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झारखंड में 1000 करोड़ से ज्यादा का धान खरीद घोटाला!, हाईकोर्ट ने पूछा- सीबीआई से जांच क्यों नहीं कराई गई

By एस पी सिन्हा | Updated: April 20, 2022 20:14 IST

झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा है. अदालत ने मुख्य सचिव से कई सवाल पूछा है. अदातल ने पूछा है कि जब धान खरीदारी में वर्ष 2011-12-13 में घोटाला हुआ था तो दो साल बाद 2015 में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश क्यों दिया गया? इसमें देरी क्यों हुई?

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ठळक मुद्देअदालत ने सरकार के एक संकल्प का हवाला दिया है. मामले में 28 अप्रैल को सुनवाई होगी. याचिका में कहा गया है कि धान खरीदारी के लिए सरकार ने लैंपस व पैक्स को राशि दी थी.

रांचीः झारखंड में किसानों के नाम पर देश का सबसे बड़ा घोटाला का मामला सामने आया है. इसमें प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति यानी पैक्स के जरिए धान खरीद किया गया था. इस माम्ले को लेकर 48 मामले दर्ज थे. यहां लाभुक किसानों की जानकारी के बगैर ही उनके नाम पर फर्जी तरीके से धान खरीद कर खाते में करोड़ों रुपये का खेल खेला गया है.

 

इस पूरे मामले में झारखंडहाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी. इस मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा है. अदालत ने मुख्य सचिव से कई सवाल पूछा है. अदातल ने पूछा है कि जब धान खरीदारी में वर्ष 2011-12-13 में घोटाला हुआ था तो दो साल बाद 2015 में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश क्यों दिया गया? इसमें देरी क्यों हुई?

मामले में किसकी संलिप्तता है? पूरे राज्य में जब एक हजार करोड़ से ज्यादा का घोटाला हुआ है, तो इसकी जांच सीबीआई को क्यों नहीं दी गई? अदालत ने सरकार के एक संकल्प का हवाला दिया है. इसमें कहा गया है कि अगर कोई घोटाला एक हजार करोड़ से ज्यादा होता है, तो सरकार को इसकी जांच सीबीआइ को सौंप देनी चाहिए. इस मामले में 28 अप्रैल को सुनवाई होगी.

सुनवाई के दौरान अदालत ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि प्रतीत होता है कि पूरे राज्य में धान खरीद में करीब एक हजार करोड़ से ज्यादा का घोटाला हुआ है. वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ऋषि पल्लव ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य में धान खरीद में लगभग 1000 करोड़ से ज्यादा का घोटाला हुआ है, तो इसकी जांच का जिम्मा सीबीआई को क्यों नहीं दिया गया?

दायर याचिका में कहा गया है कि धान खरीदारी के लिए सरकार ने लैंपस व पैक्स को राशि दी थी. खरीदारी के बाद बची राशि नहीं लौटाई गई. इस मामले में उमाशंकर सिंह समेत छह अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है. बताया जाता है कि इस मामले का खुलासा होने के बाद सीआईडी ने इनमें से 24 कांडों को टेकओवर किया था.

पूरे मामले में पैक्स, एफसीआई व बिचौलियों की भूमिका सामने आई है. जांच में यह बात सामने आई है कि पैक्स से जुडे़ लोगों ने पूरे मामले में बड़ी गड़बड़ी की है. अधिकांश मामलों में किसानों से सीधे धान खरीदने के बाद पैक्स ने बिचौलियों से धान की खरीद की. जांच में इस बात की पुष्टि भी हुई है कि बिचौलियों ने किसान से काफी कम रेट पर धान की खरीद की.

इसके बाद पैक्स ने बिचौलियों को भुगतान कर धान की खरीद की. जांच में यह भी बात सामने आई है कि किसानों से वास्तविक रूप में पैक्स के माध्यम से जितनी धान की खरीद की जा रही है, कागज पर उससे कई गुना ज्यादा बताकर बड़ी रकम खाते में ट्रांसफर की गई है. पलामू के हुसैनाबाद और मनातू समेत राज्य के कई प्रखंडों में ऐसे मामले सामने आये हैं.

पिछले साल किसानों के लिए धान खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्यतय किया गया था. इसी के आधार पर पैक्स के माध्यम से किसानों से धान की खरीद की जा रही थी. दरअसल, जिला सहकारिता पदाधिकारी को स्थानीय लोगों के द्वारा गड़बड़ी की शिकायत मिली थी. शिकायत के बाद किए गए जांच में धान की कमी पाए पर मुहर लगी है.

घटना सामने आने पर ब्लॉक के अधिकारी सहित लेम्स के अध्यक्ष और सचिव पर मिलीभगत का आरोप लगा है. सहकारिता विभाग के अधिकारियों और जनसेवकों की मानें तो, यहां किसी तरह का निरीक्षण नहीं किया गया ओर हम लोगों द्वारा टोटल धान को राइस मिल पहुंचा दिया है, अगर जिला से कोई वरीय अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं तो इसकी सूचना मिलनी चाहिए. 

इस मामले में प्रदेश के खाद आपूर्ति मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी कि, किन परिस्थितियों में धान की खरीदारी हुई और कैसे वहां से गायब हुआ है? विभागीय अधिकारियों के द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.

टॅग्स :हाई कोर्टझारखंड
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