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कौन थे डॉ. राधा गोविंद कर? 1886 में कोलकाता में स्थापित किया एशिया का पहला गैर-सरकारी मेडिकल कॉलेज

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: August 13, 2024 12:24 IST

Dr Radha Gobinda Kar: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान एक परास्नातक प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म किया गया फिर उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद से कोलकाता का आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी चर्चा में है।

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ठळक मुद्देआरजी कर मेडिकल कॉलेज लंबे समय से कोलकाता की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की आधारशिला रहा हैयह संस्थान एशिया का पहला गैर-सरकारी मेडिकल कॉलेज थामेडिकल कॉलेज की स्थापना डॉ. राधा गोविंद कर ने की थी

Dr Radha Gobinda Kar:कोलकाता में एक महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म एवं हत्या का मामला इस समय सुर्खियों में है। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान एक परास्नातक प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म किया गया फिर उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद से कोलकाता का आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी चर्चा में है।

मेडिकल कॉलेज की स्थापना डॉ. राधा गोविंद कर ने की थी (Dr Radha Gobinda Kar)

इस त्रासदी ने पूरे देश का ध्यान आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की ओर खींचा है। यह संस्थान लंबे समय से कोलकाता की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की आधारशिला रहा है। 1886 में स्थापित, यह संस्थान एशिया का पहला गैर-सरकारी मेडिकल कॉलेज था और इसने पश्चिम बंगाल और उसके बाहर स्वास्थ्य सेवा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेडिकल कॉलेज की स्थापना डॉ. राधा गोविंद कर ने की थी। डॉ. आरजी कर संस्थान के पहले सचिव थे और 1918 में अपनी मृत्यु तक इस पद पर बने रहे।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 12 मई, 1958 को इस पूर्व निजी कॉलेज को अपने अधीन ले लिया। यह पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (WBUHS) से संबद्ध है, और भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) द्वारा मान्यता प्राप्त है। यह स्नातक (MBBS) और स्नातकोत्तर (MS/MD) चिकित्सा शिक्षा के अलावा विभिन्न विषयों में पोस्ट-डॉक्टरेट (DM/MCh), PG डिप्लोमा और फेलोशिप कार्यक्रम प्रदान करता है।

डॉ. आर.जी. कर कौन थे? ( Who Was Dr RG Kar?)

राधा गोविंद कर की बंगाल के समाज बहुत सम्मान है। उन्होंने तत्कालीन कलकत्ता के मध्य में बैठकखाना बाज़ार रोड पर एक किराए के घर से मेडिकल कॉलेज की शुरुआत की थी। ब्रिटिश शासन के दौरान 1852 में डॉ. आर.जी. कर का जन्म हुआ। वह एक चिकित्सक पिता के बेटे थे। कर ने बंगाल मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा की शिक्षा प्राप्त की, जो उस समय एशिया का सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज था। यही बाद में प्रसिद्ध कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के रूप में जाना जाने लगा। स्नातक होने के बाद, वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड के एडिनबर्ग चले गए और 1886 में मेडिकल की डिग्री लेकर वापस लौटे।

वापस लौटने पर  उन्होंने  महसूस किया कि औपनिवेशिक संस्कृति लोगों के लिए मौजूदा मेडिकल स्कूलों का लाभ उठाने में एक बड़ी बाधा थी। इस तरह कर के मन में एक नया मेडिकल स्कूल खोलने का विचार आया और जिस साल वे इंग्लैंड से लौटे, उसी साल 'कलकत्ता स्कूल ऑफ मेडिसिन' अस्तित्व में आया। तब कॉलेज में पेश किए जाने वाले पहले मेडिकल कोर्स की अवधि तीन साल थी और पढ़ाई का माध्यम बंगाली था। इसमें कहा गया है कि कॉलेज की स्थापना के लिए दान पूरे बंगाल से आया था।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज का इतिहास (History of RG Kar Medical College, Kolkata)

बैठक खाना रोड की किराए की इमारत से कॉलेज  बोबाजार स्ट्रीट में शिफ्ट हुआ।  तब इसके साथ कोई अस्पताल नहीं जुड़ा था। इसलिए छात्रों को प्रशिक्षण के लिए हावड़ा के 24 बिस्तरों वाले मेयो अस्पताल में जाना पड़ता था। द टेलीग्राफ़ की एक रिपोर्ट के अनुसार 1898 में, कॉलेज की इमारत के निर्माण के लिए 12,000 रुपये में बेलगाचिया में लगभग 4 एकड़ (12 बीघा) ज़मीन खरीदी गई थी।  चार साल बाद, 1902 में, तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड वुडबर्न ने 30 बिस्तरों वाली, एक मंज़िला अस्पताल की इमारत का उद्घाटन किया, जिसका नाम ब्रिटेन के शाही राजकुमार अल्बर्ट विक्टर के नाम पर रखा गया था।

साल 1904 में, कॉलेज का विलय एक समान संस्थान “कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स ऑफ बंगाल” के साथ हुआ, जिसकी स्थापना 1895 में हुई थी। कलकत्ता स्कूल ऑफ मेडिसिन अंततः 1916 में ‘बेलगछिया मेडिकल कॉलेज’ बन गया, जिसका औपचारिक उद्घाटन तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड कारमाइकल ने किया था। 

दो साल बाद 19 दिसंबर, 1918 को डॉ. आर.जी. कर का निधन हो गया। कर की मृत्यु के एक साल बाद, 1919 में, कलकत्ता विश्वविद्यालय ने कॉलेज को अंतिम एमबी मानक के लिए संबद्धता प्रदान की। कॉलेज को धीरे-धीरे अपनी सर्जिकल बिल्डिंग, एक एनाटॉमी ब्लॉक और एशिया में पहली मनोचिकित्सा ओपीडी मिली। 1935 में परिसर में सर केदार नाथ दास प्रसूति अस्पताल की स्थापना की गई और 1939 में अपनी तरह का पहला अलग कार्डियोलॉजी विभाग बनाया गया। जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली, तब तक यह कॉलेज एक प्रसिद्ध संस्थान बन चुका था। स्वतंत्रता के कुछ महीनों बाद, 12 मई, 1948 को कॉलेज का नाम बदलकर इसके संस्थापक डॉ. आर.जी. कर के नाम पर रखा गया। 

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