पूरी तरह नाजायज है सूरज की बिजली पर सरकारी शुल्क
By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: May 14, 2026 07:36 IST2026-05-14T07:35:03+5:302026-05-14T07:36:16+5:30
बिजली विभाग को लगता है कि सब लोग यदि सूरज से बिजली बनाने लगेंगे तो उसका दबदबा खत्म हो जाएगा.

पूरी तरह नाजायज है सूरज की बिजली पर सरकारी शुल्क
आप किसी से भी यह सवाल पूछें कि शुल्क का मतलब क्या है? सामान्य समझ वाला व्यक्ति भी यही बताएगा कि यदि आप सरकारी या किसी दूसरे के संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं तो उस पर शुल्क लग सकता है. मगर आप अपने संसाधनों से कुछ उत्पादन कर रहे हैं और खपत भी खुद ही कर रहे हैं तो उस उत्पादन या उपभोग पर सरकारी शुल्क का कोई सवाल ही पैदा नहीं होना चाहिए. बल्कि कोई भी समझदार व्यक्ति इस पर आश्चर्य ही व्यक्त करेगा! मगर महाराष्ट्र सरकार के बिजली विभाग यानी महावितरण को इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगता है.
उसे बस खयाल आया कि जो कंपनियां सोलर एनर्जी से बिजली का उत्पादन कर रही हैं, उनसे 16 प्रतिशत सेवा शुल्क वसूला जाना चाहिए. सूरज से बिजली प्राप्त करने वाली कंपनियों को यह बताने की जरूरत भी नहीं समझी गई कि यह सेवा शुल्क क्यों लगाया जा रहा है? सूरज से बिजली प्राप्त करने के लिए सारे संसाधन कंपनियों ने खुद जुटाए हैं. सरकार का उसमें कोई सहयोग नहीं है.
जो सूर्य ऊर्जा प्राप्त हो रही है, कंपनियां खुद ही उसका उपयोग कर रही हैं तो महावितरण के माध्यम से सरकार को 16 प्रतिशत सेवा शुल्क क्यों लेना चाहिए? महावितरण कौन सी सेवा दे रहा है? हां, यदि कंपनियां दिन में उत्पादित बिजली को ग्रिड पर डालती हैं और रात में ग्रिड से लेकर बिजली का इस्तेमाल करती हैं तो ग्रिड सेवा के रूप में महावितरण को शुल्क वसूलने का अधिकार बनता है.
महावितरण यह राशि ले भी रहा है. यदि उत्पादन ज्यादा है तो महावितरण इसे न्यूनतम दर पर खरीद लेता है और कई गुना ज्यादा दर पर ग्राहकों को देता है. यह बिजली बनाने के लिए बिजली विभाग को माथापच्ची नहीं करनी पड़ती. कायदे से बिजली विभाग को सूरज से बिजली पैदा करने वाली कंपनियों या फिर घरेलू उपभोक्ताओं का शुक्रगुजार होना चाहिए लेकिन हो उल्टा रहा है.
बिजली विभाग को लगता है कि सब लोग यदि सूरज से बिजली बनाने लगेंगे तो उसका दबदबा खत्म हो जाएगा. इसीलिए सोलर एनर्जी उत्पादन करने वालों की नकेल कसने की कोशिश की जा रही है. सवाल है कि महावितरण की इन हरकतों से क्या लोग हतोत्साहित नहीं होंगे! निश्चित रूप से होंगे. सरकार संभवत: इस तरह की वसूली करके किसानों को मुफ्त बिजली की भरपाई करना चाहती है.
किसानों की मदद निश्चय ही होनी चाहिए लेकिन उद्योगों को हतोत्साहित करके नहीं. सोलर एनर्जी पर सेवा शुल्क को लेकर सरकार का रवैया ठीक नहीं है. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाह रहे हैं कि देश में भरपूर सोलर एनर्जी का उत्पादन हो और दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार के महावितरण की हरकतों से इस अभियान को नुकसान पहुंच रहा है. महाराष्ट्र सरकार को इस मसले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए क्योंकि ये सेवा शुल्क पूरी तरह नाजायज है.