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अभिषेक कुमार सिंह का ब्लॉगः अंतरिक्ष की निजी उड़ानों से क्या मकसद हासिल होगा?

By अभिषेक कुमार सिंह | Updated: July 15, 2021 14:26 IST

कोरोना वायरस के कहर और बेहद लंबे खिंचे लॉकडाउन की स्थितियों में लग रहा था कि जिंदगी ठहर गई है, लेकिन फिर अंतरिक्ष की सैर से जुड़ी नई खबरों को देखकर हम कह सकते हैं कि दुनिया उसी चाल से आगे बढ़ रही है, जिसकी उम्मीद उससे की जाती है।

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ठळक मुद्देनिजी कंपनियों के ताजा प्रयासों से लग रहा है कि अंतरिक्ष इंसान के सपनों की नई मंजिल बन गया है। निःसंदेह अंतरिक्ष की ऐसी सैर बहुतों को लुभाती है, पर सवाल है कि आखिर ऐसी यात्राओं का मकसद क्या है। ऐसे कई खतरे हैं जिनका सामना पूरी ट्रेनिंग के बाद भी अंतरिक्ष यात्रियों को करना पड़ता है। 

धरती से देखें तो अंतरिक्ष काफी दिलचस्प है। अपने भीतर तमाम संभावनाएं समेटे हुए है। लगता है कि वहां पहुंचने से ब्रह्मांड के वे अनगिनत दरवाजे खुल जाएंगे, जो अनदेखे हैं, अनजाने हैं। धरती पर रहते हुए हमारा ऊपर का सारा आसमान अंतरिक्ष ही लगता है, पर साइंसदां ऐसा नहीं सोचते। वे बताते हैं कि एक दायरे तक हमारी धरती का साम्राज्य है, उसके बाद शुरू होती है अंतरिक्ष की सरहद। अमेरिकी संस्था- यूएसएएफ की परिभाषा में यह सीमा पृथ्वी की सतह से 80 किलोमीटर (50 मील) ऊपर शुरू होती है। फेडरेशन एयरोनॉटिक इंटरनेशनल (एफएआई) के मुताबिक यह 100 किलोमीटर (62 मील) ऊपर है। हालांकि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का मिशन कंट्रोल कहता है कि अंतरिक्ष असल में 122 किलोमीटर (76मील) ऊपर शुरू होता है।

अंतरिक्ष कहां शुरू होता है, इस चर्चा का फौरी मकसद यह बतलाना है कि इधर स्पेस की निजी यात्राओं का एक नया दरवाजा खुलता दिखा है। भारतीय समय के मुताबिक 11 जुलाई, 2021 की शाम एरयलाइंस वर्जिन गैलेक्टिक के मालिक रिचर्ड ब्रैन्सन अपने पांच कर्मचारियों के साथ अंतरिक्ष की उपकक्षीय (सब-ऑर्बिटल) उड़ान करने में सफल रहे हैं। तय योजना के मुताबिक जेफ बेजोस 20 जुलाई को अपनी कंपनी ब्लू ऑरिजिन के न्यू शेपर्ड यान से उड़ान भरेंगे। हालांकि उनका अंतरिक्ष यान ब्रैन्सन के यान के मुकाबले ज्यादा ऊंचाई तक जाएगा। दावा है कि वे स्पेस कहलाने वाली उस कैरमन लाइन को पार करेंगे, हालांकि तब भी वह ‘सब-ऑर्बिटल’ उड़ान ही भरेंगे। दावा है कि रिचर्ड ब्रैन्सन का अंतरिक्ष यान वीएसएस यूनिटी अपनी अपनी मदरशिप यानी मुख्य रॉकेट से अलग होकर सुपरसोनिक रफ्तार से अंतरिक्ष में लगभग 86 किलोमीटर ऊंचाई तक ही गया, लेकिन इस ऊंचाई पर भी इन सभी अंतरिक्ष पर्यटकों ने भारहीनता (माइक्रोग्रैविटी) और स्पेस की गहराइयों का अनुभव किया।

बहरहाल, निजी कंपनियों के ताजा प्रयासों से लग रहा है कि अंतरिक्ष एक बार फिर इंसान के सपनों की नई मंजिल बन गया है। कोरोना वायरस के कहर और बेहद लंबे खिंचे लॉकडाउन की स्थितियों में लग रहा था कि जिंदगी ठहर गई है, लेकिन फिर अंतरिक्ष की सैर से जुड़ी नई खबरों को देखकर हम कह सकते हैं कि दुनिया उसी चाल से आगे बढ़ रही है, जिसकी उम्मीद उससे की जाती है। निःसंदेह अंतरिक्ष की ऐसी सैर बहुतों को लुभाती है, पर सवाल है कि आखिर ऐसी यात्राओं का मकसद क्या है। क्या इसका उद्देश्य अमीरों को स्पेस की सैर के लिए लुभाकर कमाई करना है, लंबी अंतरिक्ष यात्राओं का रास्ता खोलना है या फिर भारी आर्थिक बोझ से जूझ रही सरकारी स्पेस एजेंसियों को अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए संसाधन जुटाने में मदद करना है। जहां तक अंतरिक्ष को पर्यटन का नया ठिकाना बनाने का सवाल है तो दुनिया में ऐसे दिलेरों (और अमीरों) की कमी नहीं है जो अंतरिक्ष की सैर के ख्वाब को हर हाल में पूरा करना चाहते हैं। 

ब्रैन्सन की कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक का दावा है कि अगले साल से शुरू होने वाली उसकी निजी स्पेस फ्लाइट के लिए दुनिया के 600 लोगों ने अपनी बुकिंग करा रखी है। दावा है कि इन लोगों ने प्रति सीट ढाई लाख डॉलर की रकम चुकाई है। इसलिए इस बेहद महंगे शौक को ध्यान में रखें तो कहना होगा कि इंसान उस अंतरिक्ष को छूकर एक तसल्ली पाना चाहता है, जिसका विस्तार अरबों-खरबों किलोमीटर है, लेकिन अब तक की यात्राओं में इंसान ने उसके नगण्य हिस्से को ही जाना है.। मौजूदा अंतरिक्षयानों के लिए मुमकिन नहीं है कि वे अपने साथ इंसान को चंद्रमा से पार ले जाकर वापस पृथ्वी पर सही-सलामत ला सकें। मंगल ग्रह की यात्रा को साकार करने की जो योजनाएं अभी चल रही हैं, उनमें भी यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि जब कभी ऐसी कोई यात्रा मुमकिन होगी, तो उसमें मंगल से पृथ्वी तक वापसी में इंसान का जिंदा रहना शायद ही संभव हो।

हालांकि बात चाहे साइंटिस्टों को अंतरिक्ष में भेजने की हो या किसी पर्यटक को, यह काम बेहद मुश्किल है। ऐसे कई खतरे हैं जिनका सामना पूरी ट्रेनिंग के बाद भी अंतरिक्ष यात्रियों को करना पड़ता है। जैसे, उनका सामना गहन अंतरिक्ष से आने वाली कॉस्मिक किरणों से हो सकता है। भारहीनता के दौरान उनके रक्तचाप में भी भारी उलटफेर हो सकता है। सबसे ज्यादा खतरा तो यान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने का है। उल्लेखनीय है कि एक अन्य प्राइवेट स्पेस एजेंसी- वर्जिन गैलेक्टिक का स्पेसशिप अक्तूबर, 2014 में अपनी परीक्षण उड़ान के दौरान ध्वस्त हो गया था, जिसमें यान का एक पायलट भी मारा गया था। यही वजह है कि ऐसी कंपनियां अंतरिक्ष के पर्यटकों की सौ फीसदी सुरक्षा की गारंटी नहीं ले पा रही हैं.। हालांकि उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा के कुछ उपाय अपनाना अवश्य शुरू कर दिया है। जैसे वर्जिन ग्रुप ने अपने यान में एक ऐसा ग्लाइड-स्लोप सिस्टम अपनाने की बात कही है जो यान के खराब होने की दशा में यात्रियों को सुरक्षित धरती पर वापस ला सकता है।

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