Bihar Bhawan in Mumbai: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बिहार भवन के निर्माण को लेकर लेकर सियासी टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। दरअसल, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना(उद्धव) ने इस प्रोजेक्ट का खुलकर विरोध करते हुए कहा है कि वे बिहार भवन नहीं बनने देंगे। इसके जवाब में बिहार के सत्ताधारी दलों जदयू और भाजपा ने दोनों दलों पर तीखा हमला बोला है और चेताया है कि हुल्लड़बाजी छोड़कर शांत रहें, क्योंकि मुंबई में बिहार भवन बनकर रहेगा।
उल्लेखनीय है कि राज ठाकरे की पार्टी मनसे के नेता यशवंत किल्लेदार ने कहा कि बिहार सरकार को 314 करोड़ रुपये मुंबई में इमारत बनाने पर खर्च करने के बजाय बिहार के अस्पतालों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना चाहिए, ताकि वहां के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े। उनका कहना है कि यह पैसा बिहार की जनता की बुनियादी जरूरतों पर लगना चाहिए।
वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी नेता विनायक राउत ने बिहार भवन को लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोझ और स्थानीय राजनीति से प्रेरित कदम बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुंबई की जमीन को हड़पने का सिलसिला शुरू हो गया है और कल को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में गुजरात भवन भी बन सकता है। शिवसेना का तर्क है कि मुंबई पहले से ही जमीन और रिसोर्स की कमी के दबाव से जूझ रही है। इसी बीच बिहार सरकार में ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि 'यह फालतू की बात है, घटिया सोच का परिचय है।
किसी के बाप का राज नहीं है कि वह यह तय करेगा कि कहां क्या बनेगा और क्या नहीं? उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि देश किसी की जबर्दस्ती से नहीं चलता और न ही किसी व्यक्ति या पार्टी की निजी जागीर है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां संविधान और कानून के तहत फैसले होते हैं, न कि किसी नेता के बयान से। अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार भवन का निर्माण भावनात्मक और मानवीय आधार पर किया जा रहा है। महाराष्ट्र में इलाज, पढ़ाई और रोजगार के लिए बड़ी संख्या में बिहार के लोग जाते हैं।
ऐसे में बिहार भवन का उद्देश्य वहां रहने वाले लोगों को सहूलियत देना है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। यह किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं, बल्कि जरूरत और सुविधा से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, देश के कई राज्यों में बिहार भवन बनाए जाते हैं और आगे भी बनाए जाएंगे। किसी में इतनी ताकत नहीं है कि वह इसे रोक सके। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के बयान देकर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है। लेकिन बिहार सरकार अपने लोगों के हित में हर जरूरी कदम उठाती रहेगी और किसी के दबाव में आने वाली नहीं है।
वहीं, भाजपा ने इस विरोध को संकीर्ण सोच और स्थानीय राजनीति का उदाहरण बताया। प्रदेश प्रवक्ता प्रभाकर मिश्र ने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और यहां बिहार भवन का निर्माण बिहार के श्रमिकों, छात्रों और कारोबारियों के लिए बेहद उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना में विश्वास करती है और इस तरह की सकारात्मक पहल को निगेटिव राजनीति नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि बिहार भवन का फैसला महाराष्ट्र और बिहार सरकार की आपसी सहमति से हुआ है और किसी की गीदड़ भभकी से यह परियोजना रुकेगी नहीं।
बता दें कि बिहार भवन दक्षिण मुंबई के एलफिंस्टन एस्टेट में, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर बनने जा रहा है। इसके लिए बिहार सरकार ने 314.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। यह 30 मंजिला इमारत होगी, जिसमें कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए 240 बेड की डॉरमेट्री बनाई जाएगी। बिहार फाउंडेशन (मुंबई) के अध्यक्ष कैसर खालिद के अनुसार, यह भवन बिहार में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की योजनाओं का भी केंद्र बनेगा।
भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने बताया कि इमारत में एसटीपी, ग्रीन एरिया और सोलर पैनल जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल होगी। बिहार सरकार का कहना है कि दिल्ली, यूपी, तमिलनाडु, तेलंगाना और गुजरात की तरह मुंबई का बिहार भवन भी सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में काम करेगा।