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राफेल के आने से सुरक्षा बलों को ताकत मिलेगी: BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा

By भाषा | Updated: July 29, 2020 21:38 IST

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि गति से लेकर हथियारों की क्षमताओं तक, राफेल सर्वोत्तम है और ये विमान उड़ान, हथियार, रडार और अन्य सेंसर तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं।

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ठळक मुद्देभारत में राफेल का आगमन भारतीय वायुसेना को हमारे देश पर आने वाले किसी भी खतरे को रोकने में समर्थ बनाएगा। रूस से सुखोई विमानों की खरीद के करीब 23 साल बाद, नये और अत्याधुनिक पांच राफेल लड़ाकू विमानों का बेड़ा आज अंबाला एयर बेस पहुंच गया।फ्रांस के बोरदु शहर में स्थित मेरिगनेक एयरबेस से 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करके ये विमान आज दोपहर हरियाणा में स्थिति अंबाला एयरबेस पर उतरे।

नयी दिल्ली: भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के रूप में पांच विमानों का बेड़ा फ्रांस से बुधवार को अंबाला वायुसेना स्टेशन पहुंचने पर कहा कि इससे न सिर्फ सुरक्षा बलों को और अधिक ताकत मिलेगी बल्कि वायु सेना देश पर आने वाले किसी भी खतरे को रोकने में अहम भूमिका भी निभाएगी।

नड्डा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘‘दृढ़ इच्छाशक्ति’’ के कारण आज राफेल भारत पहुंचा है। देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘‘इसके आने से भारत के सुरक्षा बलों को और अधिक ताकत मिलेगी।’’

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि गति से लेकर हथियारों की क्षमताओं तक, राफेल सर्वोत्तम है और ये विमान उड़ान, हथियार, रडार और अन्य सेंसर तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्होंने कहा कि भारत में इसका आगमन भारतीय वायुसेना को हमारे देश पर आने वाले किसी भी खतरे को रोकने में समर्थ बनाएगा।

इससे पहले, रूस से सुखोई विमानों की खरीद के करीब 23 साल बाद, नये और अत्याधुनिक पांच राफेल लड़ाकू विमानों का बेड़ा आज अंबाला एयर बेस पहुंच गया। इन विमानों के वायुसेना में शामिल होने के बाद देश को आस-पड़ोस के प्रतिद्वंद्वियों की हवाई युद्धक क्षमता पर बढ़त हासिल हो जाएगी।

निर्विवाद ट्रैक रिकॉर्ड वाले इन राफेल विमानों को दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। फ्रांस के बोरदु शहर में स्थित मेरिगनेक एयरबेस से 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करके ये विमान आज दोपहर हरियाणा में स्थिति अंबाला एयरबेस पर उतरे। राफेल विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद दो सुखोई 30 एमकेआई विमानों ने उनकी आगवानी की और उनके साथ उड़ते हुए अंबाला तक आए।

राजग सरकार ने 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस की एरोस्पेस कंपनी दसाल्ट एविएशन के साथ 36 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था। गौरतलब है कि इससे पहले तत्कालीन संप्रग सरकार करीब सात साल तक भारतीय वायुसेना के लिए 126 मध्य बहुद्देशीय लड़ाकू विमानों के खरीद की कोशिश करती रही थी, लेकिन वह सौदा सफल नहीं हो पाया था।

दसाल्ट एविएशन के साथ आपात स्थिति में राफेल विमानों की खरीद का यह सौदा भारतीय वायुसेना की कम होती युद्धक क्षमता में सुधार के लिए किया गया था, क्योंकि वायुसेना के पास फिलहाल 31 लड़ाकू विमान हैं जबकि वायुसेना के स्क्वाड्रन में इनकी स्वीकृत संख्या के अनुसार, कम से कम 42 लड़ाकू विमान होने चाहिए।

अंबाला पहुंचे पांच राफेल विमानों में से तीन विमान एक सीट वाले जबकि दो राफेल दो सीट वाले लड़ाकू विमान हैं। इन्हें भारतीय वायुसेना के अंबाला स्थित स्क्वाड्रन 17 में शामिल किया जाएगा जो ‘गोल्डन एरोज’ के नाम से प्रसिद्ध है।  

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