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ब्लॉग: गगनयान से उम्मीदें आसमान पर

By अभिषेक कुमार सिंह | Updated: October 26, 2023 13:25 IST

भारत का गगनयान इसी दिशा में बढ़ता एक अभियान है जो अंतरिक्ष पर्यटन से लेकर भावी सुदूर अंतरिक्ष यात्राओं का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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धरती से ऊपर के आकाश को देखने के कई नजरिये हो सकते हैं। लेखकों-कवियों को आसमान और अंतरिक्ष कविता-कहानी के रूप में कोई नई रचना करने की प्रेरणा दे सकते हैं।

एक आम इंसान भी बड़े लक्ष्यों और उम्मीदों के फलीभूत होने की प्रार्थना के साथ आकाश की ओर देखता है लेकिन भारत और उसके अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो के लिए यह आसमान या अंतरिक्ष ऐसी जगह में तब्दील हो गया है जो देश को विकास और अनुसंधान की तमाम प्रेरणाएं देने के साथ-साथ पूरे विश्व की उस पांत में शामिल कराने का जरिया बन गया है।

जहां पहुंचने का सपना आज कई मुल्क देख रहे हैं और जहां पहुंचे बिना कोई विकास अब अधूरा लगता है। हाल में (21 अक्तूबर, 2023 को) इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने के इसरो के अभियान- गगनयान की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में टेस्ट अबॉर्ट मिशन-1 का सफल प्रक्षेपण हुआ।

इससे यह उम्मीद बंधी कि यहां से भारत जिस जगह पहुंचेगा, वहां अभी अमेरिका, रूस और चीन के अलावा कोई और मुल्क मौजूद नहीं होगा।

असल में, गगनयान मिशन इसरो की वह महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत भारत का उद्देश्य इंसान को अंतरिक्ष में पहुंचाना है। हालांकि हाल में ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर की सफल लैंडिंग के जरिये भारत ने वह मोर्चा फतह कर लिया है, जिसे पाने में दुनिया की महाशक्तियां तक नाकाम रही हैं।

साथ ही, मंगल और सूर्य को लेकर इसरो के अभियानों ने यह भरोसा पैदा किया है कि अब कोई अंतरिक्षीय उपलब्धि इतनी बड़ी नहीं है जिसे भारत की पहुंच के दायरे से बाहर माना जाए लेकिन अंतरिक्ष में इंसानों को पहुंचाने और वहां से सकुशल पृथ्वी पर वापस लाने का काम आज भी बहुत चुनौतीपूर्ण है।

कई चरणों वाले गगनयान मिशन की अगली कड़ियों के तहत अगले साल मानवरहित या कहें कि अनमैन्ड मिशन भेजा जाएगा। यानी इसमें किसी भी मानव को स्पेस में नहीं भेजा जाएगा. अनमैन्ड मिशन के सफल होने के बाद मैन्ड मिशन होगा, जिसमें इंसान अंतरिक्ष में जाएंगे। भारत से पहले यह उपलब्धि रूस, अमेरिका और चीन हासिल कर चुके हैं।

12 अप्रैल 1961 को सोवियत रूस के यूरी गागरिन 108 मिनट तक अंतरिक्ष में रहे थे। इसके कुछ ही दिनों बाद 5 मई 1961 को अमेरिका के एलन शेफर्ड अंतरिक्ष में पहुंचे और 15 मिनट तक वहां रहे। सबसे अंत में चीन के यांग लिवेड 15 अक्तूबर 2003 को अंतरिक्ष में पहुंचे थे और उन्होंने वहां 21 घंटे का समय बिताया था।

भारत का गगनयान इसी दिशा में बढ़ता एक अभियान है जो अंतरिक्ष पर्यटन से लेकर भावी सुदूर अंतरिक्ष यात्राओं का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

इस अभियान में अभी की बढ़त यह कि गगनयान के क्रू एस्केप सिस्टम की पहली दो कड़ियों का परीक्षण सफलता के साथ हो गया है और इससे हमारा वैज्ञानिक जगत आश्वस्त हो सकता है कि मंगल और चंद्रमा के अभियानों की तरह ही गगनयान इसरो व भारत की शान में चार चांद लगाने वाला साबित होगा। 

टॅग्स :गगनयानभारतइसरो
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