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चुनावी हार को लेकर सोनिया गांधी ने बुलाई 10 मई को बैठक, हार की होगी समीक्षा, हंगामे के आसार

By शीलेष शर्मा | Updated: May 8, 2021 21:27 IST

ममता का विरोध करने से जहां बंगाल में कांग्रेस कोई सीट नहीं जीत सकी वहीं दूसरी ओर केरल में भी मुस्लिम मतदाताओं ने नाराज़ हो कर कांग्रेस के खिलाफ वोट किया।

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ठळक मुद्देकांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हार की ईमानदारी से समीक्षा करने की बात कही है।केरल और असम में पार्टी सत्ता से एक बार फिर बाहर रह गई।कांग्रेस की मौजूदा दशा-दिशा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

लगातार चुनाव हारने के बाद अब कांग्रेस हाल के विधानसभा चुनाव में हुई पराजय को लेकर समीक्षा करने के लिए तैयार हो गयी है।  इसी इरादे से पार्टी की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 10 मई को पार्टी की सर्वोच्च इकाई "कांग्रेस कार्यसमिति" की बैठक बुलाने का फैसला किया है।  सूत्रों के अनुसार यह बैठक हंगामेदार होने की संभावना जताई जा रही है।  

पार्टी सूत्रों का कहना था कि तमाम वरिष्ठ नेताओं ने कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी से यह पूछने का फैसला किया है कि आखिरकार पार्टी में महत्वपूर्ण फैसले कौन ले रहा है।  जिन पार्टी नेताओं ने यह सवाल उठाने का निर्णय लिया है उनका सीधा हमला राहुल गांधी के नेतृत्व पर होगा क्योंकि  पार्टी अध्यक्ष न होते हुए भी राहुल और उनके सिपहसालार पार्टी के अंदर फैसले कर रहे हैं जिससे अधिकांश वरिष्ठ नेता नाखुश हैं।  

सूत्रों ने दावा किया कि  केरल के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने कार्यसमिति की बैठक से पहले सोनिया गांधी को पत्र भेज कर इस बात पर नाराज़गी जताई है कि  पश्चिमी बंगाल में माकपा से समझौता करने के कारण केरल में सत्ता विरोधी लहर होने के बावजूद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है।  इन नेताओं का यह भी तर्क है कि बंगाल में यदि कांग्रेस ममता का समर्थन करती तो बड़ी संख्या में अल्पसंख़्यकों का मत कांग्रेस को मिलता।  

सोनिया गाँधी ने कार्यसमिति की बैठक के लिए जो अजेंडा तैयार किया है उसमें पार्टी की चुनावी पराजय और कोरोना से पैदा हुए हालातों पर चर्चा की जानी है।  ऐसे भी संकेत मिले हैं कि  कार्यसमिति की बैठक में केरल  और असम के नेताओं को विशेष रूप से उपस्थित रहने को कहा जा सकता है।  पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने लोकमत से बातचीत करते हुए खुल कर कहा कि अब समय आ गया है जब पार्टी को तय करना होगा कि  जो पार्टी के फैसले लेगा उसकी जवाबदेही भी सुनिश्चित हो।  

पार्टी अध्यक्ष पर तेज़ होते दवाब के बाद कार्य समिति संगठनात्मक चुनावों को लेकर चर्चा कर सकती है क्योंकि अधिकाँश ग्रुप 23 के नेता जल्दी चुनाव चाहते हैं जो सीधे सीधे राहुल गांधी के नेतृत्व को सीधी चुनौती देने की तैयारी है।  पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल , रणदीप सुरजेवाला , अजय माकन  सरीखे नेताओं को फैसलों से दूर रखने का स्वर भी इस बैठक में मुखर हो सकता है।  

टॅग्स :कांग्रेससोनिया गाँधीकांग्रेस कार्य समिति
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