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जापान, ऑस्ट्रेलिया ने कहा- नो?, 7 देशों से युद्धपोत भेजने की मांग?, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 16, 2026 10:28 IST

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से बहुत कम तेल मिलता है।

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ठळक मुद्दे जलमार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का व्यापारिक तेल गुजरता है।अमेरिका के लिए उतना जरूरी नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास तेल तक अपनी पहुंच है।बताने से इनकार कर दिया कि क्या चीन इस गठबंधन में शामिल होगा।

काहिरा: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखा जा सके। बहरहाल, ईरान युद्ध के बीच तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद उनकी अपील पर अभी तक किसी देश ने ठोस प्रतिबद्धता नहीं जतायी है। ट्रंप ने उन देशों के नाम बताने से इनकार कर दिया, जो पश्चिम एशिया के कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं और जिनसे अमेरिकी प्रशासन इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए एक गठबंधन बनाने को लेकर बातचीत कर रहा है। इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का व्यापारिक तेल गुजरता है।

ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं इन देशों से मांग कर रहा हूं कि वे आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।’’उन्होंने फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत में यह भी दावा किया कि यह समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए उतना जरूरी नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास तेल तक अपनी पहुंच है।

ट्रंप ने कहा कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से बहुत कम तेल मिलता है। हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या चीन इस गठबंधन में शामिल होगा। इससे पहले ट्रंप चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इसमें शामिल होने की अपील कर चुके हैं।

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ‘सीबीएस’ से कहा कि तेहरान से ‘‘कई देशों ने अपने जहाजों को सुरक्षित गुजरने देने के लिए संपर्क किया है लेकिन इस बारे में फैसला हमारे सैन्य अधिकारियों को करना है।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘कई देशों’’ के कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है, हालांकि उन्होंने इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी।

ईरान ने कहा है कि यह जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नहीं। अराघची ने यह भी कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका से बातचीत करने का उन्हें कोई कारण नजर नहीं आता, क्योंकि उनके अनुसार इजराइल और अमेरिका ने 28 फरवरी को समन्वित हमलों के साथ इस लड़ाई की शुरुआत की थी।

जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही थी। अमेरिका में चीन के दूतावास के प्रवक्ता लियु पेंग्यू ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और निर्बाध बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है और चीन तनाव कम करने के लिए संवाद बढ़ाएगा। इधर युद्ध का असर पूरे क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है।

‘इंटरनेशनल कमिटी फॉर रेड क्रॉस’ के अनुसार, ईरान में 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें सैकड़ों महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इजराइल में भी ईरानी मिसाइल हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है। वहीं, लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला और इजराइल के बीच संघर्ष में 820 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

सोमवार तड़के ईरान ने फिर इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं। इससे मध्य इजराइल और तेल अवीव क्षेत्र में कई जगह नुकसान हुआ। इजराइली सेना का कहना है कि ईरान क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है, जो हवाई रक्षा प्रणालियों को चकमा देकर कई स्थानों पर छोटे विस्फोटक गिराते हैं।

पेरिस में हुई अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता

चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच पेरिस में आर्थिक और व्यापार वार्ता हुई। इस वार्ता से लगभग दो सप्ताह बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा का मार्ग प्रशस्त हो गया।

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