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प्रिंस ऑफ वेल्स के बनारस के शाही दौरे की 100वीं जयंती और मोदी के वाराणसी दौरे का संयोग

By भाषा | Updated: December 14, 2021 19:33 IST

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(कुणाल दत्त)

वाराणसी, 14 दिसंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब 100 साल पहले दिसंबर 1921 में ही तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स की इस आध्यात्मिक नगरी की शाही यात्रा हुई थी और तब उनका भी भव्य स्वागत किया गया था और अपनी यात्रा के दौरान युवराज ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नए भवनों का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया था।

मोदी 13 दिसंबर को सुबह यहां पहुंचे और बाद में गंगा में पवित्र स्नान करने और प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद महत्वाकांक्षी काशी विश्वनाथ धाम परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन किया।

यह संयोग है कि ठीक सौ साल पहले तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स, जो बाद में किंग एडवर्ड VIII बने, 13 दिसंबर 1921 को भारत के अपने शाही दौरे के हिस्से के रूप में बनारस पहुंचे थे।

अभिलेखीय दस्तावेजों के अनुसार, राजकुमार 17 नवंबर को बंबई (अब मुंबई) पहुंचे और बाद में एक दिवसीय यात्रा पर बनारस (अब वाराणसी) पहुंचने से पहले बीकानेर, भरतपुर, लखनऊ और इलाहाबाद का दौरा किया।

काशी विश्वनाथ मंदिर ने अब सरकार की महत्वाकांक्षी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना के तहत एक नया अवतार ग्रहण किया।

अपने प्राचीन मंदिरों विशेषकर काशी विश्वनाथ मंदिर के लिये प्रख्यात शहर में पहुंचने पर बनारस के महाराज ने रामनगर पैलेस में ब्रिटिश युवराज का भव्य स्वागत किया था। सरकार की महत्वाकांक्षी काशी विश्वनाथ गलियारा परियोजना के तहत इस मंदिर ने अब एक नया अवतार ग्रहण कर लिया है।

शाही मेहमान की शहर के स्टेशन पर अगवानी के बाद उन्हें कार से ऐतिहासिक नदेसर हाउस ले जाया गया।

नदेसर हाउस वाराणसी की एक विरासत संपत्ति है और फिलहाल इसमें ताज समूह द्वारा लग्जरी होटल संचालित किया जा रहा है।

बाद में महाराजा ने राजकुमार से नदेसर हाउस में एक राजकीय भेंट की, और फिर राजा से मिलने के लिये युवराज रामनगर में उनके महल में पहुंचे थे। यह महल आज शहर का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है।

दिल्ली में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा 1923 में प्रकाशित “हिज रॉयल हाइनेस द प्रिंस ऑफ वेल्स टूर इन इंडिया 1921-22” के अनुसार, शाही मेहमान इलाहाबाद से यात्रा करने के बाद सुबह बनारस पहुंचे थे। इलाहाबाद में 12 दिसंबर को उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया था।

किताब के मुताबिक, प्रिंस एडवर्ड तब बनारस के महाराजा से मिलने गए थे जिन्हें स्थानीय लोग प्यार से ‘काशी नरेश’ कहते थे। एडवर्ड मुख्य शहर की ओर नगवा घाट से नदी मार्ग से एक मोटर बोट लेकर मंदिर की तरफ से शहर पहुंचे थे। किताब में बताया गया है कि इस दौरान गंगा नदी में कई सजी हुई नावों के साथ युवराज की मोटरबोट चल रही थी और हर तरफ उत्सव जैसा माहौल था।

युवराज ने बनारस के महाराज के साथ दोपहर का भोजन किया और वहां से रवाना होने से पहले उन्हें ‘इत्र’, ‘पान’ और ‘हार’ दिया। इत्र, पान और गेंदे के फूल की माला का बनारस की संस्कृति में विशेष महत्व है। बनारस को भारत की आध्यात्मिक राजधानी भी कहा जाता है।

संयोग से, प्रधानमंत्री मोदी का भी सोमवार की सुबह प्राचीन शहर में आगमन पर भव्य स्वागत किया गया था और लोगों ने गुलाब व गेंदे के फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर उनका स्वागत किया और बालकनियों व बरामदों से ‘हर हर महादेव’ और ‘मोदी- मोदी’ के नारे लगाए। अपनी यात्रा करने के लिए मोदी ने भी नदी मार्ग चुना।

वह काशी विश्वनाथ धाम के उद्घाटन के रास्ते में ललिता घाट पहुंचने के लिए एक क्रूज पोत में सवार हुए थे और फिर शाम को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ क्रूज पोत में आराम से घाट पर शानदार गंगा आरती और ‘लाइट एंड साउंड शो’ का आनंद लिया।

प्रिंस ऑफ वेल्स के आगमन व प्रस्थान पर महाराजा के महल से 31 तोपों की शाही सलामी दी गई थी, तो पवित्र गंगा के तट पर प्रधानमंत्री के सम्मान में शानदार आतिशबाजी का प्रदर्शन किया गया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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