मप्र उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला को मंदिर घोषित किया, हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार भी दिया?
By सतीश कुमार सिंह | Updated: May 15, 2026 15:29 IST2026-05-15T15:19:15+5:302026-05-15T15:29:15+5:30
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने कहा, “हमने पाया है कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना कभी समाप्त नहीं हुई है। हम यह भी मानते हैं कि ऐतिहासिक साहित्य से यह स्थापित होता है कि विवादित क्षेत्र भोजशाला था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का केंद्र था।”

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इंदौरः मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को हिंदू याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि धार में विवादित भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर एक मंदिर है। मप्र उच्च न्यायालय ने कहा कि भोजशाला में संस्कृत शिक्षण केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर होने के संकेत मिले हैं। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा, "ऐतिहासिक साहित्य स्थापित करता है कि स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज से जुड़ा था?" न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने कहा, “हमने पाया है कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना कभी समाप्त नहीं हुई है। हम यह भी मानते हैं कि ऐतिहासिक साहित्य से यह स्थापित होता है कि विवादित क्षेत्र भोजशाला था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का केंद्र था।” अदालत ने मुस्लिम याचिकाकर्ताओं से पूजा के लिए अलग भूमि हेतु सरकार से संपर्क करने का आग्रह किया।
#WATCH | Dhar, Madhya Pradesh | On Dhar-Bhojshala case, advocate Vishnu Shankar Jain says, "The Indore High Court has delivered a historic verdict, partially setting aside the ASI's order dated April 7, 2003. Furthermore, the Court has granted the Hindu side the right to worship… pic.twitter.com/gilTokeGJy
— ANI (@ANI) May 15, 2026
केंद्र सरकार और एएसआई भोजशाला मंदिर के प्रशासन व प्रबंधन के बारे में फैसला करें। मप्र उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी जिले में मस्जिद बनाने के लिए जमीन आवंटन की अर्जी देती है, तो राज्य सरकार इस पर कानूनी प्रावधानों के मुताबिक विचार कर सकती है।
#WATCH | Madhya Pradesh | On Dhar Bhojshala case verdict, Dhar Shahar Qazi Waqar Sadiq says, "We will review the decision that has been given against us. We will challenge the verdict in the Supreme Court..." pic.twitter.com/XIR7gPEWkQ
— ANI (@ANI) May 15, 2026
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि भोजशाला केस में इंदौर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार भी दिया है... कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को कहा है कि वे अपना एक प्रत्यावेदन सरकार को दें। सरकार इस पर विचार करेगी कि उन्हें धार में एक वैकल्पिक भूमि दी जाए।
Indications of Sanskrit teaching centre and temple of Goddess Saraswati in Bhojshala, says Madhya Pradesh High Court. pic.twitter.com/ls3BKakKZv
— Press Trust of India (@PTI_News) May 15, 2026
धार भोजशाला मामले के फैसले पर धार शहर के काज़ी वकार सादिक ने कहा, "हमारे खिलाफ दिए गए फैसले की हम समीक्षा करेंगे। हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे..." हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानता है, जिसका निर्माण विद्वान राजा भोज ने करवाया था, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह स्थल सदियों से कमल मौला मस्जिद के रूप में कार्य करता रहा है। "भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को संरक्षण और परिरक्षण पर पूर्ण पर्यवेक्षी नियंत्रण प्राप्त होगा।
VIDEO | Madhya Pradesh High Court declares Bhojshala complex's disputed area in Dhar a temple.
— Press Trust of India (@PTI_News) May 15, 2026
Hindu side advocate Shirish Dubey said, “The High Court order clearly states that Bhojshala is a Maa Saraswati temple built by Raja Bhoj. The court has dismissed the Muslim side’s… pic.twitter.com/PkSvtg2mmO
Madhya Pradesh High Court says Central Govt and ASI should decide on administration and management of Bhojshala temple. pic.twitter.com/DvqYVKmLVj
— Press Trust of India (@PTI_News) May 15, 2026
याचिकाकर्ताओं द्वारा लंदन संग्रहालय से देवी सरस्वती की प्रतिमा को भोजशाला परिसर में स्थापित करने की मांग को लेकर, याचिकाकर्ताओं ने सरकार के समक्ष कई अभ्यावेदन प्रस्तुत किए हैं, जिन पर सरकार प्रतिमा को वापस लाने के लिए विचार कर सकती है," पीठ ने कहा। 2003 के एएसआई समझौते के तहत, हिंदू और मुस्लिम क्रमशः मंगलवार और शुक्रवार को प्रार्थना करते रहेंगे।
VIDEO | Indore: Madhya Pradesh High Court declares disputed area of Bhojshala Complex a temple.
— Press Trust of India (@PTI_News) May 15, 2026
Petitioner Kuldeep Tiwari said, “This was a long battle that we had been fighting for a very long time, in fact, for centuries. Today, that struggle has finally achieved success. We… pic.twitter.com/lNwqxLRCG1
हिंदू पक्ष ने परिसर में पूजा के अनन्य अधिकार की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने 11 मार्च, 2024 को एएसआई को भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। एएसआई ने उसी वर्ष 22 मार्च को सर्वेक्षण शुरू किया और 98 दिनों के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट न्यायालय को प्रस्तुत की।