शिवसेना एक राजनीति दल है। यह मुख्यत महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टी है। इसकी स्थापना 19 जून 1966 में प्रमुख राजनीतिक कार्टूनिस्ट बालासाहेब ठाकरे ने की थी। इस दल का प्रतीक चिह्न (लोगो) बाघ है। पूरे देश में शिव सेना को एक कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी दल के रूप में जाना जाता है। इस समय उद्धव ठाकरे प्रमुख हैं। इसका मुखपत्र सामना है। Read More
शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ को दिए साक्षात्कार के दूसरे हिस्से में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को केन्द्र कोष से उसका ‘‘ सही हिस्सा ’’ नहीं मिल रहा है, जिससे किसानों की मदद की जा सकती है। शिवसेना प्रमुख ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित किसान कर्ज माफी की ...
आधा चांद और पांच सितारे इस्लाम के प्रतीक हैं जिनका अर्थ प्रगति, रोशनी और ज्ञान से है। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के सोमवार के संस्करण में प्रकाशित ठाकरे के साक्षात्कार पर शेलार टिप्पणी कर रहे थे। साक्षात्कार में ठाकरे ने दावा किया कि वह भाजपा से चांद ...
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना नेता विनायक राउत ने उस वक्त यह टिप्पणी की जब सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने उन्हें सावरकर का उल्लेख करने के लिए कहा। भाजपा के कुछ सदस्यों की टोकाटोकी के बीच राउत ने क ...
ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक संजय राउत को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उनके लिए ‘हिंदुत्व’ का मतलब अपने द्वारा कहे गए शब्दों का सम्मान करना है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह ‘संयोग से मुख्यमंत्री’ (एक्सीडेंटल मुख्यमंत्री) बने ...
निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2020 को लोकसभा में अपने बजट भाषण के दौरान एलआईसी की हिस्सेदारी इनिशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ) के रास्ते बेचने की सरकार की योजना की घोषणा थी। ...
भाजपा की पूर्व सहयोगी शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा, “ हम केंद्रीय गृह मंत्री की टिप्पणी से सहमत हैं कि शरजील इमाम के कथित अलगाववादी शब्द कन्हैया कुमार के शब्दों से ज़्यादा खतरनाक हैं।” ...
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुंगटीवार ने ठाकरे की पार्टी को भाजपा का ‘‘नैसर्गिक सहयोगी’’करार दिया। मुंगटीवार ने कहा, ‘‘ भाजपा को ऐसी किसी पार्टी के साथ सरकार बनाने में समस्या नहीं है जो देश की रक्षा करने के लिए मोदी जी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) के व ...
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता ने कहा, ‘आपातकाल लागू कर इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश की। उस समय किसी ने खुलकर इस पर बात नहीं की। लेकिन अहमदाबाद और पटना में इसका विरोध शुरू हुआ और जन शक्ति के दम पर इंदिरा गांधी की हार ...