3 हजार करोड़ का सवाल है रे बाबा! कश्मीर में शराबबंदी पर छिड़ी बड़ी बहस
By सुरेश एस डुग्गर | Updated: May 15, 2026 10:53 IST2026-05-15T10:51:59+5:302026-05-15T10:53:27+5:30
Jammu-Kashmir: इसमें कश्मीर का योगदान बहुमत कम है। आंकडे़ आप बताते हैं कि जम्मू संभाग में 220 शराब की दुकानों से 2740 करोड़ की कमाई अनुमानित है तो बाकी 260 करोड़ कश्मीर से।

3 हजार करोड़ का सवाल है रे बाबा! कश्मीर में शराबबंदी पर छिड़ी बड़ी बहस
Jammu-Kashmir: जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शराबबंदी के मुद्दे पर दोधारी तलवार पर चलने को मजबूर हो रहे हैं। सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि उनकी पार्टी के भी कई नेता इस मामले पर उनका साथ देने को राजी नहीं हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि विपक्ष सिर्फ वोट की राजनीति कर रहा है तो उनकी पार्टी के नेता धर्म पर आधारित कार्ड खेलने लगे हैं।
आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में वर्ष 2026-27 के बजट में शराब की बिक्री से लगभग 3 हजार करोड़ की कमाई का अनुमान लगाया गया है। इसमें कश्मीर का योगदान बहुमत कम है। आंकडे़ आप बताते हैं कि जम्मू संभाग में 220 शराब की दुकानों से 2740 करोड़ की कमाई अनुमानित है तो बाकी 260 करोड़ कश्मीर से।
अधिकारियों के अनुसार, कश्मीर के पांच जिलांें - पुलवामा, शोपियां, बांडीपोरा, बडगाम और कुलगाम मंें ही शराब की दुकानें हैं क्योंकि आज भी बाकी इलाकों में एक डर के कारण इन्हें खोला नहीं जा सका है। पर इतना जरूर था कि जम्मू संभाग की कुल 220 दुकानों में से अकेले 153 दुकानें और 97 बार सिर्फ जम्मू जिले में ही हैं।
और इन आंकड़ों के बावजूद कश्मीर में शराब बिक्री को लेकर बवाल काटा जा रहा है। इसमें धर्मिक संस्थान तो शामिल हैं ही अब भाजपा भी कूद पड़ी है। आज मुख्यमंत्री के आवास के बाहर भाजपा का प्रदर्शन इसी नीति का हिस्सा है जबकि यह रिकार्ड पर है कि भाजपा के ही कई नेता पिछले कई दिनों से कहते फिर रहे हैं कि देश में कानून द्वारा शराबबंदी कामयाब नहीं हो पाई है।
पर पीडीपी के नेता इससे सहमत नहीं हैं। महबूबा मुफ्ती कहती थीं कि बिहार और गुजरात इसके उदाहरण हैं जहां कानून द्वारा शराबबंदी लागू की गई है। पर मुख्यमंत्री इससे सहमत नहीं हैं। वे कहते हैं कि धर्म के आधार पर इसे लागू करना जायज नहीं होगा।
इतना जरूर था कि भाजपा नेताओं की शराबंदी की मांग का विरोध भाजपा के ही कई नेता अप्रत्यक्ष तौर पर विरोध कर रहे थे। दरअसल जम्मू संभाग में शराब का व्यापार एक हद तक अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं के हाथों में है। पहले से ही प्रधानमंत्री की सोना न खरीदने की अपील का सबसे अधिक विरोध जो सोने के व्यापारी कर रहे हैं वे भी किसी न किसी तरह से भाजपा से ही जुड़े हुए हैं।
अब ऐसे मंे सरकार के समक्ष चिंता यह है कि वे शराबबंदी पर आगे कदम कैसे बढ़ाएं क्योंकि अगर ऐसा होता है तो 3 हजार करोड़ का राजस्व हाथ से चला जाएगा। जबकि यह भी सच्चाई है कि भाजपा आप भी जानती है कि इसका जम्मू में भी व्यापक असर होगा पर राजनीति के कारण वह इस घातक पथ पर चली जा रही है।