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यौन उत्पीड़न का मामलाः तीन सदस्यीय जांच समिति के सामने पेश हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई  

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 2, 2019 13:01 IST

आंतरिक जांच के अगुवा उच्चतम न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस ए बोब्डे हैं व न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी उसकी दो अन्य सदस्य हैं। आरोप लगाने वाली महिला ने मंगलवार को जांच समिति के समक्ष फिर से पेश होने से इनकार कर दिया और वकील की मौजूदगी की मंजूरी नहीं मिलने समेत कई मुद्दों पर आपत्ति उठायी।

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ठळक मुद्देगौरतलब है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोपों की खबर के बाद हर कोई सकते में था।सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली एक महिला ने इस तरह के संगीन आरोप लगाए थे और इस संबंध में 26 वरिष्ठ कानूनविदों को चिट्ठी भी लिखी गई थी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई उच्चतम न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मी द्वारा उन पर लगाये गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच कर रही तीन सदस्यीय आतंरिक जांच समिति के सामने पेश हुए। एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी दी। सूत्र ने कहा , ‘‘प्रधान न्यायाधीश को एक अनुरोध पत्र जारी कर उन्हें समिति के सामने आने को कहा गया था। उस अनुरोध पर वह इस मामले में समिति के सामने पेश हुए।’’

आंतरिक जांच के अगुवा उच्चतम न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस ए बोब्डे हैं व न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी उसकी दो अन्य सदस्य हैं। आरोप लगाने वाली महिला ने मंगलवार को जांच समिति के समक्ष फिर से पेश होने से इनकार कर दिया और वकील की मौजूदगी की मंजूरी नहीं मिलने समेत कई मुद्दों पर आपत्ति उठायी।

सूत्रों ने बताया कि महिला ने प्रक्रिया में सहभागी नहीं होने का विकल्प चुना हालांकि उसे इस कदम के परिणामों के बारे बताया गया था कि समिति एक-पक्षीय रूप से कार्यवाही कर सकती है। वह समिति के समक्ष तीन दिन पेश हुई थी। सूत्र ने कहा, ‘‘यह तथ्य कि समिति एक पक्षीय ढंग से आगे बढ़ सकती है और महिला को यह बात बता दी गई थी। इस पर महिला ने ओके कहा और प्रक्रिया में भाग लेने से खुद को अलग कर लिया।’’ गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली उच्चतम न्यायालय की पूर्व कर्मचारी सोमवार को आंतरिक जांच समिति के सामने पेश हुईं थी और अपना बयान रिकार्ड कराया था।

गौरतलब है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोपों की खबर के बाद हर कोई सकते में था। सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली एक महिला ने इस तरह के संगीन आरोप लगाए थे और इस संबंध में 26 वरिष्ठ कानूनविदों को चिट्ठी भी लिखी गई थी। इस तरह की खबर को चीफ जस्टिस ने सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि आज तक के कानूनी करियर में यह बेहद दुख का पल है।

न्यायपालिका और उससे जुड़े लोगों के लिए साख के अलावा और क्या है। अपनी पीड़ा का इजहार करते हुए उन्होंने गहरी साजिश की तरफ इशारा किया। 

वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया था जिसमें मीडिया को प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोप प्रकाशित करने से रोकने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मी ने न्यायमूर्ति गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने एक एनजीओ की तरफ से दायर की गई इस याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि शीर्ष अदालत मामले पर विचार कर रहा है और विभिन्न आदेश पारित किए गए हैं, जिनमें कुछ जांच शुरू करने के निर्देश भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि एक बार सर्वोच्च अदालत मामले पर सुनवाई कर रहा है तो इस अदालत के दखल की कोई जरूरत ही नहीं है।

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