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लोकसभा चुनावः देश-विदेश में पीएम मोदी को गुजरातियों का कितना समर्थन मिल पाएगा?

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: February 8, 2019 12:02 IST

गुजरात का गौरव नरेन्द्र मोदी! इस गुजराती भावना और सहयोग के साथ पीएम मोदी का केन्द्र में सियासी सफर शुरू हुआ।

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वर्ष 2014 के लोस चुनाव में पीएम मोदी को गुजरात में ही नहीं, देश-विदेश में बसे गुजरातियों ने भी खुलकर सहयोग दिया था, जिसके नतीजे में देश में मोदी मैजिक खड़ा हो गया था. इसी का नतीजा था कि गुजरात के सफल मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को गुजरात के बाहर भी जोरदार साथ मिला और वे 2014 में अकल्पनीय जीत दर्ज करवाने में कामयाब रहे.

गुजरात का गौरव नरेन्द्र मोदी! इस गुजराती भावना और सहयोग के साथ पीएम मोदी का केन्द्र में सियासी सफर शुरू हुआ, लेकिन इन पांच वर्षों में मोदी सरकार के कामकाज को लेकर अब लोग एकमत नहीं है. यही वजह है कि अब मोदी मैजिक बेअसर होता जा रहा है. इसीलिए बड़ा सवाल यह भी है कि- इस बार लोस चुनाव में देश-विदेश में पीएम मोदी को गुजरातियों का कितना समर्थन मिल पाएगा? 

भावनात्मक लहर कितनी कमजोर पड़ गई है इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी को अपनी सत्ता बचाने में पसीने आ गए थे, जबकि पीएम मोदी के अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी गुजरात से ही हैं. अकेले राहुल गांधी, पीएम मोदी, अमित शाह सहित एक दर्जन केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों पर भारी पड़े.

यह तो कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के पीएम मोदी को लेकर दिए गए एक बयान का कमाल था, जिसका बीजेपी ने चतुराई से इमोशनल उपयोग किया और चुनाव जीत गई, वरना नतीजे कुछ और भी हो सकते थे.

लेकिन, परिणाम बताते हैं कि 182 सीटों वाले गुजरात विस चुनाव में जहां बीजेपी शतक भी नहीं लगा पाई और 99 सीटों पर अटक गई, वहीं कांग्रेस ने प्रदर्शन सुधारते हुए 79 सीटें हांसिल की, मतलब साफ है कि- लोस चुनाव 2019 बीजेपी के लिए गुजरात में भी आसान नहीं हैं, जहां से पिछली बार बीजेपी ने 26 में से 26 सीटें जीत लीं थी. गुजरात में बीजेपी के पास इससे आगे पाने के लिए कुछ नहीं है, तो कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है. लोस चुनाव की हर जीती हुई सीट कांग्रेस के पास पीएम मोदी की उपलब्धियों को गुजरात में ही नकारने का प्रमाण पत्र होगा.

गुजरात की ताजा सियासी तस्वीर को लेकर बीजेपी नेतृत्व भी समझ रहा है कि इस बार 2014 की तरह आसान सियासी जंग नहीं है और 26 सीटें बचाने के लिए बहुत ताकत लगानी पड़ेगी, क्योंकि विरोधियों के अलावा प्रवीणभाई तोगड़िया, हार्दिक पटेल आदि की सक्रिय सियासी मौजूदगी असर दिखाएगी. बीजेपी के चुनाव प्रभारी वरिष्ठ नेता सांसद ओम माथुर एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और नई रणनीति पर कार्य भी शुरू कर दिया है.

इधर, तीन प्रमुख प्रदेशों- एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के बाद कांग्रेस के हौंसले भी बुलंद हैं और बीजेपी को मोदी के गृहप्रदेश गुजरात में ही कड़ी चुनौती देने की रणनीति पर काम प्रारंभ हो गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 14 फरवरी को गुजरात के वलसाड से लोकसभा चुनाव प्रचार आरंभ करेंगे. 

याद रहे, दक्षिण गुजरात से विस चुनाव में कांग्रेस को अपेक्षा के अनुरूप कामयाबी नहीं मिली थी, परन्तु राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यहां कांग्रेस के लिए बेहतर संभावनाएं हैं. 

जहां बीजेपी के सामने 26 सीटें बचाने की कड़ी चुनौती है, वहीं माना जा रहा है कि कांग्रेस करीब आधा दर्जन सीटें तो आसानी से जीत सकती है, किन्तु ज्यादा सीटं जीतने के लिए उसे ताकत लगानी पड़ेगी. 

गुजरात की ताजा राजनीतिक तस्वीर बता रही है कि जब गुजरात में ही पीएम मोदी के लिए संपूर्ण समर्थन जुटाना संभव नहीं हो पा रहा है तो देश-विदेश से 2014 जैसा गुजरातियों का सहयोग प्राप्त करना इस बार पीएम मोदी के आसान नहीं होगा, अर्थात 2019 में 2014 वाला इमोशनल सपोर्ट हांसिल करना बेहद मुश्किल है!

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