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हर किसी को दवाये लिखने की इजाजत नही दी जा सकती: न्यायालय

By भाषा | Updated: November 19, 2020 21:31 IST

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नयी दिल्ली, 19 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि हर किसी को दवायें लिखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। शीर्ष अदालत ने कोविड-19 के लिये प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के नाम पर आयूष के चिकित्सकों को सरकार से मंजूर मिश्रण और गोलियां लिखने की अनुमति देने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूति एम आर शाह की पीठ ने सालिसीटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय के 21 अगस्त के आदेश के खिलाफ अपील में वह एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करें।

शीर्ष अदालत ने मेहता से जानना चाहा कि क्या आयूष मंत्रालय के इस बारे में कोई दिशा निर्देश हैं। आयूष मंत्रालय (आयूर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी के लिये हैं)

सालसीटर जनलर ने कहा कि वह इस बारे में दिशानिर्देश रिकार्ड पर लायेंगे।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अनुरोध के अनुरूप एक सप्ताह का समय दिया जाता है। इसे एक सप्ताह बाद सूचीबद्ध कियाजाये।’’

इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘हर किसी को दवायें लिखने की इजाजत नहीं दी जा सकती’’ और ‘‘हो सकता है प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये इनका इस्तेमाल हो लेकिन उपचार के लिये नहीं।’’

उच्च न्यायालय ने उस याचिका पर यह आदेश दिया था जिसमे आयूष मंत्रालय की छह मार्च की अधिसूचना के अनुरूप होम्योपैथी चिकित्सकों को काम करने की तत्काल अनुमति देने का राज्य सरकार को निर्देश दिया जाये। इस अधिसूचना में कहा गया था कि राज्य सरकार कोरोनावायरस के खिलाफ संघर्ष में होम्योपैथी पद्धति को दूसरी चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने के लिये कदम उठायेंगी।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में इस तथ्य का जिक्र किया था कि आयूष मंत्रालय के परामर्श का सरकार अनुसरण कर रही है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये उन लोगों को मुफ्त में गोलियां दे रही है। राज्य मेडिकल प्रोटोकाल के अनुसार कोविड-19 से प्रभावित व्यक्तियों का सरकार और उसके द्वारा अधिकृत लोगों के अलावा कोई अन्य उपचार नहीं करेगा।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि सरकार के मेडिकल प्रोटोकाल के अनुसार आयूष चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक कोई भी दवा कोविड-19 बीमारी के इलाज के लिये बताते हुये नहीं लिखेंगे।

अदालत ने यह भी कहा कि भारत सरकार के आयूष मंत्रालय द्वारा जारी परामर्श में आयूष चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों द्वारा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले मिश्रण या गोलियां लिखने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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