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Manmohan Singh death latest updates: जब डीयू में चला करती थी डॉ. सिंह की पाठशाला?, कैफेटरिया में अध्यापकों और छात्रों के बीच लगातार चर्चाएं

By विवेक शुक्ला | Updated: December 28, 2024 05:27 IST

Manmohan Singh death latest updates: डी. स्कूल के डायरेक्टर और चोटी के अर्थशास्त्री डॉ. राम सिंह कहते हैं कि डी. स्कूल के नए-पुराने छात्रों और फैकल्टी को इस बात का गर्व है कि डॉ. मनमोहन सिंह ने यहां पढ़ाया.

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ठळक मुद्देकैफेटरिया में अध्यापकों और उनके छात्रों के बीच लगातार चर्चाएं होती थीं. छात्रों को हमेशा प्रेरित करते थे कि वे उनसे सवाल पूछें. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाया.

Manmohan Singh death latest updates: डॉ. मनमोहन सिंह ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (डी. स्कूल) में एक बेहद सम्मानित शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाई थी. वे अपनी क्लास लेने के बाद इधर की लेडी रतन टाटा लाइब्रेरी में घंटों बैठा करते थे. उन्हें डी. स्कूल के कैफेटेरिया में  जाकर कॉफी-चाय पीना भी पसंद था. वहां पर उस दौर में डॉ. अर्मत्य सेन, प्रो. ए.एम.खुसरो, प्रो. सुखमय चक्रवर्ती, डॉ. मृणाल दत्ता चौधरी, जे.पी.एस. नागर और डॉ. ए. एल. नागर जैसे दिग्गज अध्यापक आकर बैठा करते थे. इधर के कैफेटरिया में अध्यापकों और उनके छात्रों के बीच लगातार चर्चाएं होती थीं.

डी. स्कूल के डायरेक्टर और चोटी के अर्थशास्त्री डॉ. राम सिंह कहते हैं कि डी. स्कूल के नए-पुराने छात्रों और फैकल्टी को इस बात का गर्व है कि डॉ. मनमोहन सिंह ने यहां पढ़ाया. वे अपने छात्रों को हमेशा प्रेरित करते थे कि वे उनसे सवाल पूछें. डॉ. मनमोहन सिंह बहुत सुलझे हुए और विद्वान शिक्षक थे. उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाया.

वे एक बहुत ही शांत, धैर्यवान और स्पष्ट दृष्टिकोण वाले शिक्षक थे. वे जटिल विषयों को भी सरल तरीके से समझाने में माहिर थे. डॉ. राम सिंह कहते हैं कि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पढ़ाने के अनुभव ने ही उन्हें एक सफल अर्थशास्त्री और प्रशासक बनने में मदद की. वे एक ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव से कई लोगों को प्रेरित किया.

दरअसल डॉ. सिंह में वे सारे गुण थे जिनसे कोई अर्थशास्त्र का अच्छा शिक्षक बनता है. उनमें अर्थशास्त्र के सिद्धांतों, मॉडलों और अवधारणाओं की गहरी समझ थी. उन्हें यह भी पता होता था कि इन सिद्धांतों को वास्तविक दुनिया की स्थितियों और समस्याओं पर कैसे लागू किया जाए. एक अच्छे शिक्षक को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान और विकास से अवगत होना चाहिए.

डॉ. सिंह इस बात को समझते थे. डी. स्कूल के पुराने टीचर बताते हैं कि उन्हें  अपनी कक्षा को जीवंत और आकर्षक बनाए रखना आता था. उन्हें यह भी पता था कि एक अच्छा शिक्षक छात्रों के प्रश्नों और चिंताओं को सुनने और उनका जवाब देने के लिए तैयार रहता है. वे  एक अच्छे शिक्षक की तरह छात्रों के लिए सुलभ होते थे और उनसे जुड़ने के लिए तैयार रहते थे.

वे हमेशा सीखने और अपने ज्ञान को अद्यतन रखने के लिए तैयार रहते थे. डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में देश की सारी आर्थिक नीतियों को डी. स्कूल वाले ही दिशा दे रहे थे. तब उनके प्रमुख आर्थिक सलाहकारों में डॉ. कौशिक बसु थे. कौशिक बसु 2009 से 2012 तक देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे. वे भी डी. स्कूल में अध्यापन करते रहे.

डॉ. मनमोहन सिंह की सादगी, शराफत तथा विद्वत्ता उस दौर से लेकर दो बार प्रधानमंत्री बनने तक कायम रही. दिल्ली यूनिवर्सिटी में लंबे समय तक पढ़ाते रहे डॉ. राज कुमार जैन बताते हैं कि डॉ. सिंह कुछ समय तक  मॉडल टाउन में किराए के मकान में रहते थे तथा विश्वविद्यालय साइकिल से आते थे.

देश के वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले डॉ. मनमोहन सिंह ने नॉर्थ दिल्ली के अशोक विहार में अपना घर बनाया था. इसे उन्होंने तब खरीदा था जब वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (डी स्कूल) में पढ़ा रहे थे. ये 1969 से 1971 के बीच की बातें हैं.

डॉ. मनमोहन सिंह की बेटी दमन सिंह ने अपनी 2014 में प्रकाशित पुस्तक ‘स्ट्रिक्टली पर्सनल’ में लिखा है जब उनके पिता भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के ओहदे से मुक्त होकर 1985 में दिल्ली आए तो वे इसी अशोक विहार के घर में रहा करते थे. 

टॅग्स :मनमोहन सिंहदिल्ली विश्वविद्यालयइकॉनोमी
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