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JK: कई सालों के बाद चिल्ले कलां के 23 दिन बिना भारी बर्फ के बीतने पर चिंता में हैं कश्मीरी

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: January 13, 2026 12:10 IST

चिल्ले कलां की अवधि 40 दिनों की होतीहे और इस दौरान सर्दी अपने पूरे शबाब पर होती है। यह इस बार भी है तो पूरे शबाब पर लेकिन शुष्क सर्दी बिना बर्फ के है। न ही बारिश है और न ही भारी बर्फ।

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जम्मू: माना कि इस समय कश्मीर में सर्दी की पकड़ बहुत मजबूत है और सबसे भयानक सर्दी की अवधि चिल्ले कलां जारी है पर कई सालों के उपरांत चिल्ले कलां के पहले 23 दिन बिना भारी बर्फबारी के शुष्क गुजरने से कश्मीरी चिंता में हैं कि क्या उनके हिस्से की बर्फ उन्हें मिलेगी या नहीं। हालांकि मौसम विभाग बर्फबारी की अपनी भविष्यवाणियों को बार बार बदल रहा है जिस कारण अब उस पर भी विश्वास करना मुश्किल हो गया है।

चिल्ले कलां की अवधि 40 दिनों की होतीहे और इस दौरान सर्दी अपने पूरे शबाब पर होती है। यह इस बार भी है तो पूरे शबाब पर लेकिन शुष्क सर्दी बिना बर्फ के है। न ही बारिश है और न ही भारी बर्फ। नतीजतन इस सूखे से निजात पाने की खातिर कश्मीरी सिर्फ अल्लाह से दुआ ही कर रहे हैं कि वह उन्हें इस सूखे से निजात दिलाए जिसने सब कुछ हिला कर रख दिया है।

मौसम विभाग के अनुसार, ऐसा सूखा मौसम पिछले कई वर्षों में नहीं देखा गया है। जबकि दिसंबर और जनवरी में बारिश का मौसम बिल्कुल भी नहीं देखा गया है। चिल्ले कलां 21 दिसंबर, 2023 को शुष्क रूप से शुरू हुआ, और इस अवधि के दौरान कश्मीर में कहीं भी कोई महत्वपूर्ण बर्फबारी नहीं हुई। सबसे कठोर सर्दियों की अवधि 31 जनवरी को समाप्त होने वाली है, इसके बाद 31 जनवरी से 19 फरवरी तक 20 दिनों की चिल्ले खुर्द (छोटी ठंड) और 20 फरवरी से 10 दिनों की, 2 मार्च तक चिल्ले बच्चा (बच्चों की ठंड) होगी।

जानकारी के लिए चिल्ले कलां एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है प्रमुख शीत। हालांकि, कश्मीर में, सबसे कठोर सर्दियों के शुरुआती 23 दिनों में कश्मीर में शुष्क मौसम बना हुआ है और अब स्थानीय मौसम विभाग ने 20 जनवरी तक इसके जारी रहने की भविष्यवाणी की है। यह बात अलग है कि 30 दिसम्बर से लेकर अब तक मौसम विभाग कई बार बर्फबारी की भविष्यवाणी और पूर्वानुमान प्रकट कर चुका है पर कोई भी सच साबित नहीं हुए हैं।

मौसम विभाग के निदेशक कहते थे कि पहले भी ऐसे सूखे के दौर आए हैं। उनके बकौल, वर्ष 2022 में, दिसंबर बिना किसी बारिश के बीत गया था, और फिर वर्ष 2018 में, दिसंबर और जनवरी बिना किसी बारिश के समाप्त हुआ था। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि कश्मीर में चल रहा सूखा कोई नई घटना नहीं है।

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