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नेताओं, प्रशंसकों ने सुब्रत मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी

By भाषा | Updated: November 5, 2021 15:24 IST

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कोलकाता, पांच नवंबर पश्चिम बंगाल के पूर्व पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए शुक्रवार को यहां रवींद्र सदन में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एकत्र हुए। मुखर्जी का हृदय गति रुकने से एक सरकारी अस्पताल में निधन हो गया था।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं फरहाद हकीम और अरूप विश्वास, कांग्रेस के अब्दुल मन्नान और प्रदीप भट्टाचार्य के साथ-साथ भाजपा के दिलीप घोष और राहुल सिन्हा ने कोलकाता के पूर्व मेयर को श्रद्धांजलि दी।

माकपा के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्रा और पार्टी प्रवक्ता सुजान चक्रवर्ती ने भी मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुखर्जी का बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजकर 22 मिनट पर एसएसकेएम अस्पताल में निधन हो गया था।

हकीम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मैं सुब्रत दा को देखकर बड़ा हुआ हूं। वह मेरे बचपन के हीरो थे। ऐसे कई उदाहरण हैं जब मैंने उनसे सलाह के लिए संपर्क किया और उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया। मैंने अपने बड़े भाई को खो दिया है।”

भाजपा के उपाध्यक्ष घोष ने कहा, “बंगाल की राजनीति में उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। वे बंगाल की राजनीति के ‘भीष्म पितामह’ थे। यह हम सभी के लिए एक बड़ी क्षति है।”

वयोवृद्ध नेता के हजारों प्रशंसक और समर्थक भी अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए रवींद्र सदन में एकत्रित हुए।

उद्योगपति संजीव गोयनका ने अपने शोक संदेश में कहा, “सुब्रत मुखर्जी के रूप में हमने एक बहुत अच्छे और काबिल नेता को खो दिया। व्यक्तिगत स्तर पर, मैं उन्हें 35 वर्षों से अधिक समय से जानता था। यह बहुत गहरी व्यक्तिगत क्षति है।”

मुखर्जी (75) को 24 अक्टूबर को सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुखर्जी की एक नवंबर को ‘एंजियोप्लास्टी’ हुई थी और उनके दिल की धमनियों में दो स्टेंट डाले गए थे।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक नेता ने कहा, “सुब्रत के पार्थिव शरीर को पहले राज्य विधानसभा ले जाया जाएगा और फिर बालीगंज स्थित उनके घर, इसके बाद उनके क्लब और फिर अंतिम संस्कार के लिये केवड़ातोला श्मशान घाट ले जाया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि सुब्रत दा का निधन उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है।

उन्होंने बृहस्पतिवार को अस्पताल में कहा था, “मैंने अपने जीवन में कई आपदाओं का सामना किया है लेकिन यह बहुत बड़ा झटका है। मुझे नहीं लगता कि सुब्रत दा जैसा कोई दूसरा व्यक्ति होगा, जो इतना अच्छा और मेहनती होगा। पार्टी और उनका निर्वाचन क्षेत्र (बालीगंज) उनकी आत्मा थी। मैं सुब्रत दा का शव नहीं देख पाऊंगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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