संविधान संशोधन बिलः पक्ष में 251 और विपक्ष में 185 वोट?, लोकसभा में प्रस्ताव पास और चर्चा शुरू?
By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 16, 2026 12:38 IST2026-04-16T12:12:05+5:302026-04-16T12:38:30+5:30
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिससे दिन के विधायी एजेंडे में एक और विधेयक जुड़ गया।

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नई दिल्लीः संविधान संशोधन बिल पर मतदान हो गया और पक्ष में 251 और विपक्ष में 185 वोट पड़े। लोकसभा में प्रस्ताव पास और चर्चा शुरू हो गई। लोकसभा के सांसदों ने संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 पेश करने के पक्ष में वोट दिया। लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने बिल पेश करने के कदम के खिलाफ मतविभाजन पर ज़ोर दिया था।लोकसभा में 207 सांसदों ने संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने के पक्ष में मतदान किया। वहीं 126 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया।
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, "हम संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 और डिलिमिटेशन बिल, 2026 का विरोध करते हैं...कोई दूसरी पार्टी नहीं है जो महिला आरक्षण की इतनी बड़ी समर्थक हो।"
207 Lok Sabha MPs vote for the introduction of the Constitution (One Hundred and Thirty-First Amendment) Bill, 2026. While 126 members voted against it. The Opposition members in the Lok Sabha had pressed for a division against the move to introduce the bill. pic.twitter.com/NMKwPrFd0q
— ANI (@ANI) April 16, 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "नारी शक्ति वंदन अधिनियम में भी ये तीनों बिल एक साथ आने थे और सदन ने उनकी सहमति से पास किए आज सुबह वे विरोध करने का तय करके आए हैं इसलिए हर चीज में विरोध किए जा रहे हैं।"
केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया, जो संसद के चल रहे विशेष सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने प्रस्तावित संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 को प्रस्तुत करके बहस की शुरुआत की।
The Constitution (One Hundred and Thirty-First Amendment) Bill, 2026’, Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2026’ and Delimitation Bill, 2026’ introduced in the Lok Sabha. pic.twitter.com/KkH1PD3GZG
— ANI (@ANI) April 16, 2026
उन्होंने परिसीमन विधेयक, 2026 भी पेश किया, जिससे विधायी निकायों में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने पर चर्चा का मंच तैयार हो गया। कार्यवाही के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिससे दिन के विधायी एजेंडे में एक और विधेयक जुड़ गया।
विधेयकों के पेश होने पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों का विरोध किया और सदन में पार्टी की आपत्तियों को औपचारिक रूप से दर्ज कराया। कांग्रेस सांसद ने कहा, "सरकार संविधान को पूरी तरह से हथियाना चाहती है।" संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और अमित शाह ने स्पष्ट किया कि विधेयक अभी पेश किए गए हैं और उन पर चर्चा अभी बाकी है।
लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पेश करने के कदम के खिलाफ मतदान का आह्वान किया था। लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 पेश करने के कदम के खिलाफ वोटिंग पर ज़ोर दिया है। DMK सांसद टीआर बालू, AIMIM सांसद ओवैसी उन विपक्षी सांसदों में शामिल हैं जो बिल पेश करने का विरोध कर रहे हैं। TMC और CPI-M बिल का विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद रणजीत रंजन ने कहा, "पूरा विपक्ष 2023 में ही महिला आरक्षण के समर्थन में था। महिला आरक्षण पर किसी विपक्ष को कोई आपत्ति नहीं है। हम चाह रहे थे कि 2024 में 543 सीटों पर महिलाओं को आरक्षण मिले... 30 महीने के बाद कह रहे हैं 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करके आरक्षण देंगे। आज भी भाजपा की नीयत में खोट है आज भी उन्होंने परिसीमन का पेंच लगाया है।
आप 3 बिल एक साथ क्यों लेकर आए? 2011 के आधार पर तो 2024 में ही किया जा सकता था।" कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कहा, "सभी विपक्षी दलों ने मिलकर तय किया है कि महिला आकक्षण में हम समर्थन में है, हम महिलाओं के लिए आरक्षण चाहते हैं।
2023 में जो प्रस्ताव पारित हुआ था हम उसके साथ हैं लेकिन परिसीमन के जरिए वे इसमें साजिश करके सभी क्षेत्रों को तितर-बितर करना चाहते हैं और संवैधानिक ढांचे को खराब करना चाहते हैं, उसका हम विरोध करते हैं।"