किसी के द्वारा (महिला व पुरुष) किसी को गलत तरीके से छूना, गंदा वीडियो दिखाना, किसी भी तरह की यौन गतिविधि के लिए मजबूर करना जिसमें आपकी सहमति नहीं हो यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। भारतीय दंड संहिता (IPC) में यौन उत्पीड़न के लिए जेल या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। हाल ही में #metoo कैंपेन के जरिए बॉलीवुड, मीडिया जैसे कई कॉर्पोरेट जगत से महिलाओं ने कई लोगों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। Read More
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि केवल छूना यौन शोषण नहीं है। कोर्ट ने कहा कि घटना के समय व्यक्ति ने पीड़िता के साथ गलत इरादे से स्किन-टू-स्किन कांटेक्ट किया है, तभी यौन उत्पीड़न माना जाएगा। ...
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यौन उत्पीड़न के एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला काफी परेशान करने वाला है। ...
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है कि बच्ची का कपड़े के उपर से उसके शरीर के किसी हिस्से को टच करना यौन उत्पीड़न नहीं है। ...