लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार को लेकर प्रति 'जीरो टॉलरेंस' के तहत एक्शन लेने के पक्षधर हैं. इसके बाद भी राज्य में आए दिन भ्रष्टाचार से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं. ताजा मामला सूबे की जेल में बंद कैदियों के लिए बनाए जाने वाले खाने में उपयोग होने वाले तेल और मसालों की टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का सामने आया है. जिसके चलते एक चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर देने में गड़बड़ी की गई. टेंडर की टेक्निकल और फाइनेंसियल बिड में दो कंपनियां होने के बावजूद एक को ही सभी दस टेंडर दे दिए गए, वह भी बहुत ही कम अंतर के रेट से.
अब इस मामले का कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने संज्ञान लेते हुए एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों की जांच डीआईजी कारागार प्रदीप गुप्ता को सौंपी है. कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान का कहना कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
ऐसे पकड़ में आया मामला
कारगार विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश की 75 जेलों में बंद कैदियों के लिए बनाए जाने वाले खाने में उपयोग किए जाने वाले तेल, मसाले आदि की सप्लाई के लिए नौ और विद्युत यांत्रिकी का एक टेंडर जारी किया गया था. इस दसों टेंडर के लिए इस आवेदन की अंतिम तिथि पिछले वर्ष 23 अक्टूबर थी.
इस मामले में तकनीकी बिड में तीन कंपनियों शिव शक्ति एंटरप्राइजेज, राजमाता इंफ्राकॉन और एमजी ऑर्गेनाइजेशन को सही पाया गया था. इसके बाद वित्तीय बिड में सभी 10 टेंडर शिव शक्ति इंटरप्राइजेज को दिए गए. यह चर्चा है कि उक्त टेंडर में पहले नंबर पर रही कंपनी शिव शक्ति इंटरप्राइजेज और दूसरे नंबर की कंपनी एमजी ऑर्गेनाइजेशन के रेट में बहुत कम अंतर था.
इस टेंडर में सरसों का तेल, काली मिर्च, इलायची, लालमिर्च, दालचीनी व हल्दी की आपूर्ति की जानी थी. निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाली कंपनी जमुना कांट्रेक्टर एंड सप्लायर ने एक ही कंपनी को सभी टेंडर दिए जाने पर निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी किए जाने का आरोपों लगाया और इस मामले की जांच कराने की मांग शासन से की. बताया जाता है कि इसके बाद ही शासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया.
संयुक्त सचिव कारागार सूर्य प्रकाश मिश्रा ने गत 16 दिसंबर 2025 को डीजी कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा को पीसी मीना को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने को कहा. शासन के इस पत्र पर डीजी कारागार ने कारागार मंत्री से चर्चा की. इसके बाद कारागार मंत्री ने इस मामले की जांच डीआईजी से कराए जाने का आदेश दिया.
मंत्री का कथन
बताया जा रहा है कि कई करोड़ रुपए के इस टेंडर घोटाले में कारागार विभाग के कई अफसर फंसेगे. फिलहाल अभी डीआईजी कारागार ने इस मामले में जांच शुरू नहीं की है. उनका कहना है कि जल्दी ही वह अपनी जांच रिपोर्ट कारागार मंत्री को सौंप देंगे. इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान कह रही हैं.
क्षमता से अधिक कैदी जेल में बंद
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जेल हैं. इसमें सात केंद्रीय कारागार हैं. जबकि 62 जिला कारागार हैं. दो उप कारागार, एक आदर्श कारागार, एक नारी बंदी निकेतन और एक किशोर सदन हैं. इन जेलों में करीब एक लाख बीस हजार कैदी बंद हैं. जबकि राज्य की जेलों में करीब 64 हजार कैदी रखने की क्षमता है. इन कैदियों के लिए जेल में बनाने वाले खाने में जो तेल, मसाले उपयोग किए जाते हैं, उनके लिए जारी हुए टेंडर में घोटाला हुआ है.