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राज कुमार सिंह का ब्लॉग: गठबंधन सरकार की चल पड़ी गाड़ी

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: June 11, 2024 10:16 IST

2014 और 2019 में अकेले दम बहुमत मिल जाने के बावजूद भाजपा ने सहयोगी दलों के साथ एनडीए सरकार बनाई थी, पर इस बार बहुमत के आंकड़े से 32 सीटें पीछे छूट जाने के चलते गठबंधन सरकार मजबूरी बन गई।

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ठळक मुद्देनरेंद्र मोदी ने पं. जवाहर लाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी कर लीइस बार भाजपा के पास अपना बहुमत नहीं है गठबंधन में चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार जैसे सहयोगी भी हैं

आखिरकार नरेंद्र मोदी ने पं. जवाहर लाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू ने 1952, 1957 और 1962 में लगातार तीन बार देश की सत्ता संभाली थी।  2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने नौ जून की शाम राष्ट्रपति भवन में तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर पंडित नेहरू के लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। 2014 और 2019 में अकेले दम बहुमत मिल जाने के बावजूद भाजपा ने सहयोगी दलों के साथ एनडीए सरकार बनाई थी, पर इस बार बहुमत के आंकड़े से 32 सीटें पीछे छूट जाने के चलते गठबंधन सरकार मजबूरी बन गई। 

मजबूरी ज्यादा बड़ी सिर्फ इसलिए नहीं है कि इस बार भाजपा के पास अपना बहुमत नहीं है, बल्कि गठबंधन में चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार जैसे सहयोगी भी हैं, जो गठबंधन राजनीति के माहिर सौदेबाज माने जाते हैं। इस लिहाज से नौ जून की शाम प्रधानमंत्री मोदी के साथ शपथ लेनेवाली मंत्रिपरिषद पर नजर डालें तो कहा जा सकता है कि वह अपनी पहली परीक्षा में सफल रहे हैं। शपथ ग्रहण में एनडीए के सभी घटक दलों के नेता मौजूद थे।

हां, एनसीपी के अजित पवार गुट के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल न होने से अवश्य महाराष्ट्र की भावी राजनीति को ले कर कुछ कयास लगाए जा सकते हैं। मात्र एक लोकसभा सीट जीत पाए उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री पद का ऑफर दिया गया था, जिसे अतीत में कैबिनेट मंत्री रह चुके प्रफुल्ल ने अपना डिमोशन बताते हुए अस्वीकार कर दिया। एक लोकसभा सीट के बल पर अजित पवार सौदेबाजी कर पाने की स्थिति में नहीं। सो, मोदी सरकार में उनकी एनसीपी की कोई हिस्सेदारी नहीं, पर इस सबका इसी साल अक्तूबर में विधानसभा चुनाव वाले महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

वैसे आंकड़ों की बात करें तो चुनाव हार जाने समेत कई कारणों से पिछले मोदी मंत्रिमंडल के कुल 37 चेहरों को इस बार बाहर का रास्ता दिखाया गया है, जबकि 33 नए चेहरों की एंट्री हुई है। नए चेहरों में सहयोगी दलों के चिराग पासवान और जयंत चौधरी भी शामिल हैं। पिछली सरकार में चाचा पशुपति पारस को सत्ता सुख देनेवाली भाजपा ने इस बार भतीजे चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी से गठबंधन किया था। लोक जनशक्ति बिहार में गठबंधन में मिली सभी पांच लोकसभा सीटें जीत गई तो चिराग कैबिनेट मंत्री बना दिए गए, जबकि उत्तर प्रदेश में गठबंधन में मिली दोनों लोकसभा सीटें जीतने पर जयंत के हिस्से स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री का पद ही आया। राज्यवार देखें तो बिहार के कुल आठ मंत्रियों में से चार कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के नौ मंत्रियों में से अकेले राजनाथ सिंह कैबिनेट मंत्री हैं। वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से ही सांसद हैं। प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात से भी कुल छह मंत्री बनाए गए हैं। इस बार मोदी मंत्रिमंडल के कुल 72 सदस्यों में से लगभग दस प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय से 42 मंत्री बनाए गए हैं। 

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