पता नहीं चल पाया, जिसके कारण 2018 में मामला बंद हो गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि कई पहलुओं का हवाला देते हुए एक विस्तृत जवाब दायर किया गया है और जम्मू कश्मीर प्रशासन आवश्यक होने पर कानून के तहत उपचारात्मक कदम उठाएगा।

2012 में दायर याचिका के अनुसार, महिला और उसके पति द्वारा जून में अपने मूल राज्य लौटने की इच्छा व्यक्त करने के बाद, ठेकेदार ने उन्हें तब तक छोड़ने से इनकार कर दिया जब तक कि वे उसे 3 लाख रुपये का भुगतान नहीं कर देते। याचिका के अनुसार हालांकि पति वहां से भागने में सफल रहा, लेकिन उसकी पत्नी और बच्चे को अवैध रूप से कैद करके रखा गया।

आरोप है कि अवैध कैद में रखे जाने के दौरान ठेकेदार और अन्य लोगों ने उसके साथ बार-बार बलात्कार किया। दावा किया गया कि पीड़िता और उसके बेटे को बाद में एक एनजीओ और पुलिस के हस्तक्षेप पर एक पुनर्वास गृह में स्थानांतरित किया गया। 

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टजम्मू कश्मीरदिल्ली
Open in App

संबंधित खबरें

भारतजमानत नियम और जेल अपवाद, यूएपीए मामले में भी यही नियम?, सुप्रीम कोर्ट ने हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को दी राहत, पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार थाने जाओ?

भारतदिल्ली बार काउंसिल चुनावः मतगणना पर रोक, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा- न्यायालय फैसला नहीं सुनाता, तब तक मतपत्रों की गिनती स्थगित

भारतओडिशा भीषण गर्मीः बौध शहर में 42.9 डिग्री सेल्सियस?, 11 स्थानों पर अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज

भारतकभी किसी के विचारों पर आत्मावलोकन भी तो हो!

भारतदिल्ली में भीषण लू का कहर, IMD ने 45 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंचने की चेतावनी दी

भारत अधिक खबरें

भारत'भारत अब नक्सल-मुक्त है': अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में उग्रवाद के खात्मे की घोषणा की

भारतMadhya Pradesh: खेलते‑खेलते कार में बंद 4 साल की बच्ची की मौत, दो घंटे तक किसी ने नहीं देखा

भारतमुंबई और अहमदाबाद के बीच भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सामने आई

भारतमहाराष्ट्र के पालघर में शादी के परिवार को ले जा रहे एक ट्रक की दूसरे ट्रक से टक्कर, 12 की मौत, 20 से ज़्यादा घायल

भारतरांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी का किया गया यौन शोषण, हुई गर्भवती, कराया गया गर्भपात! नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र