कर्नाटक में कल चुनाव है. यह भी दिलचस्प है कि 1977 में जब पहली बार कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बेदखल हुई और इंदिरा गांधी तक रायबरेली से लोकसभा चुनाव हार गईं, तब उन्हें कर्नाटक ने ही सहारा दिया था.
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पिछड़ी जातियों ने कांग्रेस का साथ साठ के दशक में छोड़ना शुरू किया था. उत्तर भारत में यह प्रक्रिया बेरोकटोक चलती रही. कांग्रेस ने भी इसकी परवाह नहीं की. यादवों को समाजवादी खींच ले गए, और लोधियों-काछियों को तत्कालीन जनसंघ ने अपनी तरफ कर लिया. हां, दक्षिण
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रेडक्रॉस दिवस 8 मई को मनाया जाता है. एक समय था जब पांच या सात देश मिलकर मुहिम को आगे बढ़ाते थे, पर अब इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेडक्रॉस और कई नेशनल सोसाइटी मिलकर इस संस्था का संयुक्त रूप से संचालन करती हैं.
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बता दें कि करीब 12 साल बाद किसी पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने भारत की यात्रा की है। उनसे पहले हिना रब्बानी खार ने 2011 में शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की विदेश मंत्री के रूप में भारत की यात्रा की थीं।
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सेवन सिस्टर्स के नाम से जाने और पहचाने जाने वाले राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा में शांति के लिए सख्त लेकिन प्रेमपूर्ण प्रशासनिक प्रयासों की खास जरूरत है. समस्याओं की जड़ पर प्रहार करना होगा. खासकर उग्रवादिय
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महात्मा बुद्ध का जीवन-दर्शन आज के दौर में भी निश्चित रूप से प्रासंगिक है. उन्होंने संतोष को सर्वाधिक महत्व दिया और इच्छा, मोह, राग और द्वेष को सबसे बड़े दोषों में से एक बताया.
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कुछ ही दिन पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे की काका को संभालने की मिली सलाह को हल्के में लेने से शायद दूसरी बार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(राकांपा) के नेता अजित पवार गच्चा खा गए हैं. इस बार राकांपा के प्रमुख शरद पवार ने जोर का झटका
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हमारे देश की नियति है कि थोड़ा ज्यादा बादल बरस जाएं तो उसको समेटने के साधन नहीं बचते और कम बरस जाए तो ऐसा रिजर्व स्टॉक नहीं दिखता जिससे काम चलाया जा सके। अनुभवों से यह तो स्पष्ट है कि भारी-भरकम बजट, राहत, नलकूप जैसे शब्द जल संकट का निदान नहीं है।
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बिलावल भुट्टो को यह जानकारी होगी कि उनके नाना की माँ हिंदू थी। उनका निकाह से पहले नाम लक्खीबाई था। बाद में हो गया खुर्शीद बेगम। वो मूलत: राजपूत परिवार से संबंध रखती थीं।
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