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उपभोक्ता बाजार रिपोर्ट 2026ः नए साल में भारत होगा सबसे आशावादी बाजार

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: January 1, 2026 06:01 IST

india Consumer Market Report 2026: भारतीय उपभोक्ता मौजूदा आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक संघर्षों से अप्रभावित हैं और भारत 2026  में दुनिया का सबसे आशावादी उपभोक्ता बाजार रहेगा.

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ठळक मुद्देindia Consumer Market Report 2026: सिंगापुर में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले लग्जरी ग्राहकों में शामिल हैं. india Consumer Market Report 2026: महंगाई घटने और ब्याज दरों में कमी से खरीददारी में नई शक्ति मिलती हुई दिखाई देगी.india Consumer Market Report 2026: समीक्षा बैठक में रेपो रेट में की गई कटौती के बाद रेपो रेट अब 5.25 प्रतिशत हो गई है.

india Consumer Market Report 2026: इन दिनों प्रकाशित हो रही दुनिया के उपभोक्ता बाजारों से संबंधित रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि वर्ष 2026 में भारत ऊंची विकास दर, सस्ते कर्ज, महंगाई में कमी, कर सुधार और बढ़ी हुई क्रय शक्ति से दुनिया के सबसे आशावादी उपभोक्ता बाजार के रूप में उभरकर दिखाई दे सकता है. वैश्विक परामर्श कंपनी बीसीजी की ‘ग्लोबल कंजुमर रडार’ रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उपभोक्ता मौजूदा आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक संघर्षों से अप्रभावित हैं और भारत 2026  में दुनिया का सबसे आशावादी उपभोक्ता बाजार रहेगा.

यह भी महत्वपूर्ण है कि सिंगापुर टूरिज्म बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक भारत से आने वाले सैलानी सिंगापुर में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले लग्जरी ग्राहकों में शामिल हैं. गौरतलब है कि नए वर्ष 2026 में भारतीयों को महंगाई घटने और ब्याज दरों में कमी से खरीददारी में नई शक्ति मिलती हुई दिखाई देगी.

पिछले दिनों भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के द्वारा मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट में की गई कटौती के बाद रेपो रेट अब 5.25 प्रतिशत हो गई है. इस समीक्षा बैठक में कहा गया है कि देश में इस समय महंगाई रिकॉर्ड निचले स्तर 2.2 फीसदी पर है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ग्रोथ का अनुमान 7.3 फीसदी है.

भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत रफ्तार पकड़ रही है और आगे भी यही रुझान बने रहने की पूरी उम्मीद है. साथ ही रिजर्व बैंक ने जनवरी 2026 में बैंकिंग सिस्टम में पैसों की कमी को दूर करने, नकदी लंबे समय तक बनाए रखने के लिए तीन लाख करोड़ रुपए डालना सुनिश्चित किया है. यह बात भी महत्वपूर्ण है कि इस समय विभिन्न शोध रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि खाद्यान्न के रिकॉर्ड उत्पादन और अच्छे मानसून के बाद कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों को मिली अनुकूलताओं के कारण आगामी महीनों में भी महंगाई में और कमी आने की उम्मीद है.

वर्ष 2024-25 में देश में 35.77 करोड़ टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है. भारत के आर्थिक परिदृश्य से संबंधित विभिन्न अध्ययन रिपोर्टों में यह तथ्य रेखांकित हो रहा है कि  चालू वित्त वर्ष 2025-26 में  ग्रामीण भारत से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है. इन रिपोर्टों में यह बताया जा रहा है कि गांवों में खपत तेजी से बढ़ रही है.

यह कोई छोटी बात नहीं है कि इस समय जब अमेरिका और यूरोप सहित पूरी दुनिया के कई देशों में महंगाई आर्थिक-सामाजिक चिंता का कारण बन गई है, तब भारत पूरी दुनिया के लिए एक ऐसी नजीर बन गया है, जहां खुदरा महंगाई लगातार एक फीसदी से नीचे के स्तर पर है और विकास लगातार बढ़ रहा है.

ऐसे में इस समय भारत में महंगाई में तेज गिरावट से सस्ते कर्ज की राह आसान हुई है और इससे उपभोक्ता बाजार तेजी से आगे बढ़ेगा. यह बात भी महत्वपूर्ण है कि इन दिनों भारत के विकास पर प्रकाशित हो रही विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि चूंकि टैक्स व महंगाई घटने से अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और भारत की क्रेडिट रेटिंग सुधर रही है,

ऐसे में क्रेडिट रेटिंग व विकास दर बढ़ने से उपभोक्ता बाजार आशावादी बना रहेगा. हाल ही में एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था के 6.5 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष 2026-27 में 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान व्यक्त किया है.

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि सरकार के बड़े फैसले, जैसे कि पहला टैक्स में कटौती और दूसरा मौद्रिक नीति में ढील से उपभोग आधारित बढ़ोत्तरी को बढ़ावा मिलेगा. यह अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाएगी. निश्चित रूप से ब्याज दर घटाए जाने के कारण सस्ते कर्ज से वर्ष 2026 में आर्थिक गतिविधियों में तेजी की संभावना विकास दर को बढ़ाने के लिए सकारात्मक संदेश होगी और उपभोक्ता बाजार में चमक बढ़ेगी.

इस समय जब भारत ट्रम्प टैरिफ और वैश्विक व्यापार अनिश्चितता के दौर में चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रहा है, तब सस्ता कर्ज उद्योग-कारोबार और सर्विस सेक्टर को नई शक्ति देगा. भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति को मजबूत बनाने, निवेशकों का विश्वास बढ़ाने, अर्थव्यवस्था को व्यापक आर्थिक विवेक से प्रबंधित करने, उद्यमियों को नीतिगत स्थिरता, नवाचार एवं वृहद आर्थिक नीति उपलब्ध कराने के मद्देनजर सस्ता कर्ज लाभप्रद होगा. सस्ते कर्ज के कारण विदेशी निवेश भी बढ़ेंगे.

ग्रामीण मांग के साथ-साथ शहरी मांग में सुधार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और सर्विस सेक्टर के विकास को बल मिलेगा. सस्ते कर्ज के आधार पर स्थानीय और घरेलू बाजार तेजी से आगे बढ़ सकेंगे. बैंक व वित्तीय संस्थाओं की स्थिरता बनी रहेगी. आम आदमी को भी सस्ते कर्ज से कई लाभ मिलेंगे.

ईएमआई के घटने से ऋण लेने वाले सभी लोगों को लाभ मिलते हुए दिखाई देंगे. घरों और वाहनों की मांग बढ़ेगी. मकानों की बिक्री में तेज गिरावट के कारण रियल स्टेट उद्योग की बढ़ी हुई मुश्किलें ब्याज दरों में कटौती से कम होते हुए दिखाई देंगी. इन सबसे उपभोक्ता बाजार पर अनुकूल असर होगा.

उम्मीद करें कि भारत में वर्ष 2026 में महंगाई में कमी और ब्याज दरों में कटौती भारतीय उपभोक्ताओं को नई आशावादी शक्ति देगी और भारत में उपभोक्ताओं की बड़ी हुई क्रय शक्ति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए घरेलू खपत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई देगी.

उम्मीद करें कि वर्ष 2026 में ईएमआई घटने से आम आदमी की खर्च योग्य आय बढ़ेगी, बाजार मांग में मजबूती और निवेश के नए माहौल को बल मिलेगा और इससे भारत दुनिया में सबसे आशावादी उपभोक्ता बाजार के रूप में आगे बढ़ते हुए दिखेगा और देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ेगी.

टॅग्स :भारतीय अर्थव्यवस्थासकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)Consumer Affairs
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