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अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को चीन से अपनी ओर आकर्षित कर सकता है भारत

By भाषा | Updated: July 23, 2020 05:56 IST

अमेरिका भारत व्यवसाय परिषद (यूएसआईबीसी) द्वारा आयोजित वार्षिक ‘भारत विचार शिखर सम्मेलन’ को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए पोम्पियो ने कहा कि अमेरिका और भारत जैसे लोकतंत्र का साथ मिलकर काम करना महत्वूपूर्ण है।

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ठळक मुद्देमाइक पोम्पियो ने कहा कि भारत के पास वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को चीन से आकर्षित करने का बेहतर मौका है। इसके साथ ही माइक पोम्पियो ने कहा कि दूरसंचार, चिकित्सा उपकरणों तथा अन्य क्षेत्रों में चीन की कंपनियों पर निर्भरता कम करने का मौका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका की मेजबानी में आयोजित होने वाले अगले जी -7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है।

वाशिंगटन: अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बुधवार को कहा कि भारत ने अमेरिका समेत दुनिया भर के कई देशों का भरोसा अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को चीन से अपनी ओर आकर्षित कर सकता है और चीन की कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है।

अमेरिका भारत व्यवसाय परिषद (यूएसआईबीसी) द्वारा आयोजित वार्षिक ‘भारत विचार शिखर सम्मेलन’ को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए पोम्पियो ने कहा कि अमेरिका और भारत जैसे लोकतंत्र का साथ मिलकर काम करना महत्वूपूर्ण है, खासकर तब जब वे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के द्वारा उत्पन्न चुनौतियों को पहले की तुलना में स्पष्ट तरीके से देख पा रहे हैं।

उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों के मुद्दे पर चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करने के लिये साथ मिलकर काम करते हैं कि विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन के चुनाव में किसी ऐसे को जीत मिले, जो संपदा अधिकारों का सम्मान करता हो। यह काफी बुनियादी लगता है।’’ पोम्पियो ने कहा कि भारत के पास वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को चीन से आकर्षित करने तथा दूरसंचार, चिकित्सा उपकरणों तथा अन्य क्षेत्रों में चीन की कंपनियों पर निर्भरता कम करने का मौका है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ऐसी स्थिति में है, क्योंकि उसने अमेरिका समेत दुनिया भर के देशों का भरोसा कमाया है।’’ पोम्पियो ने इस मौके पर यह भी कहा कि भारत को ऐसे माहौल को बढ़ावा देने की जरूरत है, जो अमेरिका के बढ़े निवेश व व्यापार के लिये अधिक खुला हो। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जैसा कि मैंने पिछले साल कहा था कि इन वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये भारत को ऐसे वातावरण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता होगी, जो व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिये अधिक खुला हो।

मुझे पता है कि यह संभव है क्योंकि भारतीय और अमेरिकी लोग कड़ी मेहनत व उद्यमशीलता की भावना साझा करते हैं, और मुझे विश्वास है कि हमारी साझेदारी केवल मजबूत से और मजबूत ही हो रही है।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका की मेजबानी में आयोजित होने वाले अगले जी -7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है।

उन्होंने कहा, "हमने प्रधानमंत्री मोदी को अगले जी -7 (शिखर सम्मेलन) के लिये आमंत्रित किया है, जहां हम आर्थिक समृद्धि नेटवर्क को आगे बढ़ाएंगे।’’ जी -7 देशों और संगठनों का एक ऐसा समूह है, जिन्हें अमेरिका स्वाभावित साझेदार मानता है, क्योंकि वे लोकतंत्र और पारदर्शिता व कानून के शासन जैसे मूल्यों को साझा करते हैं। पोम्पियो ने अपने संबोधन में टिकटॉक समेत चीन के 59 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाने के भारत के हालिया फैसले की सराहना की।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें उच्च गुणवत्ता, पारदर्शी बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने की पहल ‘ब्लू डॉट नेटवर्क’ को आगे बढ़ाने के लिये भारत के साथ काम करना पड़ा।’’ उन्होंने कहा, यह प्रयास अमल करने के लिये महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुक्त बाजार लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का सबसे अच्छा तरीका है। भारत ने हाल में अपने अनुभव में यह देखा है। उन्होंने कहा कि आज याद करने के लिये एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण सत्य है कि चीन के वुहान से शुरू हुई कोरोना वायरस महामारी के कारण होने वाली आर्थिक क्षति से निपटने में निजी क्षेत्र की भूमिका अपरिहार्य होगी।

पोम्पियो ने कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों में एक नये युग की आकांक्षा रखता है। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ द्विपक्षीय आधार पर बातचीत नहीं करते हैं। हम एक दूसरे को देखते हैं कि हम महान लोकतंत्र, वैश्विक शक्तियां और वास्तव में अच्छे दोस्त हैं। भारत उन कुछ भरोसेमंद देशों में से एक है, जहां के नेताओं से मैं महाद्वीपों को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दे पर सलाह व परामर्श के लिये नियमित तौर पर बात करता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि हमारा रिश्ता केवल मजबूत हो रहा है। आइये इस मौजूदा चुनौती से पहले की तुलना में अधिक लचीला और अभिनव बनकर बाहर आते हैं। दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच सहयोग को गहरा करने के लिये इस पल का लाभ उठाते हैं।’’  

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