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अहिरावण वध के लिए हनुमान जी ने धारण किया था पंचमुखी स्वरूप?, श्रीराम-लक्ष्मण को कैद से मुक्त कराया, जानें कहानी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 1, 2026 18:07 IST

त्रेतायुग में चैत्र पूर्णिमा पर माता अंजनी और वानर केसरी के यहां हनुमान जी का अवतार हुआ था। हर साल चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।

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ठळक मुद्देचैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।ऋषि वाल्मीकि ने रामचरितमानस के एक भाग का नाम सुंदर कांड रखा।हनुमान जी बचपन से ही असाधारण शक्ति और दिव्य सामर्थ्य से युक्त थे।

नई दिल्लीः हनुमान जयंती भगवान हनुमान को समर्पित एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह दिन भगवान हनुमान जी के जन्मदिवस का प्रतीक है। उनका जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि (15वें दिन) को हुआ था। यह दिन पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और भक्त भगवान हनुमान जी से प्रार्थना करके और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस वर्ष हनुमान जयंती 2 अप्रैल, 2026 को मनाई जाएगी। भगवान हनुमान जी को समर्पित सबसे शुभ हिंदू त्योहारों में से एक है। यह दिन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।

त्रेता युग में जब भगवान श्री राम ने मनुष्य रूप धारण किया, तब माता अंजनी और पिता केसरी के घर हनुमान जी का जन्म हुआ था। उन्हें पवन पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है, इसीलिए उन्हें रुद्र अवतार कहा जाता है। माता अंजनी उन्हें "सुंदर" कहकर पुकारती थीं, और इसी कारण ऋषि वाल्मीकि ने रामचरितमानस के एक भाग का नाम सुंदर कांड रखा।

हनुमान जी बचपन से ही असाधारण शक्ति और दिव्य सामर्थ्य से युक्त थे। भगवान हनुमान के बचपन से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा यह है कि जब उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगल लिया, जिससे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया, तब इंद्र ने अपने हथियार वज्र से उन पर आक्रमण किया और उनकी ठोड़ी पर चोट लग गई।

हनुमान जी का एक स्वरूप है पंचमुखी। ये स्वरूप वीरता और साहस का प्रतीक है। जो लोग रुद्रवतार प्रभु के इस स्वरूप की पूजा और वंदना करते हैं, उनकी राह में भय, क्लेश और बाधा कभी नहीं आती है। पंचमुखी हनुमान के स्वरूप का ध्यान करने से ,भक्त का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। काशी के ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप में उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख और पूर्व दिशा में हनुमान मुख है।

अहिरावण वध के लिए हनुमान जी ने धारण किया था पंचमुखी स्वरूप

पंचमुखी स्वरूप की कथा हनुमान जी और अहिरावण से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार श्रीराम और रावण का युद्ध के समय रावण के यौद्धा श्रीराम को रोक नहीं पा रहे थे। तब रावण ने अपने मायावी भाई अहिरावण को बुलाया। अहिरावण मां भगवती का भक्त था। उसने अपनी माया रची और श्रीराम-लक्ष्मण सहित पूरी वानर सेना को बेहोश कर दिया।

इसके बाद वह श्रीराम-लक्ष्मण को पाताल ले गया और बंदी बना लिया। जब अहिरावण युद्ध भूमि से चला गया तो उसकी माया खत्म हुई। हनुमान जी, विभीषण और पूरी वानर सेना को होश आया तो विभीषण समझ गए कि ये सब अहिरावण ने किया है। विभीषण ने हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण की मदद के लिए पाताल भेज दिया।

विभीषण ने हनुमान जी को बताया था कि अहिरावण ने मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए पांच दिशाओं में दीपक जला रखे हैं। जब तक ये पांचों दीपक जलते रहेंगे, तब तक अहिरावण को पराजित करना संभव नहीं है। ये पांचों दीपक एक साथ बुझाने पर ही अहिरावण की शक्तियां खत्म हो सकती हैं। विभीषण की बातें सुनकर हनुमान जी पाताल लोक पहुंच गए।

पाताल में उन्होंने देखा कि अहिरावण ने एक जगह पांच दीपक जला रखे हैं। हनुमान जी ने पांचों दीपक एक साथ बुझाने के लिए पंचमुखी रूप धारण किया और पांचों दीपक एक साथ बुझा दिए। दीपक बुझने के बाद अहिरावण की शक्तियां खत्म हो गईं और हनुमान जी ने उसका वध कर दिया। उसके बाद हनुमान जी ने श्रीराम-लक्ष्मण को कैद से मुक्त कराया और उन्हें सुरक्षित लेकर लंका पहुंच गए।

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