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राजभवन नहीं जनभवन कहिए जनाब?, केंद्र के निर्देश पर नाम बदले जाने का नोटिफिकेशन जारी, 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल के आधिकारिक आवास नाम परिवर्तन

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 21, 2026 17:56 IST

अब ‘राजभवन’ के नाम से पहचाने जाने वाले राज्यपाल के आधिकारिक आवास को आगे से सभी शासकीय, प्रशासनिक और वैधानिक कार्यों में ‘जन भवन’ के नाम से ही अभिहित और संबोधित किया जाएगा.

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ठळक मुद्देशेष भवन में पूरी तरह से विशिष्ट पश्चिमी प्रभाव नजर आता है,ब्रिटिश शैली से जुड़े होने की गवाही देता है. ‘लोक भवन’ रखने पर विचार किया जा रहा था.

लखनऊः उत्तर प्रदेश में अभी तक जिले, मोहल्ले और रेलवे स्टेशन का नाम बदला जाता रहा है. परंतु अब लखनऊ स्थित राजभवन का नाम बदलकर जन भवन कर दिया गया है. तो अब राजभवन को जन भवन के नाम से जाना जाएगा. बताया जा रहा है, केंद्र सरकार के निर्देश पर यह फैसला लिया गया. इस संबंध में मंगलवार की शाम केंद्रीय गृह मंत्रालय से राज्यपाल के आधिकारिक आवास के नामकरण को लेकर दिशा-निर्देशों प्राप्त हुआ तो तत्काल प्रभाव से बुधवार को यूपी के राज्यपाल के आधिकारिक आवास ‘राजभवन’ का नाम अब बदलकर ‘जन भवन' करने का नोटिफिकेशन  जारी कर गया. अब ‘राजभवन’ के नाम से पहचाने जाने वाले राज्यपाल के आधिकारिक आवास को आगे से सभी शासकीय, प्रशासनिक और वैधानिक कार्यों में ‘जन भवन’ के नाम से ही अभिहित और संबोधित किया जाएगा.

नवाबों के शासनकाल में बना था

लखनऊ का राजभवन नवाबों के शासनकाल में हरे-भरे पेड़ों के बीच बनवाया गया था. नवाबों के समय इस ऐतिहासिक इमारत कोठी हयात बख्श के नाम से जाना जाता था.  हयात बख्श का अर्थ है 'जीवन दायिनी' जगह. कोठी के अन्दर का राजदरबार भारतीय स्थापत्य-कला शिल्प में बना हुआ है, जबकि शेष भवन में पूरी तरह से विशिष्ट पश्चिमी प्रभाव नजर आता है,

जो इसके ब्रिटिश शैली से जुड़े होने की गवाही देता है. राजभवन के अधिकारियों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने देशभर में राज्यपालों के आवासों के नामकरण को अधिक जनोन्मुखी और एकरूप बनाने के उद्देश्य से यूपी के राजभवन को जन भवन किए जाने का निर्देश जारी किया था. इस निर्देश का पालन किया गया है.पहले  राज्यपाल के आवास का नाम ‘लोक भवन’ रखने पर विचार किया जा रहा था,

लेकिन लखनऊ में ‘लोक भवन’ नाम से पहले से ही मुख्यमंत्री का प्रशासनिक कार्यालय संचालित हो रहा है. ऐसे में एक ही नाम होने से प्रशासनिक कार्यों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी. इस कारण ‘लोक भवन’ के स्थान पर ‘जन भवन’ नाम को अंतिम रूप दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि ‘जन भवन’ नाम जनता से जुड़ाव और पारदर्शिता का प्रतीक है.  इससे शासन की यह भावना भी स्पष्ट होती है कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति जनता के हित में कार्य करते हैं और उनके लिए सदैव उपलब्ध हैं.

अब राजभवन का नाम परिवर्तन किए जाने के बाद आने वाले समय में सभी सरकारी पत्राचार, दस्तावेज, निमंत्रण पत्र, बोर्ड और संकेतक (साइन बोर्ड) में भी ‘राजभवन’ के स्थान पर ‘जन भवन’ नाम का ही उपयोग किया जाएगा. यह बदलाव प्रशासनिक स्तर पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.

इन राज्यों में भी राज्यपाल के आवास का नाम बदला

अधिकारियों का यह भी कहना है कि यूपी के राजभवन का नाम बदले जाने के साथ ही देश आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी राजभवन के नाम परिवर्तित कर उन्हे लोकभवन नाम दिया गया है. केंद्र सरकार के इस फैसले के चलते पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल,असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा और एक केंद्र शासित प्रदेश के राज भवनों के नाम बदले गए हैं.

लद्दाख के उपराज्यपाल के निवास-कार्यालय को अब लोक निवास के नाम से जाना जाएगा. इससे पहले राज निवास कहा जाता था. लद्दाख में किए गए बदलाव का मकसद राज शब्द से जुड़े ब्रिटिश शासन के अवशेषों को हटाना है. अधिकारियों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने पिछले वर्ष राज्यपालों के सम्मेलन में हुई चर्चा के क्रम में यह फैसले लिए गए हैं.

इस सम्मेलन में यह कहा गया था कि  राजभवन नाम औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है. इसके बाद ही गृह मंत्रालय ने राज्यपालों और उप राज्यपालों के कार्यालयों को अब लोकभवन और लोक निवास के नाम से किए जाने का फैसला किया. चूंकि यूपी में सीएम कार्यालय का नाम लोकभवन पहले से ही था इसलिए राज्यपाल के आवास को जन भवन किया गया. राज्यपालों के आवास का नाम बदले के पहले राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया था.

आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में रहने का बनाया रिकॉर्ड

यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल राजभवन में सबसे अधिक समय तक रहने का रिकार्ड बना दिया है. इससे पहले कोई राज्यपाल इतने लंबे समय तक राजभवन में नहीं रहा है. आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश 29 जुलाई, 2019 को यूपी के राज्यपाल का पदभार संभाला था. तब से वह लगातार इस पद पर बनी हुई हैं.

राज्यपाल आनंदीबेन का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन अभी तक उसने स्थान पर किसी की तैनाती नहीं हुई है, इस कारण वह अपने पद पर बनी हुई हैं. आनंदीबेन पटेल गुजरात की सीएम रह चुकी हैं. यूपी के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालने से पहले वह  23 जनवरी, 2018 से 28 जुलाई, 2019 तक मध्य प्रदेश का राज्यपाल रही. इससे पहले, उन्होंने 7 अगस्त, 2016 को गुजरात के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्हे  23 जनवरी, 2018 को उन्हें एमपी का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. 

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