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ब्लॉगः खाड़ी देशों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा चीन, भारत को रहना होगा चौकन्ना

By शोभना जैन | Updated: December 12, 2022 10:10 IST

शी ने इस वर्ष अक्तूबर में अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत बाली में हुए 'जी 20' और 'एपेक' शिखर सम्मेलन  से करने के बाद जिस तरह से अब सऊदी अरब को चुना है, उससे निश्चय ही पश्चिम एशिया के प्रति  एक सोची-समझी नीति के तहत चीन की इस क्षेत्र के प्रति बढ़ती रणनीतिक अहमियत समझी जा सकती है।

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शी जिनपिंग की सऊदी अरब यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। इस यात्रा को दोनों पक्ष एक तरफ जहां  चीन और खाड़ी देशों के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक रिश्तों के साथ अब रिश्तों  के लिए एक नया स्वरूप देने का अवसर  करार दे रहे हैं, वहीं चीन की सऊदी अरब के प्रति बढ़ती नजदीकियों  को  लेकर यह मत भी सुर्खियों में है कि यात्रा के जरिये चीन की रणनीति है कि अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच मौजूदा संबंधों पर हावी होकर वहां अपनी पकड़ बनाए। शी ने इस वर्ष अक्तूबर में अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत बाली में हुए 'जी 20' और 'एपेक' शिखर सम्मेलन  से करने के बाद जिस तरह से अब सऊदी अरब को चुना है, उससे निश्चय ही पश्चिम एशिया के प्रति  एक सोची-समझी नीति के तहत चीन की इस क्षेत्र के प्रति बढ़ती रणनीतिक अहमियत समझी जा सकती है।

गौरतलब है कि शी ने इस दौरान पहले चीन-अरब राष्ट्र शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ ही चीन-खाड़ी सहयोग परिषद की शिखर बैठक में भी हिस्सा लिया, जिसकी बैठक पहली बार बुलाई गई थी। विदेश नीति के एक जानकार के अनुसार हालांकि अमेरिका और सऊदी अरब  के बीच 'तेल के बदले सुरक्षा' पर आधारित  लगभग  सात दशक पुराना रिश्ता हाल के दिनों में यूक्रेन युद्ध और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बेहद तनावपूर्ण  हो गया है। वैसे शी जिनपिंग ने वर्ष 2016 में सऊदी अरब, ईरान और मिस्र का दौरा किया था और उनके बीच सामरिक समझौते भी हुए थे। चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चीन अब तक अरब देशों और अरब लीग के साथ 12 कूटनीतिक समझौते कर चुका है। आर्थिक रिश्तों के पहलू की बात करें तो चीन  और 20 अरब देशों, अरब लीग के बीच चर्चित 'बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट' को मिलकर तैयार करने का समझौता भी किया जा चुका है। ऊर्जा और आधारभूत क्षेत्र में 200 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

इस यात्रा को अगर भारत के नजरिये से देखें तो एक विशेषज्ञ का यह मत अहम है कि सऊदी अरब और चीन के बीच नजदीकियां अमेरिका के लिए चिंता की बात तो है, लेकिन भारत को फिलहाल यह सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करेगी। खाड़ी देश भारत के मित्र देश हैं और चीन के बाद भारत वहां तेल का सबसे बड़ा आयातक है, लेकिन जिस तरह से चीन इस क्षेत्र में आधारभूत ढांचों, परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है उससे भारत को अपने पड़ोस के इस क्षेत्र में उसकी गतिविधियों से चौकन्ना रहना होगा। बहरहाल, सऊदी रेगिस्तान में शी की यह यात्रा, द्विपक्षीय संबंधों के जरिये अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को किस तरह से प्रभावित करेगी, इसके जरिये तेल का खेल कैसा रहेगा, नजर इस बात पर रहेगी।

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