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Bihar: राज्यसभा चुनाव के लिए एनडीए और महागठबंधन ने बिछाई बिसात, एनडीए उम्मीदवार को जीतने के लिए चाहिए सिर्फ 3 विधायक  

By एस पी सिन्हा | Updated: March 11, 2026 17:44 IST

Bihar News:  वहीं विपक्षी खेमे की संख्या अपेक्षाकृत कम है। विपक्षी गठबंधन में राजद के 25, कांग्रेस के 6, वाम दलों के 3 और आईपीपी के 1 विधायक को मिलाकर कुल 35 विधायक होते हैं।

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Bihar News:  बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और महागठबंधन के बीच जोर आजमाइश शुरू हो गई है। राजद ने मंगलवार को बैठक की थी। लेकिन इसमें एआईएमआईएम के विधायकों ने भाग नहीं लिया था। इस बीच बुधवार को एआईएमआईएम के विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष ने राजद नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात की।

वहीं, राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले रालोमो प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह और भाजपा एमएलसी संतोष कुमार सिंह की कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा से मुलाकात को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है।

दरअसल, बिहार से राज्यसभा की पांचवीं सीट से एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को जीतने के लिए सिर्फ 3 विधायकों की जरूरत है, जबकि महागठबंधन प्रत्याशी एडी सिंह को 6 वोटों की जरूरत है। इतने कड़े संघर्ष के बीच रालोमो नेता और कांग्रेस विधायक की मुलाकात ने महागठबंधन उम्मीदवार की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

भाजपा एमएलसी संतोष कुमार सिंह और रालोमो प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ने कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की थी। तीनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत चली। जब बैठक खत्म हुई तो रालोमो विधायक आलोक सिंह ने कहा कि यह व्यक्तिगत मुलाकात थी। वहीं कांग्रेस के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि निमंत्रण देने आए हुए थे।

तमाम विधायक आसपास में रहते हैं तो मित्रता रहती है। कांग्रेस विधायक ने कहा कि हम तेजस्वी यादव के साथ हैं और कांग्रेस के सभी 6 विधायक, महागठबंधन को वोट देंगे। उधर, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (से.) ने कहा कि बिहार में विपक्ष पूरी तरह से बिखर चुका है।

पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा की मंगलवार को विपक्षी बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके बीच न तो भरोसा बचा है और न ही कोई ठोस रणनीति। राज्यसभा चुनाव से पहले ही विपक्ष की तथाकथित एकजुटता की सच्चाई सबके सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की बैठक में एआईएमआईएम और बसपा का शामिल न होना इस बात का साफ संकेत है कि विपक्ष के भीतर गहरी दरार है। दोनों दलों ने बैठक से दूरी बनाकर विपक्ष को आइना दिखा दिया है और यह साबित कर दिया है कि महागठबंधन की एकजुटता के दावे पूरी तरह खोखले हैं।

श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि मौजूदा हालात में विपक्ष को राज्यसभा चुनाव में 30 वोट भी जुटाना मुश्किल पड़ जाएगा। राजद और कांग्रेस के कई विधायक अंदरखाने भारी नाराजगी में हैं और क्रॉस वोटिंग की पूरी संभावना है। महागठबंधन के भीतर असंतोष इतना बढ़ चुका है कि कई विधायक नेतृत्व के रवैये से बेहद असहज हैं।

उन्होंने कहा कि कहा कि राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की हकीकत सामने आ जाएगी और राजद-कांग्रेस के कई विधायक अंतरात्मा की आवाज पर वोट करेंगे। इस बार भी विपक्ष को करारी हार का सामना करना पड़ेगा और एक बार फिर उनकी राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आएगी।

बता दें एनडीए ने सभी पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि विपक्ष की ओर से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लालू यादव की पार्टी राजद ने वरिष्ठ नेता एडी सिंह को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में 16 मार्च को होने वाले मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा कि राज्यसभा की पांचों सीटों पर कौन विजयी होगा। एनडीए की ओर से पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर (जदयू), नितिन नबीन और शिवेश कुमार भाजपा के साथ-साथ उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) शामिल हैं।

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में बहुमत के आधार पर राज्यसभा चुनाव का गणित तय होगा। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है। वर्तमान में एनडीए के पास चार सीटों के लिए स्पष्ट बहुमत है, जबकि पांचवी सीट के लिए 3 विधायक कम पड़ रहे हैं। वहीं विपक्षी खेमे की संख्या अपेक्षाकृत कम है। विपक्षी गठबंधन में राजद के 25, कांग्रेस के 6, वाम दलों के 3 और आईपीपी के 1 विधायक को मिलाकर कुल 35 विधायक होते हैं।

ऐसे में विपक्ष को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है। इस बीच अख्तरुल इमान के द्वारा तेजस्वी यादव के आवास पर उनसे की गई मुलाकात के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक का समर्थन मिलने पर विपक्ष का आंकड़ा 41 तक पहुंच सकता है।

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यदि एआईएमआईएम का समर्थन राजद उम्मीदवार एडी सिंह को मिल जाता है, तो राज्यसभा की पांचवीं सीट का मुकाबला काफी रोचक हो सकता है।  इतना ही नहीं एडी सिंह की जीत भी आसान हो जाएगी।

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