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बिहार विधानसभाः 106वां स्थापना दिवस समारोह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा- बिहार के लोग बहुत अच्छे वक्ता, जब सदन में रहते हैं तो बोरियत नहीं?

By एस पी सिन्हा | Updated: February 7, 2026 16:30 IST

Bihar Assembly:  7 फरवरी 1921 को सर वाल्टर मोरे की अध्यक्षता में बिहार-ओडिशा प्रांतीय परिषद की पहली बैठक हुई थी।

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ठळक मुद्देइबारत लिखते हुए इतिहास और भविष्य को एक ही मंच पर जोड़ती नजर आई।सदन की कार्यवाही को केवल विरोध और शोर का मंच न बनाएं।वैशाली से ही सभा, समिति, संवाद और सामूहिक निर्णय की परंपरा शुरू हुई थी।

पटनाः बिहार विधानसभा का शनिवार को 106 वां स्थापना दिवस समारोह पूरे शान-ओ-शौकत के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसमें बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह और बड़ी संख्या में विधायक एवं विधान पार्षद शामिल हुए। पूरा सदन लोकतंत्र की परंपराओं और गरिमा के उत्सव में रंगा नजर आया। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बिहार को देश की लोकतांत्रिक चेतना की जननी बताते हुए कहा कि बिहार केवल एक राज्य नहीं बल्कि विचार और विमर्श की भूमि है। उन्होंने कहा कि वैशाली से ही सभा, समिति, संवाद और सामूहिक निर्णय की परंपरा शुरू हुई थी।

यही परंपरा आज संसद और विधानसभाओं के रूप में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से ही देश को मजबूत नेतृत्व मिलता रहा है। ओम बिरला ने बिहार के विधायकों से अपील की कि वे सदन की कार्यवाही को केवल विरोध और शोर का मंच न बनाएं।

उन्होंने कहा कि सदन की नियम और परंपराएं किसी बाधा के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं। जब नियमों के तहत जनता की समस्याएं उठाई जाती हैं तो सरकार के कामकाज में पारदर्शिता आती है और जवाबदेही तय होती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जनता बड़ी उम्मीदों के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है और हर विधायक का कर्तव्य है कि वह अपने क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति की आवाज को मजबूती से सदन तक पहुंचाए। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायक केवल कानून बनाने वाले नहीं होते, बल्कि वे जनता की आवाज होते हैं।

अगर सदन में सार्थक और नियमबद्ध चर्चा होगी तो सदन की मर्यादा अपने आप बढ़ेगी। उन्होंने चिंता जताई कि आज देश के कई सदनों में शोर शराबा बढ़ रहा है, जिससे लोकतंत्र की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने विधायकों से अपील की कि वे सदन की नियम और परंपराओं की पूरी जानकारी रखें। जब नियमों के तहत जनता की बात रखी जाती है तो सरकार के कामकाज में पारदर्शिता आती है।

ओम बिरला ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि 2026 के अंत तक देश की सभी राज्य विधानसभाओं का डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया जाएगा। संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इससे विधायकों को कानून, प्रस्ताव और संसदीय प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

साथ ही आम जनता भी सदन की कार्यवाही को सीधे देख और समझ सकेगी, जिससे लोकतंत्र और मजबूत होगा। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार विधान परिषद लाइव टेलीकास्ट शुरू करने वाला पहला सदन है जो गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का प्रयास है कि बिहार को हर संभव मदद भी दी जाए और बिहार से सीख भी ली जाए।

उन्होंने माना कि बिहार से चुनाव जीतकर आने वाले जनप्रतिनिधि आमतौर पर अच्छे वक्ता होते हैं। किरेन रिजिजू ने कहा कि बिहार ज्ञान की धरती है। भगवान बुद्ध ने यहीं से दुनिया को बौद्ध धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमें बिहार से बहुत कुछ सीखना है। बिहार के लोग बहुत अच्छे वक्ता होते हैं। यहां के लोग जब सदन में रहते हैं तो बोरियत नहीं होती।

बिहारी होने पर आप सबों को गर्व होना चाहिए। किरेन रिजिजू ने कहा कि अध्यक्ष जी के कहने पर अपने प्रोग्राम में संशोधन करने बिहार आया। बिहार का विधान परिषद देश का पहला लाइव सदन है। किरेन रिजिजू अपने संसदीय जीवन के अनुभव को बताते हुए कहा कि वे इंग्लैंड में जब एक संसदीय टूर पर गए थे तब उन्होंने भारत और वहां के सांसदों के बीच के अंतर को महसूस किया।

जहां भारत में एक सांसद करीब 25 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं इंग्लैंड में एक सांसद सिर्फ 90 हजार लोगों का प्रतिनिधि होता है। इतना ही नहीं भारत में सांसद और विधायक को जनता की अजीब अजीब समस्या सुलझानी पड़ती है। जैसे कोई जेल गया तो बेल दिलाना, किसी का अस्पताल में दाखिला करना, स्कूल में एडमिशन कराना, नाला और बिजली तक के लिए सिफारिश करना।

वहीं इंग्लैंड में इन कामों के लिए कोई जनप्रतिनिधियों के पास नहीं जाता। वहां के सांसद पॉलिसी यानी नीतियों को बनाने पर मुख्यतः चर्चा करते हैं। जबकि इस मौके पर बोलते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप संसद और विधानसभा के चलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मूल्यों की विरासत को संभालना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा विधायकों को सशक्त बनाने में तकनीक से पूरी तरह सक्षम है। ईविधान से जनता अपने विधायक का आकलन आसान हो गया है। हरिवंश ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने नया आकार लिया है। बिहार अपने गौरवशाली इतिहास के साथ नवीनतम तकनीक को अंगीकार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि संसदीय मर्यादाओं का पालन करने के लिए नीतीश कुमार ने हमेशा प्रेरित करते रहे हैं। जदयू के राज्यसभा सांसद के रूप में निर्वाचित होने के बाद अपने अनुभव बताते हुए हरिवंश ने कहा कि नीतीश कुमार ने कभी नहीं कहा कि वेल में जाकर हंगामा करें। वे हमेशा कहते हैं कि संसदीय मर्यादाओं का पालन कर सार्थक चर्चा करें।

उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस पर आयोजित यह संयुक्त सत्र केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा को मजबूत करने का मंच बना। कार्यक्रम का केंद्रबिंदु रहा “सशक्त विधायक-सशक्त लोकतंत्र” विषय पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का व्याख्यान।

अपने संबोधन से पहले उन्होंने डिजिटल बिहार विधानसभा का उद्घाटन किया और रिमोट का बटन दबाकर डिजिटल नेशनल ई-विधान एप को लॉन्च किया। इसके साथ ही बिहार विधानसभा ने कागज़ी कार्यवाही से निकलकर डिजिटल लोकतंत्र के नए दौर में क़दम रख दिया। इस पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि लाखों पन्नों की बचत भी होगी यानी तकनीक के सहारे सुशासन की नई इबारत।

बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को अंगवस्त्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत किया। साथ ही राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू का भी सम्मान किया गया। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि डिजिटल विधानसभा से विधायकों की ताकत, समझ और जवाबदेही तीनों में इज़ाफ़ा होगा।

संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए ओम बिड़ला को एक अनुभवी और प्रखर संसदीय नेता बताया। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समारोह में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने फोन पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से बात कर आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

बता दें कि 7 फरवरी 1921 को सर वाल्टर मोरे की अध्यक्षता में बिहार-ओडिशा प्रांतीय परिषद की पहली बैठक हुई थी। आज, 106 साल बाद, वही विधानसभा लोकतंत्र की नई तकनीकी इबारत लिखते हुए इतिहास और भविष्य को एक ही मंच पर जोड़ती नजर आई।

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