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सुरक्षा व्यवस्था में इतनी लापरवाही क्यों बरतते हैं ?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: December 9, 2025 07:16 IST

यदि कोई जिंदा भी रहा होगा तो वह अस्पताल पहुंचते-पहुंचते लाश में तब्दील हो गया होगा.

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उत्तरी गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइट क्लब में हुए भीषण अग्निकांड को केवल आकस्मिक घटना नहीं माना जा सकता. इस अग्निकांड का प्रारंभिक विश्लेषण ही यह बताने के लिए काफी है कि यह भीषण  लापरवाही का परिणाम था जिसमें कर्मचारियों के साथ पर्यटकों की भी जान चली गई. प्रारंभिक तौर पर यह जानकारी सामने आ रही है कि इलेक्ट्रिक फायरक्रैकर्स के कारण हादसा हुआ. इलेक्ट्रिक फायरक्रैकर्स उन पटाखों को कहते हैं जिनमें रासायनिक पदार्थ जलाए जाने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग किया जाता है.

इन पटाखों के कारण लकड़ी में आग लग गई. उसके बाद भगदड़ की स्थिति बनी. ज्यादातर पर्यटक निकलने में कामयाब भी रहे लेकिन जो अंदर फंस गए, वे बेसमेंट एरिया की ओर चले गए जहां वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था ही नहीं थी और दम घुटने के कारण 25 से ज्यादा लोग मौत के शिकार हो गए. सवाल यह पैदा होता है कि क्लस संचालकों को क्या इस बात का अंदाजा नहीं था कि कभी यदि दुर्घटना हो गई, पटाखों से आग लगी तो लोग हड़बड़ी में बेसमेंट की तरफ भी भाग सकते हैं?

यह तो जांच-पड़ताल से ही पता चलेगा कि बेसमेंट में वेंटिलेशन की व्यवस्था क्यों नहीं थी लेकिन सामान्य धारणा यही है कि इस संबंध में किसी ने कभी सोचा ही नहीं और इसीलिए वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं की गई. जब वेंटिलेशन नहीं होगा तो दम घुटेगा ही. फायर ब्रिगेड के अधिकारी यह देख कर दंग थे कि लाशें एक के ऊपर एक पड़ी थीं. दूसरी बात कि बेसमेंट से लाशों को निकालने और अस्पताल पहुंचाने में दो घंटे लग गए. यदि कोई जिंदा भी रहा होगा तो वह अस्पताल पहुंचते-पहुंचते लाश में तब्दील हो गया होगा. इस अग्निकांड के बाद गोवा में यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या स्थानीय प्रशासन इस बात का ध्यान रखता है कि किस नाइट क्लब में सुरक्षा की क्या व्यवस्था है? क्या सभी नाइट क्लबों के पास फायर सुरक्षा का प्रमाण पत्र है?

उम्मीद की जानी चाहिए कि जांच की जाएगी और जिन नाइट क्लबों के पास सुरक्षा व्यवस्था नहीं है, उन्हें बंद किया जाएगा. कोई भी पर्यटक जब नाइट क्लब में पहुंचता है तो यह मान कर चलता है कि सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्थाएं होंगी लेकिन उसे क्या पता कि गोवा में दर्जनों नाइट क्लब ऐसे हैं जिनके पास लाइसेंस तक नहीं है. कुछ नाइट क्लब तो पंचायत के इलाके में बने हुए हैं जहां तक पहुंचने के लिए अच्छा रास्ता तक नहीं है. यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन तक ने आंखें बंद कर रखी हैं.

यह मामला बहुत गंभीर है और इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि किन अधिकारियों की लापरवाही के कारण इस नाइट क्लब पर नजर नहीं रखी जा सकी और यह हादसा हो गया. सजा अधिकारियों को भी होनी चाहिए.

टॅग्स :गोवाअग्निकांडGoa Police
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