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जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी एम-4 राइफल, स्टील की गोलियों सहित स्टिक बमों से सुरक्षा बलों को बना रहे निशाना

By भाषा | Updated: August 17, 2021 18:07 IST

कश्मीर में आतंकवाद ने एम-4 राइफल से लेकर स्टील की गोलियों और स्टिक बम जैसे खतरनाक बमों का सफर तय कर लिया है. नतीजा यह है कि इन तीन खतरनाक हथियारों की लगातार बरामदगी के बावजूद सुरक्षाबलों को आतंकवादियों के विरूद्ध अपनी रणनीति की पुन: ‘समीक्षा करने पर मजबूर होना पड़ा है.

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कश्मीर में आतंकवाद ने एम-4 राइफल से लेकर स्टील की गोलियों और स्टिक बम जैसे खतरनाक बमों का सफर तय कर लिया है. नतीजा यह है कि इन तीन खतरनाक हथियारों की लगातार बरामदगी के बावजूद सुरक्षाबलों को आतंकवादियों के विरूद्ध अपनी रणनीति की पुन: ‘समीक्षा करने पर मजबूर होना पड़ा है.

ताजा घटनाक्रम में चार स्टिक बम बरामद हुए हैं. जबकि दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में 6 माह पहले हुई एक भयंकर मुठभेड़ अन्य मुठभेड़ों की तरह से मुठभेड़ भी एक आम मुठभेड़ मानी जाती अगर मारे गए आतंकी के पास से बेहद खतरनाक एम-4 कार्बाइन के साथ साथ स्टील की गोलियां बरामद न हुई होतीं.

इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों की चिंता शोपियां में मुठभेड़ में मारे गए आतंकी के पास से बरामद एम-4 कार्बाइन है. इससे पहले भी मुठभेड़ में मारे गए कई आतंकियों के कब्जे से एम-4 कार्बाइन राइफल मिल चुकी है. इसे पाकिस्तान से आतंकियों के लिए भेजा जाता है. इसका कारण ये है कि आतंकियों को इस हथियार को चलाने की अच्छी ट्रेनिंग हासिल होती है. ये उनका पसंदीदा हथियार है.  

बीते साल कुलगाम में हुई मुठभेड़ में मारे गए इमरान भाई नामक पाकिस्तानी जैश के आतंकी से दो हथियार बरामद हुए थे जिनमें से एक एम-4 राइफल थी. इससे आतंकी ज्यादा दूरी से वार कर सकते हैं, क्योंकि इसके ऊपर साइट लगी रहती है.अभी तक सुरक्षाबलों ने जितने भी हथियार बरामद किए हैं, इनमें ज्यादातर संख्या एम-4 राइफल की है. जितने आतंकी अभी जिंदा हैं उनके पास उतने ही हथियार हैं. पाकिस्तान की कोशिश है कि आईबी या एलओसी के रास्ते जैश और लश्कर के और आतंकी कश्मीर में भेजे जाएं.

जानकारी के लिए एम-4 का वजन काफी कम होता है. इसकी बड़ी खासियत है कस्टमाइज़ेशन. इसमें कई सारी चीजें जोड़ी जा सकती हैं. दूर तक देखने के लिए स्कोप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी मारक क्षमता करीब 600 मीटर होती है. साथ ही यह 950 गोलियां लगातार दाग सकती हैं. इसमें बुलेट प्रूफ को भी भेद्यने वाली गोलियां इस्तेमाल हो सकती हैं जो अलग चिंता का विषय है. आतंकी इस गन में अब स्टील की गोलियों का इस्तेमाल करने लगे हैं जो बुलेफ प्रूफ सभी वस्तुओं को भेद्यने लगी हैं.

ठीक इसी प्रार अब छोटे और शक्तिशाली समझे जाने वाले स्टिक बमों की बरामदगी भी चिंता का विषय है. अभी तक यह बम आतंकियों के पास होने की सिर्फ खबरें थीं और चार दिन पहले एक तलाशी अभियान में इनकी बरामदगी ने इसकी पुष्टि कर दी है कि आतंवाद ने कश्मीर में एम-4 गन और स्टील की गोलियों से लेकर स्टिक बम तक का खतरनाक सफर तय कर लिया है जो आने वाले दिनों में भयानक परिस्थितियों की ओर इशारा कर रहे हैं.

टॅग्स :जम्मू कश्मीरश्रीनगरआतंकी हमलाआतंकवादी
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