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नौकरी का झांसा देकर ठगी करने के आरोप में आईबी के दो अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

By भाषा | Updated: September 20, 2021 21:56 IST

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नयी दिल्ली, 20 सितंबर केन्द्रीय गृह मंत्रालय में नौकरी दिलाने का वादा करके एक व्यक्ति से 17 लाख रुपये ठगने के आरोप में खुफिया ब्यूरो (आईबी) के दो अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि प्राथमिकी 14 सितंबर को नॉर्थ एवेन्यू थाने में दर्ज की गई।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘वे (आरोपी) दोनों आईबी अधिकारी हैं। अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांच जारी है।’’

उन्होंने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420 (ठगी/धोखाधड़ी), 468 (ठगी के लक्ष्य से धोखाधड़ी), 471 (फर्जी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सही बताना) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र के लिए सजा) में मामला दर्ज किया गया है।

शिकायतकर्ता उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर निवासी प्रदीप कुमार ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि आईबी में नियुक्त प्रमोद कुमार नामक व्यक्ति ने उनसे 17 लाख रुपये ठगे हैं।

प्राथमिकी के अनुसार, प्रमोद ने प्रदीप को 17 लाख रुपये के एवज में केन्द्रीय गृह मंत्रालय में नौकरी दिलाने का वादा किया था और कहा था कि इन पैसों की जरुरत दिल्ली के बाहर प्रशिक्षण के लिए पड़ेगी।

उसमें कहा गया है, ‘‘उसने (प्रमोद) मुझे आश्वासन दिया कि यह प्रशिक्षण के लिए शुल्क की तरह है। शुरुआत में उसने दावा किया कि गृह मंत्रालय के डाक विभाग में कुछ रिक्तियां हैं और स्नातकोत्तर (एमए) होने के कारण मैं वह नौकरी पाने का पात्र हूं।’’

प्राथमिकी के अनुसार, ‘‘उसने (प्रमोद) फिर मुझे बताया कि 17 लाख रुपये की जरुरत होगी जिसका एक हिस्सा प्रशिक्षण की फीस के रूप में इस्तेमाल होगा और बाकी पैसा मेरे आवेदन पर कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी को देना होगा। इसमें कुछ भी गलत या संदिग्ध नहीं लगने पर, मैंने उसकी बात मान ली।’’

उसमें कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उससे 17 लाख रुपये नकद लिए हैं।

शिकायतकर्ता ने प्राथमिकी में दावा किया है, ‘‘उसने मुझे दिल्ली में नॉर्थ ब्लॉक के पास बुलाया और मेरा आवेदन पत्र भरवाया। कार में बैठे-बैठे मैंने उसे 17 लाख रुपये नकद दिए (क्योंकि उसने कहा था कि वह सिर्फ नकद लेगा) और आवेदन पत्र दिया। यह सबकुछ जनवरी 2014 में हुआ।’’

उसमें कहा गया है, ‘‘जनवरी 2014 के बाद मुझे गृह मंत्रालय में मेरी नियुक्ति से जुड़े कई नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज मिले। मैंने खुद उन चिट्ठियों और दस्तावेजों को लिया और वे सब मुझे असली लगे।’’

प्राथमिकी के अनुसार, प्रदीप को कभी कोई ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला।

उसमें कहा गया है, जब वह 2014 में नौकरी ज्वाइन नहीं कर सका तो प्रदीप को संदेह होने लगा और उसने प्रमोद से 17 लाख रुपये वापस करने को कहा।

शिकायतकर्ता ने प्राथमिकी में दावा किया है, ‘‘मैं पांच साल तक प्रमोद से अपने पैसे वापस करने को कहता रहा, लेकिन वह या तो कॉल काट देता या कॉल का जवाब नहीं देता।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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