आधुनिक मानवता के इस सबसे गंभीर संकट में सबके सामने एक ही प्रश्न है कि इस महामारी को काबू में कैसे लाया जाए? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प स्वयं दो लाख नागरिकों की जान जाने की आशंका व्यक्त कर चुके हैं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्नी बोरिस जॉनसन ने, जो खुद संक्रमित हो गए हैं, देश भर को भेजे जा रहे तीन करोड़ पत्न में कहा है कि स्थिति सुधरने से पहले काफी बदतर हो सकती है. इटली के प्रधानमंत्नी ने तो हथियार डाल दिया है. उन्होंने कहा है कि चीजें हमारे नियंत्नण में नहीं हैं.
इससे जरा भारत की तुलना करिए. प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी ने देश को दो बार सीधे संबोधित किया है, मन की बात की है. इसके अलावा वे मुख्यमंत्रियों, गृह सचिवों, कैबिनेट सचिवों, स्वास्थ्यकर्मियों, समाज सेवियों, धार्मिक नेताओं, कॉर्पोरेट, भाजपा पदाधिकारियों, रेडियो जॉकी, मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों, भारत के विदेशी दूतावासों-उच्चायोगों में कार्यरत राजदूतों से संवाद कर चुके हैं. किसी में भी एक बार भी आपको निराशा का भाव नहीं मिलेगा.
सबने सबसे सहयोग करने, लोगों को जागृत करने, कमजोर और वंचितों की सेवा करने आदि की ही बात की. अपने राजनयिकों से विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद करने तथा दूसरे देशों के लिए हम जो कर सकते हैं, करने के लिए कहा. यह भारत ही है जिसकी पहल पर पहले सार्क के नेताओं की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बातचीत हुई, कुछ ठोस निर्णय लिया गया.
मोदी की ही पहल पर सऊदी अरब के युवराज ने जी-20 की वीडियो माध्यम से कॉन्फ्रेंस आयोजित की जिसमें सभी देशों के नेता शामिल हुए. उसमें भी भारत ने कोरोना से संघर्ष करने, मानव कल्याण पर काम करने पर बात की.
यही चरित्न भारत को दुनिया से अलग करता है. हम यह नहीं कहते कि दुनिया ने उम्मीद छोड़ दी है लेकिन भारत ने सबसे अलग तस्वीर पेश की है. इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन तक भारत के प्रयासों को सराह रहा है तथा कह रहा है कि इसमें उबरने की क्षमता है.
निस्संदेह, एक समय कुछ राज्यों तथा दिल्ली जैसे शहर से पलायन करते कामगारों के दृश्य विचलित करने वाले थे लेकिन उसे अब नियंत्रित किया जा चुका है.
प्रधानमंत्नी के लॉकडाउन को देखें तो सभी राज्य सरकारों ने उसे सफल करने में जी-जान लगा दिया है. देश की जनता भी अब छोटे अपवादों को छोड़ दें तो अभूतपूर्व अनुशासन का परिचय दे रही है. जैसा प्रधानमंत्नी ने कहा था हमें संकल्प और संयम की आवश्यकता है. बहुसंख्य भारतवासी इसे प्रदर्शित कर रहे हैं. यही वह शक्ति है जिससे उम्मीद पैदा होती है कि हम दुनिया के विकसित देशों से बेहतर स्थिति में होंगे.