3,700 करोड़ रुपये घोटाला, 250 से अधिक मामले दर्ज, सुप्रीम कोर्ट ने ‘मुख्य साजिशकर्ता’ की पत्नी को दी जमानत

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 15, 2026 22:36 IST2026-05-15T22:35:30+5:302026-05-15T22:36:39+5:30

अदालत ने अपने रजिस्ट्रार (न्यायिक) की रिपोर्ट को भी स्वीकार कर लिया और उन अधिकारियों के खिलाफ मामले को बंद कर दिया, जो आरोपी की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी न करने के लिए जांच के दायरे में आए थे।

₹3700 crore scam over 250 cases filed Supreme Court grants bail wife of 'main conspirator' FIR in investors cheating case | 3,700 करोड़ रुपये घोटाला, 250 से अधिक मामले दर्ज, सुप्रीम कोर्ट ने ‘मुख्य साजिशकर्ता’ की पत्नी को दी जमानत

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Highlightsसंपत्तियों पर रोक नहीं (डी-फ्रीज) हटायेगी। घोटाले में निवेशकों के साथ ठगी की गई थी।जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने 3,700 करोड़ रुपये के घोटाले के कथित ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ की पत्नी को शुक्रवार को जमानत दे दी और निर्देश दिया कि जब तक आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी अदालत जांच एजेंसियों द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों पर रोक नहीं (डी-फ्रीज) हटायेगी। इस घोटाले में निवेशकों के साथ ठगी की गई थी।

अदालत ने अपने रजिस्ट्रार (न्यायिक) की रिपोर्ट को भी स्वीकार कर लिया और उन अधिकारियों के खिलाफ मामले को बंद कर दिया, जो आरोपी की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी न करने के लिए जांच के दायरे में आए थे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आयुषी मित्तल उर्फ ​​आयुषी अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। आयुषी अग्रवाल ने पिछले साल दिसंबर में राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

पीठ ने इस बात पर गौर किया कि उसका पति, जो हिरासत में है, कथित घोटाले का ‘‘सरगना’’ प्रतीत होता है और ईडी द्वारा लगभग 650 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही कुर्क की जा चुकी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि कथित घोटाले के संबंध में 250 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, पीठ ने 2018 में बीकानेर में दर्ज की गई एक प्राथमिकी के सिलसिले में उसे जमानत दे दी।

पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की अनुमति के बिना किसी भी न्यायिक या अर्ध-न्यायिक निकाय द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों को ‘डी-फ्रीज’ नहीं किया जायेगा। पीठ ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता हिरासत में है और क्योंकि देश के विभिन्न हिस्सों में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, इसलिए मुकदमे की सुनवाई में समय लगने की संभावना है।

उसकी याचिका स्वीकार करते हुए, पीठ ने याचिकाकर्ता को जमानत बॉण्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। पीठ ने चार मई को सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘हम निर्देश देते हैं जब तक सभी मामलों में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी अदालत ईडी, एसटीएफ (विशेष कार्य बल) या किसी अन्य राज्य एजेंसी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों को डी-फ्रीज नहीं करेगी।’’

इसने कहा कि ईडी और अन्य एजेंसियां ​​आरोपियों, उनके रिश्तेदारों और उनके सहयोगियों की बची हुई चल या अचल संपत्तियों को कुर्क करने की हकदार होंगी, जिन पर धोखाधड़ी की गई राशि के लाभार्थी होने का संदेह है। याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि वे निवेशकों को पहले ही 2,600 करोड़ रुपये वापस कर चुके हैं। अदालत में राजस्थान सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने दलील दी कि निवेशकों के साथ कथित धोखाधड़ी के संबंध में राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों में 200 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

Web Title: ₹3700 crore scam over 250 cases filed Supreme Court grants bail wife of 'main conspirator' FIR in investors cheating case

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