गजानन माधव 'मुक्तिबोध' पर यह संस्मरण प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने लिखा है। परसाई ने लिखा, 'जैसे ज़िंदगी में मुक्तिबोध ने किसी से लाभ के लिए समझौता नहीं किया, वैसे मृत्यु से भी कोई समझौता करने को तैयार नहीं थे.' ...
‘मैं नीर भरी दुख की बदली’। आधुनिक काल की मीरा कही जाने वाली महादेवी वर्मा ने महज इस एक पंक्ति में अपना परिचय समेट दिया है। महादेवी वर्मा की गिनती हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभ सुमित्रानन्दन पन्त, जयशंकर प्रसाद और सूर्यकान्त त्रिपाठ ...
भवानीप्रसाद मिश्र की प्रसिद्ध कविता है- "कुछ लिख के सो, कुछ पढ़ के सो, तू जिस जगह जागा सवेरे, उस जगह से कुछ बढ़ के सो।" इन पंक्तियों की मूल भावना से प्रेरित होकर हम 'किताब कीड़ा' सीरीज शुरू कर रहे हैं। 'किताबी कीड़ा' में हम हिन्दी और अंग्रेजी में उपल ...
अवतार सिंह संधू 'पाश' का जन्म नौ सितम्बर 1950 को पंजाब के जालंधर ज़िले में हुआ था। पाश आधुनिक भारतीय साहित्य के प्रमुख कवियों में शुमार किये जाते हैं। अतिवादी वाम विचारों वाले कवि पाश मूलतः पंजाबी में कविता लिखते थे लेकिन उनकी रचनाएँ हिन्दी समेत अन्य ...
भारतीय जनादेशः चुनावों का विश्लेषण (Book Review): प्रॉनाय रॉय और दोराब रु. सोपारीवाला की किताब 'भारतीय जनादेशः चुनाव का विश्लेषण' भारत में चुनावों को समझने का एक नजरिया देती है। यह किताब भारतीय चुनाव के पिछले सात दशकों की उठा-पटक पर सूक्ष्म और सटीक व ...
दुष्यंत कुमार ने कविता, गीत, गज़ल, काव्य, नाटक, कहानी जैसी अनेक विधाओं में लेखन किया लेकिन गज़लों की अपार लोकप्रियता ने अन्य विधाओं को नेपथ्य में डाल दिया। पढ़िए, दुष्यंत कुमार की कुछ चुनिंदा गज़ले... ...
अमृता प्रीतम का जन्म 1919 में अविभाजित भारत में हुआ था। अपनी जवानी के दिनों में अमृता ने भारत विभाजन की त्रासदी देखी। इस घटना ने उनकी जिंदगी पर गहरा असर किया। उनके जन्मदिवस पर पढ़ें कुछ चुनिंदा कविताएं... ...
Amrita Pritam Google Doodle: 20वीं सदी में साहित्य का एक ऐसा सितारा जिसने अपनी शर्तों पर जिंदगी गुजारी। उन्होंने एक ऐसे वक्त में साहसी फैसले लिए जब समकालीन महिलाओं के लिए विरोध जताना मुश्किल था। उन्होंने अपनी जिंदगी में कविता संग्रह, कहानी, आत्मकथा औ ...