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ब्लॉग: संसद के इस शीतकालीन सत्र में खूब मचेगा हंगामा, ये हैं विपक्ष के सामने मुद्दे

By लोकमित्र | Updated: November 29, 2021 11:50 IST

23 दिसंबर 2021 तक चलने वाला संसद का यह शीतकालीन सत्र कई वजहों से हंगामेदार रहने की संभावना है. विपक्ष ने भी अपने तेवर से ये साफ कर दिया है कि वह सरकार को घेरने की तैयारी में है.

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संसद का शीतकालीन सत्र आशंका से कहीं ज्यादा हंगामेदार होने जा रहा है. सोमवार 29 नवंबर से आरंभ होकर अब तक के कार्यक्रम के मुताबिक 23 दिसंबर 2021 तक चलने वाला संसद का यह सत्र सरकार के कई फैसलों, पेश किए जाने वाले कई विधेयकों, आने वाले दिनों में होने जा रहे कुछ विधानसभा चुनावों के लिए साधे जाने वाले निशानों आदि के चलते दिल्ली की गहरी होती सर्दी में भी गर्मी का एहसास देगा. पिछले दिनों इसकी एक झलक सत्र से पहले विपक्ष की एकजुटता के प्रयासों में दिखी.

सत्र शुरू होने के तीन दिन पहले यानी 26 नवंबर को राजधानी दिल्ली में विपक्षी एकता मजबूत बनाने के उद्देश्य से पूरे दिन गहमागहमी रही. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकाजरुन खड़गे ने सदन में विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे संसद सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा के लिए सोमवार को होने वाली बैठक में शामिल हों. 

वहीं दूसरी तरफ सत्तापक्ष के तमाम छोटे-बड़े नेता भी 26-27 नवंबर को भागदौड़ में लगे रहे. साथ ही मीडिया के साथ बातचीत करते हुए विशेषकर सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं ने विपक्ष पर गैरजिम्मेदार होने के जोरदार आरोप भी  लगाए.  

कांग्रेस ने इस सत्र के लिए व्यूह रचना करते हुए विपक्षी नेताओं का मानसून सत्र में सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया. साथ ही यह भी कहा कि 29 नवंबर को होने वाली विपक्षी नेताओं की बैठक में तय होगा कि संसद में जनहित के मुद्दे उठाने के लिए कैसी साझा रणनीति अपनाई जाए. राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने इस संबंध में कहा कि कांग्रेस विपक्षी एकजुटता का मुख्य आधार है.  

आनंद शर्मा ने यह कहते हुए ये संकेत भी दिए कि संसद के इस सत्र में सबसे ज्यादा जिस मुद्दे की धूम रहेगी, निश्चित रूप से वह कृषि कानूनों की वापसी के अलावा क्रिप्टोकरेंसी पर प्रस्तावित बिल, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2021, डाटा विधेयक और बीएसएफ तथा सहकारिता के संबंध में सरकार के नए फैसले होंगे.

गौतलब है कि सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए आवश्यक संसदीय कार्यवाही इस सत्र में सरकार के एजेंडे पर है. इस मसले पर संसद में जोरदार हंगामा होने की आशंका तो है ही, इससे भी ज्यादा शोर-शराबा इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2021 पैदा करेगा. दरअसल यह बिल ऊर्जा वितरण के क्षेत्र में सुधार के अलावा निजी कंपनियों और सरकारी कंपनियों के बीच न केवल प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि आम बिजली उपभोक्ताओं को टेलीफोन सेवाओं की तरह मनपसंद कंपनी से बिजली खरीदने की भी सुविधा देगा. 

इसके साथ ही जैसा कि हम जानते हैं, सरकार इस सत्र में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन के लिए बिल पेश करने की घोषणा कर चुकी है. संसद में बिल पेश किए जाने की योजना में जिन 26 विधेयकों को क्रम दिया गया है, उनमें यह विधेयक 10 वें नंबर पर मौजूद है. इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार के लिए ‘द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफीशियल डिजिटल करेंसी एक्ट 2021’ कितना महत्वपूर्ण बिल है.  

भले इस समय देश में कोरोना के मरीजों की वैसी तादाद न हो जैसी पिछले मानसून सत्र के दौरान थी, फिर भी यह कहा जा सकता है कि कोरोना न तो अभी तक लोगों के बीच से गया है और न ही आरोपों-प्रत्यारोपों की जंग के बीच से. इसलिए इस सत्र में अगर सरकार कोरोना महामारी से निपटने को अपनी ऐतिहासिक सफलता पेश करने की कोशिश करे और विपक्ष इसे सिरे से नकारने की कोशिश करे तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. 

कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक है, सरकार संसद में इसे प्रभावशाली अंदाज में पेश करना चाहेगी, जबकि विपक्ष साबित करेगा कि सरकार कैसे वैक्सीन के नाम पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर लोगों को लूट रही है.

संसदीय कार्यवाही के दौरान सरकार विशेषकर स्वयं प्रधानमंत्री इसका इस्तेमाल देश को संबोधित करने के लिए करना चाहेंगे तो यही मौका साधकर विपक्ष भी आगामी पांच विधानसभाओं के चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार को पूरी तरह से नाकाम साबित करने की कोशिश करेगा. कुल मिलाकर संसद का आज से शुरू हो रहा शीत सत्र जहां बहुत हंगामेदार होगा, वहीं राजनीतिक विेषक इसमें भविष्य की राजनीति की बनती शक्ल भी देख सकेंगे.

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