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ब्लॉग: सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को दिया है करारा जवाब

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: October 3, 2018 20:21 IST

भारत की सुविचारित रणनीति के तहत दक्षेस देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में अपना भाषण खत्म कर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज निकल गईं।

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अवधेश कुमार

जिस दिन भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच न्यूयॉर्क में तय की गई बातचीत रद्द हुई उसी दिन से पाकिस्तान का बौखलाहट भरा वक्तव्य आने लगा था। संयुक्त राष्ट्र महासभा के संबोधनों तथा वहां अन्य कार्यक्र मों में भी पाकिस्तान का यह रूप दिखाई देगा इसकी संभावना बनी हुई थी।

भारत की सुविचारित रणनीति के तहत दक्षेस देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में अपना भाषण खत्म कर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज निकल गईं। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के भाषण की प्रतीक्षा करने की बात तो दूर उनकी ओर देखा तक नहीं। यह ऐसा रवैया था जिसने पाकिस्तान की तिलमिलाहट बढ़ा दी। हालांकि भारत तो अपनी संतुलित और सुविचारित नीति के तहत कदम उठा रहा था या वक्तव्य दे रहा था, जबकि पाकिस्तान की मजबूरी केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित हो गई। 

विदेश मंत्रियों की बैठक में केवल सुषमा स्वराज ने ही कुरैशी की अनदेखी नहीं की, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों ने भी ऐसा ही किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री को छोड़कर किसी देश ने भारत के रवैये पर नाराजगी प्रकट नहीं की। क्या शाह कुरैशी और पाकिस्तानी विदेश नीति के रणनीतिकार मान रहे थे कि वे कुछ भी करें, न्यूयॉर्क में भारत उनके साथ सहृदयता से पेश आएगा?

पाकिस्तान के पास अपनी विश्व दृष्टि नहीं है

कुरैशी के पास ऐसा कहने के लिए था क्या जिससे क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलता? जब कुरैशी गुस्से में भारत को खरी-खोटी सुना रहे थे, कह रहे थे कि दक्षेस देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में कोई एक देश बाधा है तो वह भारत है तब कोई उनकी सुनने वाला नहीं था। 

जब पाकिस्तान के पास अपनी कोई विश्वदृष्टि नहीं है, विश्व को देने के लिए उसके पास आतंकवाद और चिंता के सिवा कुछ है ही नहीं तो ऐसे मंच से वह भरत का मुकाबला कर भी कहां सकता है। हालांकि सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के आरोपों और अन्य देशों की चिंताओं का भी निवारण कर दिया। यह साफ किया कि भारत तो मानता ही है कि सबसे जटिल विवादों को हल करने का एकमात्र तर्कसंगत माध्यम बातचीत ही है।

पाकिस्तान के साथ बातचीत कई बार शुरू हुई। अगर वे रु क गईं तो इसका एकमात्र कारण पाकिस्तान का आचरण था। दुनिया में अपनी प्रतिष्ठा गंवा चुके तथा दूसरे देशों की कृपा पर निर्भर पाकिस्तान के पास ऐसा आत्मविश्वास आ ही नहीं सकता। 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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