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ब्लॉग: सर्वोपरि होनी चाहिए देश प्रेम की भावना

By अवधेश कुमार | Updated: June 9, 2023 15:02 IST

आप किसी भी विचारधारा के हों, अंतिम लक्ष्य सबका अपने देश की उन्नति तथा इसकी एकता अखंडता को बनाए रखना ही होगा. किसी को इस महान सोच में भी फासिस्टवाद और सांप्रदायिकता दिखती हो तो ऐसे लोगों के बारे में क्या कहा जा सकता है?

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर में संघ के प्रशिक्षण शिविर के तृतीय वर्ष के समापन पर जो कहा, उस पर देश में बहस चल रही है. उनका भाषण काफी लंबा था जिसका मूल स्वर यही था कि हमारे बीच अलग-अलग प्रकार के भेद हो सकते हैं किंतु सबको राष्ट्र की एकता-अखंडता के साथ इसकी मजबूती के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए. यही मूल स्वर स्पष्ट करने के लिए उन्होंने बहुत सी बातें कहीं.

किसी भी संगठन और विचारधारा से असहमत होने में न समस्या है और न बुराई. एक स्वस्थ लोकतांत्रिक समाज का यही स्वाभाविक लक्षण है. समस्या तब आती है जब आप दुराग्रह, हठधर्मिता अपनाते हैं और अलग-अलग निहित स्वार्थों के वशीभूत होकर अनर्गल बातें करते हैं.

ऐसा नहीं होता तो डॉ. भागवत के भाषण का स्वागत होता. आप किसी भी विचारधारा के हों, अंतिम लक्ष्य सबका अपने देश की उन्नति तथा इसकी एकता अखंडता को बनाए रखना ही होगा. भारत का विश्व में सम्मान बढ़े, गौरव बढ़े, यह अपनी सांस्कृतिक-सभ्यतागत-अध्यात्मिक विरासत एवं हर प्रकार की उपलब्धियों के आधार पर विश्व को दिशा देने वाली भूमिका में आए, ऐसा अपने देश से प्रेम करने वाला कौन भारतीय नहीं चाहेगा? 

किसी को इस महान सोच में भी फासिस्टवाद और सांप्रदायिकता दिखती हो तो ऐसे लोगों के बारे में क्या कहा जा सकता है? डॉक्टर भागवत का पूरा भाषण सार्वजनिक है. स्वतंत्रता के अमृत काल में भारत की आंतरिक और बाहरी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए वे हर भारतीय का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, उसे देश के लिए विचारने और काम करने की प्रेरणा देते हुए दिखते हैं. 

कोई नहीं कहता कि भारत की सारी समस्याएं दूर हो गई हैं या इस देश के आम व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयां और समस्याएं नहीं हैं. किंतु समग्र रूप में देखें तो विश्व के अनेक देशों की तुलना में भारत की स्थिति संतोषजनक और बेहतर है. जो चुनौतियां हैं उनसे भी देश निपटने के लिए प्रयासरत है. इसी तरह विश्व पटल पर शक्तिशाली विरोधियों द्वारा बाधा डालने के बावजूद भारत का सम्मान एवं विश्वसनीयता लगातार ऊंचाइयां छू रही है. 

इससे हर भारतीय को अपने देश को लेकर गौरव बोध होना चाहिए. जो समस्याएं और चुनौतियां हैं उनसे निपटने के लिए राजनीतिक एवं वैचारिक मतभेद देशहित पर हावी होने देने से बचाना अपरिहार्य है. डॉक्टर भागवत के पूरे भाषण की थीम यही है कि आपके मतभेद होंगे लेकिन देश के हित का ध्यान रखेंगे तो यह अपने आप कम हो जाएंगे और इसकी कोशिश हर भारतीय को करते रहनी चाहिए. 

टॅग्स :मोहन भागवत
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