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मेघालयः शिलांग में हिंसा रोकने के लिए केंद्र ने भेजी सेना, कई इलाकों में लगा है कर्फ्यू

By रामदीप मिश्रा | Updated: June 4, 2018 18:01 IST

गृह मंत्रालय ने शिलांग में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में मदद करने के लिए पैरा-मिलिट्री की 11 कंपनियों को भेजा है।

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शिलांग, 04 मईः मेघालय की राजधानी शिलांग में पिछले चार दिनों से उपजी हिंसा को रोकने के लिए आर्मी बुलाई गई है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सेना की कई कंपनियां भेजी हैं, जिसके बाद सेना शिलांग में फ्लैग मार्च कर स्थिति को नियंत्रण करने की कोशिश करेगी क्योंकि रविवार देर रात कर्फ्यू में ढील दिए जाने के बाद 400 प्रदर्शनकारियों ने सीआरपीएफ कैंप पर जमकर पत्थरबाजी की। इस पत्थरबाजी के बाद कई इलाकों में दोबारा कर्फ्यू लगाया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने शिलांग में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में मदद करने के लिए पैरा-मिलिट्री की 11 कंपनियों को भेजा है। वहीं, रविवार रात हुई हिंसा में भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस के पसीने छूट गए। हिंसा के बाद सोमवार को आईजी सीआरपीएफ प्रकाश डी ने कहा, 'हम आमजन से अपील करते हैं कि वे कानून को अपने हाथ में न लें और बातचीत से मुद्दे का हल निकालें।'इससे पहले शिलांग के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू में ढील दी गई। इस बीच, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि गुरुवार को भड़की हिंसा स्थानीय मुद्दे की वजह से हुई थी और यह सांप्रदायिक प्रकृति की हिंसा नहीं थी। पंजाबी लाइन में रहने वाले लोगों और खासी समुदाय से संबंध रखने वाले सरकारी बस कर्मियों के बीच हुई झड़पों के मद्देनजर शिरोमणि अकाली दल के नेताओं की एक टीम दिल्ली से यहां पहुंची। 

संगमा ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया, 'समस्या एक खास इलाके में एक खास मुद्दे को लेकर हुई। दो समुदाय इसमें शामिल थे, लेकिन यह सांप्रदायिक प्रवृति की चीज नहीं थी। निहित स्वार्थ वाले संगठनों और राज्य से बाहर की मीडिया के एक हिस्से ने शिलांग में हुई झड़पों को सांप्रदायिक रंग दिया।' 

सीएम संगमा ने कहा कि हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए ज्यादातर लोग पूर्वी खासी हिल्स जिले से बाहर के थे। शिलांग पूर्वी खासी हिल्स जिले में ही है। उन्होंने कहा कि हिंसा का वित्तपोषण कर रहे लोगों का पता लगाया जा रहा है।

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